अब आर्थिक कानूनों में बदलाव करने की जरूरत: अश्विनी वैष्णव

नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत को अपनी वृद्धि की जरूरतों को देखते हुए आर्थिक कानूनों में बदलाव करने की जरूरत है. उन्होंने औपनिवेशक दौर के कानूनों की जगह लेने के लिए बनाए गए तीन नए आपराधिक कानूनों का जिक्र करते हुए बृहस्पतिवार को यह बात कही.

सरकारी शोध संस्थान नीति आयोग के एक कार्यक्रम में वैष्णव ने कहा कि देश भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लागू होने के साथ आपराधिक न्यायशास्त्र में बदलाव का गवाह बनने जा रहा है. इन तीनों कानूनों को पिछले साल 21 दिसंबर को संसद की मंजूरी मिली थी जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर को इन्हें मंजूरी दी थी. ये तीनों कानून क्रमश? भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह लेंगे.

संचार, रेलवे और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री वैष्णव ने कहा, ”इन कानूनों की तरह हमारी मौजूदा आवश्यकताओं और वृद्धि की जरूरतों को देखते हुए आर्थिक कानूनों में भी बदलाव की जरूरत है.” उन्होंने कहा, ”अगर आप 2,000 अच्छे वकीलों की सेवाएं लेते हैं तो आप अगले पांच वर्षों में लगभग 35,000 कानूनों में सुधार कर सकते हैं.” वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में सरकार विनिर्माण क्षेत्र पर अधिक ध्यान देगी क्योंकि इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की व्यापक क्षमता है.

इससे पहले वैष्णव ने नीति आयोग के नए मंच ‘नीति फॉर स्टेट्स’ की शुरुआत की जो नीति और शासन के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा है. इसके अलावा उन्होंने नीति आयोग की इमारत में ‘विकसित भारत रणनीति कक्ष’ का भी उद्घाटन किया. यह कक्ष प्रभावी निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए अंतर्दृष्टि, सूचना और ज्ञान साझा करने का काम करेगा.

नीति आयोग के डिजिटल बुनियादी ढांचा मंच की वैष्णव ने शुरुआत की

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग के मंच ‘नीति फॉर स्टेट्स’ की शुरुआत की जो नीति और शासन के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा है. संचार, रेलवे और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री वैष्णव ने नीति आयोग की इमारत में ‘विकसित भारत रणनीति कक्ष’ का भी उद्घाटन किया. यह कक्ष प्रभावी निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए अंतर्दृष्टि, सूचना और ज्ञान साझा करने का काम करेगा.

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, नीति आयोग का मंच ‘नीति फॉर स्टेट्स’ 7,500 सर्वोत्तम प्रथाओं, 5,000 नीतिगत दस्तावेजों, 900 से अधिक डेटासेट, 1,400 डेटा प्रोफाइल और 350 नीति प्रकाशनों का एक बहु-क्षेत्रीय सजीव भंडार होगा. इस डिजिटल मंच पर उपलब्ध सूचनाएं 10 क्षेत्रों से जुड़ी हैं. इनमें कृषि, शिक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आजीविका और कौशल, विनिर्माण, एमएसएमई, पर्यटन, शहरी मामले, जल संसाधन और जल, स्वच्छता एवं स्वच्छता) शामिल हैं. ये तमाम आंकड़े स्त्री-पुरुष विभाजन और जलवायु परिवर्तन की विषयवस्तु पर उपलब्ध होंगे.

बयान के मुताबिक, यह मंच सरकारी अधिकारियों को मजबूत, प्रासंगिक और कार्रवाई-लायक ज्ञान एवं अंतर्दृष्टि देगा जिससे उनके निर्णय लेने की गुणवत्ता बढ़ेगी. बयान में कहा गया है कि यह मंच जिलाधिकारियों और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नवीन सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुंच प्रदान करके भी समर्थन देगा.

वहीं ‘विकसित भारत रणनीति कक्ष’ में उपयोगकर्ता डेटा, रुझान, सर्वोत्तम प्रथाओं और नीतियों की एक गहन वातावरण में परिकल्पना कर सकेंगे जिससे उन्हें किसी भी समस्या का समग्र मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी. यह कक्ष उपयोगकर्ताओं को आवाज से संचालित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से बातचीत करने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कई हितधारकों से जुड़ने की भी अनुमति देता है. इसे राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रतिकृति को सक्षम बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. नीति आयोग की इस पहल में विभिन्न सरकारी संगठनों ने सहयोग किया है. इनमें कौशल प्रशिक्षण का ऑनलाइन मंच आईजीओटी (एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण) कर्मयोगी भी शामिल है.

Related Articles

Back to top button