संसदीय समिति ने मनरेगा के कई पहलुओं और जी राम जी विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर चर्चा की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 29 Dec 2025 09:06 PM
संसदीय समिति ने मनरेगा के कई पहलुओं और जी राम जी विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर चर्चा की
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नयी दिल्ली. संसद की एक समिति ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के साथ इस पर भी विचार किया कि नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा बनाए गए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के सुचारु क्रियान्वयन के लिए अगले छह महीनों में कैसे आगे बढ़ना है.

सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसद की स्थायी समिति के अधिकतर सदस्य इस बात को लेकर चिंतित थे कि अगले छह महीनों में परिवर्तन कैसे होगा जब सरकार मनरेगा की जगह जी राम जी अधिनियम को लागू करेगी. उनकी चिंता इस बात को लेकर थी कि इस अवधि के दौरान लाभार्थियों को भुगतान कैसे किया जाएगा और अतिरिक्त बजटीय सहायता की व्यवस्था कैसे की जाएगी.

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान कई सदस्यों ने चिंता व्यक्त की कि पुराने कानून के तहत कार्य का पंजीकरण कई राज्यों में केवल 50 प्रतिशत के आसपास था. सदस्यों ने यह भी कहा कि जी राज जी अधिनियम को लागू करने में कम से कम छह महीने लगेंगे, क्योंकि नियम बनने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा.

मनरेगा को 2005 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार (संप्रग) द्वारा लागू किया गया था. जी राम जी विधेयक विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच हाल ही में संपन्न शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पारित किया गया था. नए अधिनियम में ग्रामीण श्रमिकों के लिए 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान है. संसदीय समिति की बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि नई प्रणाली और उसकी रूपरेखा कैसी होगी.

सूत्रों के मुताबिक, कुछ विपक्षी सदस्यों ने स्वीकार किया कि मनरेगा में कुछ कमियां थीं, जिसके लिए समिति ने पहले कुछ सिफारिशें की थीं. कुछ विपक्षी सदस्यों ने कहा कि उन्होंने पहले कार्य दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 करने का सुझाव दिया था. सूत्रों के अनुसार, उन्होंने यह भी मांग की कि समिति ने पहले जो भी सिफारिशें की थीं, उन पर जी राम जी अधिनियम के नियम तैयार करते समय विचार किया जाना चाहिए.

भाजपा सांसदों ने कहा कि नए कानून की जरूरत थी क्योंकि मौजूदा कानून गांवों की मौजूदा समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का समाधान नहीं कर सकता. सूत्रों ने कहा कि बैठक के दौरान, कुछ सांसदों ने जी राम जी अधिनियम लाने के कारणों के बारे में बात की और कहा कि मनरेगा को ग्रामीण रोजगार प्रदान करने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के दोहरे उद्देश्यों के साथ लाया गया था.

भाजपा सदस्यों ने यह भी कहा कि कई राज्यों के ऐसे उदाहरण हैं जहां वहां की सरकारें मनरेगा निधि का 50 प्रतिशत भी उपयोग नहीं कर सकीं. समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता सप्तगिरी उलाका ने कहा कि सदस्यों ने मनरेगा के विभिन्न पहलुओं और अगले छह महीनों में कैसे आगे बढ़ना है, इस पर चर्चा की, क्योंकि नया कानून तभी लागू किया जाएगा जब नियम तैयार किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि सदस्य बजट सत्र में एमजीएनईआरजीए पर भी चर्चा करने का इरादा रखते हैं और इन सबके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जानकारी देने का एक सत्र आयोजित किया गया था.

बैठक के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हमने अच्छी चर्चा की. नया कानून पारित हो गया है, लेकिन नए नियम जारी किए जाने हैं. सभी राज्यों को भी इसमें शामिल होना होगा. आज की बैठक इस बात को लेकर भी थी कि जी राम जी अधिनियम को सुचारु रूप से कैसे लागू किया जाए. कुछ सदस्यों ने कुछ सुझाव भी दिए हैं. हम एक रिपोर्ट देंगे, फिर आपके सामने सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा.” बैठक के दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव ने मनरेगा पर प्रस्तुति दी.

प्रस्तुति के अनुसार, दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर, मनरेगा 741 जिलों में लागू किया गया है, जिसमें 12.15 करोड़ सक्रिय श्रमिकों के साथ 2.69 लाख ग्राम पंचायतें शामिल हैं. इनमें महिलाएं 57 प्रतिशत, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के श्रमिक 36 प्रतिशत और 4.81 लाख दिव्यांग व्यक्ति शामिल हैं जिन्हें रोजगार प्रदान किया गया है. सूत्रों ने कहा कि वर्तमान में 26 करोड़ लाभार्थियों वाले 15 करोड़ से अधिक परिवार इस योजना के तहत कवर किए गए हैं.

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