प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में राज्यों से 3टी, कृषि आधुनिकरण पर जोर देने को कहा

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के आधुनिकीकरण की पुरजोर वकालत करते हुए रविवार को कहा कि यह भारत को कृषि क्षेत्र में आत्म-निर्भर बनाने के अलावा वैश्विक अगुआ बनाने में भी मददगार होगा. प्रधानमंत्री ने नीति आयोग के शीर्ष निकाय संचालन परिषद की यहां आयोजित बैठक में आयात घटाने और निर्यात बढ़ाने के लिए राज्यों से ‘3टी’ (व्यापार, पर्यटन और प्रौद्योगिकी) को प्रोत्साहन देने का आग्रह भी किया.

संचालन परिषद की सातवीं बैठक खत्म होने के बाद जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें लोगों को जहां भी संभव हो, स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. ‘वोकल फॉर लोकल’ किसी एक राजनीतिक दल का एजेंडा न होकर एक साझा लक्ष्य है.” बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक अगुआ बनने के लिए कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण के आधुनिकीकरण पर ध्यान देने की जरूरत है.” उन्होंने कहा कि भारत को खाद्य तेलों के उत्पादन में स्वावलंबी बनने पर ध्यान देना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि जीवनयापन को सुगम बनाने, सेवा की पारदर्शी आपूर्ति और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने पर तीव्र गति से जारी शहरीकरण भारत के लिए कमजोरी के बजाय एक ताकत बन सकता है. प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी से निपटने में सभी राज्यों के सम्मिलित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह सहकारी संघवाद की धारणा के अनुरूप है.

उन्होंने कहा, “कोविड से मुकाबला करने में हरेक राज्य ने अपनी ताकत के हिसाब से अहम भूमिका निभाई और इस संघर्ष में अपना योगदान दिया. इससे भारत विकासशील देशों के लिए एक मिसाल और एक वैश्विक नेता के तौर पर उभरकर सामने आया.” उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में कोविड काल में पहली बार सभी राज्यों के मुख्य सचिव एक स्थान पर एकत्र हुए थे और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर तीन दिनों तक चर्चा की थी. उन्होंने कहा, “इस सामूहिक प्रक्रिया ने ही इस बैठक के एजेंडा का आधार तैयार किया था.” मोदी ने कहा कि नीति आयोग की संचालन परिषद की यह बैठक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की पहचान के लिए केंद्र एवं राज्यों के बीच चले लंबे विचार-विमर्श का परिणाम है. उन्होंने कहा कि नीति आयोग राज्यों की ंिचताओं एवं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आगे की राह तैयार करेगा.

प्रधानमंत्री ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए मिलजुलकर प्रयास करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि अभी इस दिशा में व्यापक संभावना मौजूद है. उन्होंने कहा, “हमारी आर्थिक स्थिति को मजबूती देने और पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए यह बेहद अहम है.” उन्होंने कहा कि इस बैठक में उठे मुद्दे अगले 25 साल के लिए देश की प्राथमिकताओं को परिभाषित करेंगे. उन्होंने कहा, “आज हमने जो बीज बोया, वह वर्ष 2047 में भारत को मिलने वाले फलों को तय करेगा.” इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने विकसित एवं विकासशील देशों के समूह जी-20 का अगले साल भारत के अध्यक्ष बनने के मुद्दे पर भी अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने राज्यों से जी-20 के लिए अलग से टीम बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इस पहल से अधिकतम लाभ लेने में यह कारगर हो सकता है.

संचालन परिषद की इस बैठक में 23 मुख्यमंत्री, तीन उप राज्यपाल और दो प्रशासकों के अलावा कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल हुए. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने इसका बहिष्कार किया है जबकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोविड संक्रमण के कारण इसमें शामिल नहीं हो पाये. यह कोविड-19 महामारी आने के बाद से संचालन परिषद की पहली परंपरागत बैठक रही. वर्ष 2021 में वीडियो कॉन्फ्रेंंिसग के जरिये यह बैठक आयोजित की गई थी.

संचालन परिषद की बैठक में चार अहम ंिबदुओं पर चर्चा की गई. फसल विविधीकरण और दालों, तिलहन एवं अन्य कृषि ंिजसो में स्वावलंबन हासिल करना, स्कूली शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू करना, उच्च शिक्षा में एनईपी का क्रियान्वयन और शहरी शासन के मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे. बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता भारत के लिए एक बड़ा अवसर और व्यापक जिम्मेदारी लेकर आ रही है.

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति से जुड़े ंिबदुओं पर प्रकाश डालते हुए शिक्षण और पठन-पाठन की स्थिति बेहतर करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया. नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि महामारी के बाद भारत को नए सिरे से सशक्त करने के लिए केंद्र एवं राज्यों के साझा प्रयासों की जरूरत है.

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