पाटिल की टिप्पणी हिंदुत्व को कलंकित करने की एक और कोशिश:भाजपा;कांग्रेस ने कहा-बयान अस्वीकार्य

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 21 Oct 2022 08:57 PM
पाटिल की टिप्पणी हिंदुत्व को कलंकित करने की एक और कोशिश:भाजपा;कांग्रेस ने कहा-बयान अस्वीकार्य
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल के इस दावे को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया कि भगवद्गीता में भी जिहाद की बात कही गई थी. सत्तारूढ़ दल ने कहा कि यह विपक्षी दल द्वारा हिंदुत्व को कलंकित करने का एक और प्रयास है.

हालांकि, कांग्रेस ने पाटिल की टिप्पणी से खुद को अलग करते हुए इसे ‘अस्वीकार्य’ बताया. विपक्षी दल ने यह भी कहा कि पाटिल ने अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दिया है और कहा है कि भगवद्गीता भारतीय सभ्यता का मौलिक स्तम्भ है. कांग्रेस पर प्रहार करते हुए भाजपा प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने यह मांग की है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे या इसकी नेता सोनिया गांधी को पाटिल की टिप्पणी पर जवाब देना चाहिए.

उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि महात्मा गांधी ने इस हिंदू ग्रंथ पर अपनी टीका में इसे ‘अनाशक्ति योग’ का स्रोत बताया था, जबकि बाल गंगाधर तिलक ने गीता के अपने अध्ययन से ‘कर्म योग’ का दर्शन दिया. त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस के नेता इसमें अब जिहाद देख रहे हैं. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से ‘‘हिंदू, हिंदुत्व और हिंदुस्तान का अपमान करने’’ की साजिश में शामिल रही है और पाटिल की टिप्पणी इस दिशा में एक और अध्याय है.

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भी कांग्रेस नेताओं ने बोको हराम तथा तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों और हिंदुत्व को एक जैसा बताया था. उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार ंिशदे और पी. चिदंबरम ने ‘‘भगवा आतंकवाद’’ के बारे में बात की थी. शुक्ला ने कहा कि गीता मानवता का दर्शन है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अपनी पार्टी का विचार प्रकट करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया. उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘मेरे वरिष्ठ सहयोगी शिवराज पाटिल ने भगवद्गीता पर कथित तौर पर कुछ टिप्पणी की, जो अस्वीकार्य है. बाद में उन्होंने स्पष्टीकरण दिया. कांग्रेस का रुख स्पष्ट है कि भगवद्गीता भारतीय सभ्यता का मौलिक स्तम्भ है.’’ उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक ‘डिस्कवरी आॅफ इंडिया’ का एक अंश भी साझा किया, जिसमें कहा गया है कि भगवद्गीता का संदेश सार्वभौमिक है और सभी के लिए है.

रमेश ने कहा, ‘‘मैंने किशोरावस्था में ही भगवद्गीता का अध्ययन किया और सांस्कृतिक एवं दार्शनिक मूलग्रंथ के रूप में इसके प्रति मेरा बहुत आकर्षण रहा है. इसका युगों से भारतीय सभ्यता पर व्यापक असर रहा है. मैंने अपनी किताब ‘द लाइट आॅफ एशिया’ में भी इसके बारे में लिखा है.’’ उल्लेखनीय है कि पाटिल ने बृहस्पतिवार को दावा किया था कि जिहाद की अवधारणा न सिर्फ इस्लाम में है, बल्कि भगवद्गीता और ईसाई धर्म में भी है.

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