
श्रीनगर/नयी दिल्ली. नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर एक समाचार लेख साझा किया, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस लेख में कहा गया है कि बारामूला लोकसभा सीट से इंजीनियर राशिद की जीत से “अलगाववादियों” को बढ़ावा मिलेगा.
विवाद उस समय खड़ा हुआ जब निजी समाचार एजेंसी ने ‘एक्स’ पर लेख का कुछ हिस्सा लिया और उसके साथ लिखा कि उमर अब्दुल्ला ने ऐसा कहा है. इसके बाद पीडीपी के वहीद पर्रा समेत जम्मू – कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी. अब्दुल्ला को इंजीनियर राशिद के नाम से लोकप्रिय शेख अब्दुल राशिद के सामने दो लाख से अधिक वोट से हार का सामना करना पड़ा है. राशिद आतंकवाद के आरोपों में जेल में बंद हैं. अब्दुल्ला ने हार स्वीकार करते हुए राशिद को जीत की बधाई दी.
समाचार लेख साझा करने के लिए अब्दुल्ला पर कटाक्ष करते हुए पीडीपी की युवा शाखा के अध्यक्ष पर्रा ने लिखा, “उमर अब्दुल्ला के प्रतिगामी रुख से बेहद निराशा हुई, जो 1987 की विभाजनकारी राजनीति को प्रतिध्वनित करता है. उन्होंने लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को ‘इस्लामी लहर करार दिया है.” उन्होंने कहा, “महबूबा मुफ्ती की तरह इंजीनियर रशीद की रिहाई की गुहार लगाना जनादेश की स्वीकृति होती.” अब्दुल्ला ने इसपर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह स्वयं न केवल इंजीनियर राशिद बल्कि जेलों में बंद हजारों अन्य लोगों की भी रिहाई के पक्षधर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “वहीद, मैं आमतौर पर यहां किसी भी तरह की बातचीत में शामिल नहीं होता, लेकिन इस बार मैं एक अपवाद कायम कर रहा हूं. मैंने अपने पूरे प्रचार अभियान में इंजीनियर की रिहाई के बारे में बात की और उनके प्रचार अभियान के विपरीत मैंने 2019 से हिरासत में लिए गए हजारों लोगों को रिहा करने की आवाज उठाई.” अब्दुल्ला ने कहा, “मैंने यहां जो लेख साझा किया है, उसमें मेरे विचार नहीं हैं, बल्कि एक दृष्टिकोण हैं. मैं कुछ हिस्सों से सहमत हो सकता हूं, कुछ हिस्सों से असहमत हो सकता हूं, लेकिन वह एक राय है. जहां तक राशिद की रिहाई का सवाल है, यह अदालत का मामला है, सभी मामलों में ऐसा ही होता है.”
दिल्ली की अदालत ने इंजीनियर रशीद की अंतरिम जमानत याचिका पर एनआईए से जवाब मांगा
दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को 2016 के जम्मू-कश्मीर आतंकवाद वित्तपोषण मामले में गिरफ्तार इंजीनियर रशीद द्वारा दायर एक आवेदन पर कल तक जवाब देने का निर्देश दिया. इस आवेदन में उन्होंने हाल में संपन्न आम चुनावों के बाद सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए अंतरिम जमानत दिये जाने का अनुरोध किया है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व विधायक शेख अब्दुल रशीद को इंजीनियर रशीद के नाम से जाना जाता है. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हराया है. उन्होंने शपथ लेने और संसदीय कार्य करने के लिए अंतरिम जमानत या हिरासत में पैरोल दिये जाने का अनुरोध करते हुए अदालत में याचिका दायर की. यह आवेदन चार जून को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्रजीत सिंह के समक्ष पेश किया गया था और उन्होंने एनआईए को आज तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था. एजेंसी ने हालांकि जवाब दाखिल करने के लिए बृहस्पतिवार को और समय मांगा.
रशीद 2019 से जेल में हैं, जब एनआईए ने उन पर कथित आतंकी वित्तपोषण मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप लगाया था. वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं. पूर्व विधायक का नाम कश्मीरी व्यवसायी जहूर वटाली की जांच के दौरान सामने आया था. वटाली को एनआईए ने घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को वित्त पोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया था.



