नयी दिल्ली. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने संसद के शीतकालीन सत्र में अपनायी जाने वाली रणनीति को लेकर बुधवार को चर्चा की और फैसला किया इस सत्र में महंगाई , बेरोजगारी , चीन के साथ सीमा विवाद , राष्ट्रीय सुरक्षा को बाहरी खतरे समेत जनता से जुड़े कई मुद्दों को उठाएंगे. विपक्षी दलों ने यह उम्मीद भी जताई कि विपक्ष को दोनों सदनों में अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा तथा महत्वपूर्ण विधेयकों की पड़ताल के लिए उन्हें संसदीय समितियों के पास भेजा जाएगा.
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से बुलाई गई बैठक में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के टी. आर. बालू, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय, आम आदमी पार्टी (आप) के संजय ंिसह, नेशनल कांफ्रेस (नेकां) के ŸफारूŸक अब्दुल्ला समेत 14 विपक्षी दलों नेता शामिल हुए. यह बैठक संसद भवन स्थित खरगे के कक्ष में हुई.
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने ट्वीट किया, ‘‘संसद लोकतांत्रिक विमर्श का मुख्य स्थल है. समान विचारधारा वाले दल जनता से जुड़े सभी मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्ष को भागीदारी का अधिक मौका मिलने की बात कही है. ऐसे में हम आशा करते हैं कि सरकार अपने कहे पर अमल करेगी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर कानून जल्दबाजी में बनाए जाते हैं तो वो न्यायिक छानबीन के दायरे में आते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि सभी महत्वपूर्ण विधेयकों को संयुक्त समिति या प्रवर समितियों के पास भेजा जाना चाहिए ताकि उनकी पूरे ध्यान से छानबीन की जा सके.’’ खरगे ने कहा, ‘‘हम संसदीय प्रक्रिया और चर्चा में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं.’’
सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों ने फैसला किया कि वे इस सत्र में महंगाई , बेरोजगारी , चीन के साथ सीमा विवाद , राष्ट्रीय सुरक्षा को बाहरी खतरे , विदेश नीति , मोरबी पुल हादसा , न्यायपालिका पर ‘ केंद्र के हमले ’, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण , राज्यपालों के पद का कथित दुरुपयोग , आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण, उच्चतम न्यायालय के फैसले से जुड़े विषय समेत कई मुद्दे उठाएंगे. सात दिसंबर से शुरू हुआ संसद का शीतकालीन सत्र तय कार्यक्रम के मुताबिक 29 दिसंबर तक चलेगा.