ओडिशा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने पुलिस कर्मियों की वीरता को याद किया

भुवनेश्वर: ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को कानून का शासन बनाए रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस र्किमयों की वीरता और अथक प्रयासों को याद किया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस पर कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलि भी दी।

राज्यपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “उनकी (पुलिस र्किमयों की) वीरता, निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता साहस और समर्पण के सर्वोच्च आदर्शों का प्रतीक है। हम उन शहीदों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते हैं जिन्होंने हमारी सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।’’

माझी ने सोशल मीडिया मंच पर पुलिस र्किमयों के अटूट समर्पण को सलाम किया। उन्होंने कहा, ‘‘आपकी वीरता और अथक परिश्रम कानून के शासन को बनाए रखते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। हम आपकी इस महत्वपूर्ण सेवा के लिए राष्ट्र की ओर से कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।’’ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुरानिया ने शहीद पुलिसर्किमयों को कटक स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

राज्य पुलिस ने बहादुर जवानों को औपचारिक सलामी दी और कुछ पल का मौन रखा। डीजीपी ने कहा, ‘‘हमारे पुलिस अधिकारी और जवान जम्मू-कश्मीर, पंजाब, पूर्वोत्तर राज्यों और नक्सल प्रभावित इलाकों में बहादुरी से लड़ रहे हैं। हमारे पुलिसर्किमयों की बहादुरी की बदौलत ही हम माओवाद प्रभावित इलाकों में शांति और सुरक्षा स्थापित करने में कामयाब रहे हैं और आने वाले दिनों में भी ऐसा करते रहेंगे।”

कटक में मीडियार्किमयों से बात करते हुए खुरानिया ने कहा कि राज्य पुलिस हमेशा लोगों की सेवा के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि ओडिशा पुलिस राज्य में माओवादी गतिविधियों को कम करने में कामयाब रही है और इसके लिए कई सुरक्षार्किमयों ने अपने प्राणों की आहुति दी है।

उन्होंने कहा, “उनके सर्वोच्च बलिदान के कारण ही आज हम समाज में शांति से रह पा रहे हैं।” पुलिस स्मृति दिवस हर साल 21 अक्टूबर को उन पुलिसर्किमयों की स्मृति में मनाया जाता है जो कर्तव्य निभाते हुए शहीद हो गए थे। वर्ष 1959 में इसी दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

तब से, यह दिन भारत के पुलिस बलों की अटूट प्रतिबद्धता, साहस और बलिदान की याद के रूप में मनाया जाता है, जो देश भर के नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं। इस वर्ष, विभिन्न केंद्रीय पुलिस बलों और राज्य पुलिस के 191 पुलिसर्किमयों ने अपने प्राणों की आहुति देकर अपनी मातृभूमि को गौरवान्वित किया है। इनमें ओडिशा के रायगढ़ जिले के कांस्टेबल लक्ष्मण माझी और यूपीडी कटक के लोकनाथ सबर भी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए शहीद हो गए।

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