
जम्मू: जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ”जेन-जी की शिकायतें जायज हैं और विरोध-प्रदर्शन करने से कोई राष्ट्र विरोधी नहीं हो जाता।” भागवत की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि यह उत्साहजनक है कि सरकार का विरोध करने और देश का विरोध करने के बीच अंतर को स्वीकार किया गया है।
उन्होंने कहा, ”अच्छी बात यह है कि मोहन भागवत जी ने इस अंतर को स्वीकार किया है। सरकार का विरोध करना देश का विरोध करना नहीं है। वास्तव में सरकार का विरोध कई बार देश के हित में होता है, क्योंकि इससे जहां भी गलतियां होती हैं, उन्हें सुधारने में मदद मिलती है।”
बृहस्पतिवार को मुंबई में ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (आईआईएमयूएन) की 15वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में लगभग 2,000 ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा था, ”यदि जेन-जी के युवा आंदोलन कर रहे हैं तो वे राष्ट्रविरोधी नहीं हैं। वे हमारे अपने लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं। उनके साथ संवाद और बेहतर संबंध बनाने की जरूरत है।” ‘जेन-जी’ 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी है तथा ‘जेन-अल्फा’ का जन्म 2013 से 2025 के बीच हुआ है।



