
संबलपुर. ओडिशा के गोविंदपुर गांव ने खुद को ‘पक्षी गांव’ घोषित कर दिया है. गांव के लोग प्रजनन और प्रवासन के लिए हीराकुंड जलाशय में आने वाले पक्षियों की रक्षा करने के अपने निश्चय पर अडिग हैं. बारगढ़ जिले में हीराकुंड झील के समीप लखनपुर वन्यजीव क्षेत्र में स्थित इस गांव के लोगों ने क्षेत्र को प्रवासी पक्षियों के वास्ते प्रदूषणमुक्त रखने का वादा किया है. स्थानीय लोगों ने हीराकुंड वन्यजीव संभाग के मार्गदर्शन में यह पहल की है.
एक वन अधिकारी ने कहा कि ग्रामीणों की भागीदारी से पक्षियों की रक्षा करने के लिए उनमें स्वामित्व का बोध पैदा होगा.
दो अन्य निकटवर्ती गांवों– तामदी और रामखोल ने भी बैठक कर पक्षियों के परिरक्षण के वास्ते काम करने का संकल्प किया.
अधिकारी ने कहा कि इन गांवों में मकानों की दीवारों पर रेडक्रेस्टेड पोचार्ड, मूरहेन, स्कीमर जैसे रंगबिरंगी पक्षियों के भित्तिचित्र बनाये गये हैं.
स्थानीय लोग अपने आसपास के स्थानों को साफ-सुथड़ा रखने का प्रयास करते हैं . हीराकुद संभाग ने जगह-जगह कूड़ादान लगाये हैं.
इस साल हीराकुंड को रामसर स्थल घोषित किये जाने के बाद से इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटकों, छायाकारों के पहुंचने की संभावना है. हर साल दो लाख से अधिक पक्षी छह माह के लिये ठहरने और प्रजनन करने के उद्देश्य से हीराकुंड जलाशय आते हैं . प्रवासी पक्षियों की करीब 100 प्रजातियां हर साल अक्टूबर में जलाशय आती हैं. यह जलाशय 746 वर्ग किलोमीटर में फैला है. छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के झारसुगुडा, बोलनगीर, सोनेपुर, संबलपुर और बारगढ़ जिलों के पर्यटक पिकनिक, नौकायन एवं पक्षियों को निहारने के लिए इन तीनों गावों में आते हैं.



