नयी दिल्ली. संसद ने सोमवार को ‘ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें कम से कम 100 किलोवाट के विद्युत कनेक्शन वाली इमारतों के लिये नवीकरणीय स्रोत से ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का प्रावधान किया गया है. सरकार ने इस विधेयक को ‘‘भविष्योन्मुखी’’ करार दिया है.
राज्यसभा ने इस विधेयक को चर्चा के बाद आज ध्वनिमत से पारित कर दिया. सदन ने विधेयक के संबंध में विपक्षी सदस्यों द्वारा लाये गये संशोधन प्रस्तावों को खारिज कर दिया. लोकसभा इसे अगस्त माह में ही पारित कर चुकी है. विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विद्युत, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह ने कहा कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर पूरे देश को गर्व होना चाहिए क्योंकि अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने में राष्ट्र ने जो कुछ हासिल किया है, वैसा बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और विकसित देश नहीं कर पाए हैं.
विधेयक को भविष्योन्मुखी करार देते हुए सिंह ने कहा, ‘‘जो विकसित देश पहले हमें (पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कटौती को लेकर) भाषण देते थे, आज जब वे हमारा काम देखते हैं तो वे रक्षात्मक मुद्रा में आ जाते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने पेरिस में जो संकल्प किया था कि 2030 तक हम अपनी अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता 35-40 प्रतिशत कम करेंगे और हमने 2022 में ही 30 प्रतिशत हासिल कर लिया है.’’ उन्होंने कहा कि भारत हरित ऊर्जा, नवीनीकरण ऊर्जा और पर्यावरण बदलाव के मामले में ‘‘लीडर’’ है.
सिंह ने कहा कि पेरिस में हुए संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप 21) में भारत ने तय किया था कि 2030 तक बिजली उत्पादन क्षमता का 40 प्रतिशत अक्षय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे गैर-जीवाश्म ईंधन वाले स्रोतों से पूरा किया जाएगा और इस लक्ष्य को देश ने नवंबर 2021 में ही प्राप्त कर लिया.
उन्होंने कहा, ‘‘आज हमारी गैर जीवाश्म से बनने वाली बिजली की क्षमता एक लाख 73 हजार मेगावाट है. यह हमारी कुल स्थापित क्षमता की 42 प्रतिशत है.’’ सिंह ने कहा कि गैर जीवाश्म ईधन वाले दो स्रोत हैं…नवीनीकरण ऊर्जा स्रोत और परमाणु बिजली स्रोत. उन्होंने कहा कि विश्व के कई देशों ने जीवाश्म ऊर्जा साधनों के स्थान पर गैर जीवाश्म ईधन से ऊर्जा बनाने का जो लक्ष्य रखा है उसमें परमाणु ऊर्जा का योगदान 50 प्रतिशत तक है ंिकतु भारत में परमाणु ऊर्जा की स्थापित क्षमता बहुत कम छह हजार 800 मेगावाट ही है.
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के संकट से निकलने के बाद भारत ने पिछले वर्ष नवीनीकरण ऊर्जा के माध्यम से 14 हजार मेगावाट बिजली की क्षमता स्थापित की. उन्होंने कहा कि भारत की आज गैर जीवाश्म ऊर्जा की क्षमता एक लाख 73 हजार मेगावाट है. इसमें यदि निर्माणाधीन क्षमता को जोड़ दिया जाए तो यह कुल मिलाकर दो लाख 45 हजार मेगावाट हो जाती है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे में हर देश को यह समझ में आ गया है कि उन्हें इस दिशा में कदम उठाना होगा. उन्होंने कहा कि भारत के मॉडल और पद्धति को देखने के लिए आज कई देश यहां आ रहे हैं.
उन्होंने कहा कि देश में एक तरफ जहां नवीनीकरण या हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाया जा रहा है वहीं जो ऊर्जा हम उपयोग कर रहे हैं उसमें दक्षता पर भी जोर दिया जा रहा है. इसका मतलब है कि जो उत्पाद बनाया जा रहा है उसमें लगने वाली ऊर्जा की मात्रा को कम किया जाए. उन्होंने कहा कि इसके लिए उद्योगों को समय समय पर अलग-अलग लक्ष्य दिये जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार एसी और रेफ्रिजिरेटर आदि उपकरणों की ‘लेबंिलग’ करती है ताकि उन्हें ऊर्जा दक्षता के आधार पर उपयुक्त बनाया जा सके. उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल वाच’ ने जब पर्यावरण संबंधी कदमों को लेकर इस क्षेत्र में विभिन्न देशों द्वारा उठाये गये कदमों की समीक्षा की तो भारत को पांचवां स्थान मिला और शुरूआती चार देशों में मोरक्को, डेनमार्क, चिली आदि छोटे-छोटे देश हैं. उन्होंने कहा कि इस सूची में भारत जैसी विशाल आबादी वाला कोई देश अग्रणी स्थान पर नहीं पहुंच पाया है.
इससे पहले विधेयक पर चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने यह आशंका जतायी थी कि इस विधेयक के माध्यम से राज्यों के अधिकारों में कटौती हो रही है. उनकी इस आशंका को निराधार ठहराते हुए सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण ऐसा क्षेत्र है जिसमें केंद्र और राज्य सरकार साथ मिलकर एक इकाई के रूप में काम कर रहे हैं और इसमें किसी के अधिकार छीनने का प्रश्न ही नहीं उठता है.
उन्होंने कहा कि ‘कार्बन क्रेडिट’ कारोबार में जो कंपनियां या उद्योग अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करेंगे उन्हें ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र दिया जाएगा. ंिकतु जो लोग अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएंगे उनके सामने दो विकल्प होंगे. ऐसे उद्योगों को लक्ष्य पूरा नहीं करने पर या तो दंड देना पड़ेगा या वे लक्ष्य से अधिक उत्सर्जन करने वालों से प्रमाण खरीद सकते हैं.
इस विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि इसमें ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिये हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया, बायोमास और इथेनॉल सहित गैर-जीवाश्म स्रोतों के उपयोग का प्रस्ताव किया गया है. इसमें कहा गया है कि बड़ी आवासीय इमारतें 24 प्रतिशत बिजली का उपभोग करती हैं और इस विधेयक में ऐसी इमारतों को अधिक ऊर्जा सक्षम एवं वहनीय बनाने के प्रावधान किए गए हैं.