भारतीय सहकारी क्षेत्र के विस्तार के लिए वैश्विक सहकारी संगठनों के साथ साझेदारी की आवश्यकता: मोदी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 06 Mar 2025 07:27 PM
भारतीय सहकारी क्षेत्र के विस्तार के लिए वैश्विक सहकारी संगठनों के साथ साझेदारी की आवश्यकता: मोदी
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को भारतीय सहकारी क्षेत्र का विस्तार करने के लिए वैश्विक सहकारी संगठनों के साथ साझेदारी की आवश्यकता जताते हुए सहकारी संगठनों के माध्यम से जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया. सहकारी क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात कही.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक इस बैठक में क्षेत्र में तकनीकी प्रगति के माध्यम से परिवर्तन लाने वाले ‘सहकार से समृद्धि’ को बढ़ावा देने, सहकारी समितियों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की योजना और सहकारिता मंत्रालय की विभिन्न पहलों पर चर्चा की गई. बैठक में सहकारिता मंत्री अमित शाह, सहकारिता मंत्रालय में सचिव आशीष कुमार भूटानी, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास, प्रधानमंत्री के सलाहकार अमित खरे और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

बयान में कहा गया, ”प्रधानमंत्री ने भारतीय सहकारी क्षेत्र का विस्तार करने के लिए वैश्विक सहकारी संगठनों के साथ साझेदारी की आवश्यकता और सहकारी संगठनों के माध्यम से जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया.” उन्होंने कृषि पद्धतियों में सुधार के लिए निर्यात बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने और सहकारी समितियों के माध्यम से मृदा परीक्षण मॉडल विकसित करने का भी सुझाव दिया.
प्रधानमंत्री ने वित्तीय लेनदेन की सुविधा के लिए यूपीआई को रुपे केसीसी कार्ड के साथ एकीकृत करने के महत्व पर प्रकाश डाला और सहकारी संगठनों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर जोर दिया.

बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने पारर्दिशता सुनिश्चित करने के लिए सहकारी संगठनों की परिसंपत्तियों के दस्तावेजीकरण के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने सहकारी खेती को अधिक टिकाऊ कृषि मॉडल के रूप में बढ़ावा देने का सुझाव दिया और सहकारी क्षेत्र में कृषि और संबंधित गतिविधियों का विस्तार करने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (एग्रीस्टैक) के उपयोग की सिफारिश की, जिससे किसानों को सेवाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान की जा सके.

शिक्षा के संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने स्कूलों, कॉलेजों और आईआईएम में सहकारी पाठ्यक्रम शुरू करने के साथ-साथ भावी पीढि.यों को प्रेरित करने के लिए सफल सहकारी संगठनों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि युवा स्नातकों को योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और सहकारी संगठनों को उनके प्रदर्शन के आधार पर रैंक दिया जाना चाहिए, ताकि प्रतिस्पर्धा और विकास को एक साथ बढ़ावा दिया जा सके. पीएमओ ने कहा कि बैठक के दौरान प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय सहयोग नीति और पिछले साढ़े तीन वर्षों में सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई.

बैठक में प्रधानमंत्री को सहकारी समितियों के विकास और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानकारी दी गई और भारत की अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से कृषि, ग्रामीण विकास और आर्थिक समावेशन में सहकारी क्षेत्र के योगदान पर प्रकाश डाला गया.
पीएमओ ने कहा कि बैठक के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला गया कि वर्तमान में, देश की आबादी का पांचवां हिस्सा सहकारी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसमें 30 से अधिक क्षेत्रों में फैले 8.2 लाख से अधिक सहकारी संस्थान शामिल हैं, जिनकी सदस्यता 30 करोड़ से अधिक व्यक्तियों की है.

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