विपक्ष के मार्च में बवाल: बैरिकेड्स कूदकर अखिलेश ने दिया धरना; हिरासत में लिए गए राहुल-प्रियंका समेत कई सांसद

Author: www.navabharat.news
UPDATED: Mon, 11 Aug 2025 01:32 PM
विपक्ष के मार्च में बवाल: बैरिकेड्स कूदकर अखिलेश ने दिया धरना; हिरासत में लिए गए राहुल-प्रियंका समेत कई सांसद
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विपक्ष के मार्च में बवाल: विपक्ष के मार्च के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पुलिस बैरिकेड के ऊपर से कूद गए और बीच सकड़ पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी नारेबाजी करती नजर आईं। दरअसल, विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के नेता बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान ‘मतदाता धोखाधड़ी’ के आरोपों के विरोध में संसद से भारत के चुनाव आयोग तक मार्च निकाल रहे थे।

विपक्षी दलों के मार्च और विरोध प्रदर्शन की है, जो बिहार में मतदाता सूची संशोधन और ‘एसआईआर’ (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के खिलाफ हैं। मुख्य बिंदु हैं:

प्रदर्शन का कारण: विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया से मतदाताओं की पहचान और वोटिंग अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है। वे इसे ‘वोट चोरी’ और लोकतंत्र के खिलाफ कदम मानते हैं।

विरोध का तरीका: संसद से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालने का प्रयास, जिसमें विपक्षी सांसदों ने बैरिकेड्स पर चढ़ने और तोड़ने का प्रयास किया। कई नेता, जैसे अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी समेत, प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ले लिए गए।

पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए थे, और कुछ सांसदों को हिरासत में लिया गया। अखिलेश यादव बैरिकेड्स को कूदकर सड़क पर धरने पर बैठ गए।

नेताओं की प्रतिक्रिया:

अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार पुलिस का इस्तेमाल कर विपक्ष को रोक रही है।
प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।
मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य नेताओं ने कहा कि यह विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास है।
सामाजिक और राजनीतिक संदेश: विपक्ष का आरोप है कि ये कदम बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को वोट से वंचित करने की कोशिश है, और वे इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं ताकि चुनाव में निष्पक्षता बनी रहे।

सारांश: यह विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक आवाज है, जिसमें विपक्षी नेता और सांसद अपने मताधिकार की रक्षा के लिए सड़क पर उतर आए हैं। सरकार और पुलिस का दावा है कि बिना अनुमति के प्रदर्शन और मार्च को रोका गया है, और हिरासत का कदम कानून के तहत है।

यह पूरी घटना विपक्ष की आक्रामकता और सरकार की कार्रवाई के बीच चल रहे टकराव का प्रतीक है, जो लोकतंत्र में विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अहम हिस्सा है।

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