प्रधानमंत्री मोदी ने पुलिस के लिए ‘एक राष्ट्र, एक वर्दी’ का विचार रखा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 28 Oct 2022 10:41 PM
प्रधानमंत्री मोदी ने पुलिस के लिए ‘एक राष्ट्र, एक वर्दी’ का विचार रखा
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सूरजकुंड. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को पुलिस के लिए ‘‘एक राष्ट्र, एक वर्दी’’ का विचार प्रस्तुत किया और कहा कि यह उनकी तरफ से एक विचार मात्र है और वह इसे राज्यों पर थोपने का प्रयास नहीं कर रहे हैं. राज्यों के गृह मंत्रियों के यहां आयोजित दो दिवसीय ‘‘ंिचतन शिविर’’ को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उन ताकतों से आगाह किया जो युवाओं को चरमपंथ की ओर धकेलने और आने वाली पीढ़ियों के दिमाग को विकृत करने के लिए अपने बौद्धिक दायरे को बढ़ा रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘देश के युवाओं को गुमराह होने से रोकने के लिए नक्सलवाद के हर स्वरूप को उखाड़ फेंकना होगा, वह चाहे बंदूक का हो या फिर कलम का.’’ मोदी ने कहा कि देश की एकता और अखंडता की खातिर और सरदार पटेल की प्रेरणा से ‘‘हम ऐसी किसी ताकत को अपने देश में पनपने नहीं दे सकते.’’ उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतों को अंतरराष्ट्रीय मदद भी मिलती है.

अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए राज्यों के बीच निकट सहयोग की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सहकारी संघवाद ना सिर्फ संविधान की भावना है बल्कि यह केंद्र और राज्यों की जिम्मेदारी भी है. उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस के लिए ‘एक राष्ट्र, एक वर्दी’ सिर्फ एक विचार है. मैं यह आप सभी पर थोपने की कोशिश नहीं रहा. इसके बारे में आप सोचिए. यह 5, 50 या सौ सालों में हो सकता है. लेकिन हमें इसके बारे में विचार करना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि इससे न केवल गुणवत्तापूर्ण उत्पादों का विनिर्माण सुनिश्चित होगा क्योंकि उनका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे कानून प्रवर्तन र्किमयों को एक आम पहचान भी मिलेगी और लोग उन्हें देश में कहीं भी पहचान सकेंगे.

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि देश भर में पुलिस की पहचान एक जैसी हो सकती है. उन्होंने सभी राज्य सरकारों से पुराने कानूनों की समीक्षा करने और आज के संदर्भ में उनमें सुधार करने का आग्रह किया. उन्होंने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए सभी एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई की भी गुजारिश की. मोदी ने कहा कि पुलिस के बारे में अच्छी धारणा बनाए रखना ‘‘बहुत महत्वपूर्ण’’ है और इस राह में जो खामियां विद्यमान हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि यद्यपि संविधान के हिसाब से कानून-व्यवस्था राज्यों का विषय है लेकिन यह देश की एकता और अखंडता से भी उतना ही जुड़ा हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘‘हर एक राज्य एक दूसरे से सीखे, एक दूसरे से प्रेरणा ले और आंतरिक सुरक्षा के लिए मिलकर काम करे. आंतरिक सुरक्षा के लिए राज्यों का साथ मिलकर काम करना संवैधानिक अनिवार्यता है और साथ ही देश के प्रति जिम्मेदारी भी है.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी एजेंसी को, वह चाहे केंद्र की हों या राज्यों की, सभी को एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए ताकि दक्षता बढ़े, बेहतर परिणाम सामने आए और आम जन को सुरक्षा मिले.

उन्होंने कहा कि कानून एवं व्यवस्था का सीधा संबंध विकास से है, अत: शांति बनाए रखना हर किसी की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, ‘‘जब देश का सामर्थ्य बढ़ेगा तो देश के हर नागरिक व हर परिवार का सामर्थ्य बढ़ेगा. यही तो सुशासन है, जिसका लाभ देश के हर राज्य को समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है.’’ मोदी ने कहा कि कानून-व्यवस्था के पूरे तंत्र के लिए भरोसेमंद होना बहुत महत्वपूर्ण है और इसके लिए आम जन से पुलिस का संबंध और संवाद बेहतर होना चाहिए ताकि उनके बारे में अच्छी धारणा बने.
मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत सरकार के स्तर पर कानून व्यवस्था से जुड़े सुधार हुए हैं, जिसने पूरे देश में शांति का वातावरण बनाने का काम किया है.

उन्होंने कहा, ‘‘हमें प्रौद्योगिकी के लिए एक साझा मंच के बारे में सोचने की जरूरत है जिसे सभी के द्वारा साझा किया जा सके. राज्यों की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को भी एक दूसरे से साझा किया जा सकता है. साइबर अपराध हो या फिर ड्रोन प्रौद्योगिकी का हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी में उपयोग, इनके लिए हमें नयी प्रौद्योगिकी पर काम करते रहना होगा. स्मार्ट प्रौद्योगिकी से कानून-व्यवस्था को स्मार्ट बना पाना संभव होगा.’’ फर्जी खबरों के प्रवाह का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि ऐसी खबरों की सच्चाई सामने लाया जाना आवश्यक है और इसमें प्रौद्योगिकी की बड़ी भूमिका है.

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी खबरों को जांचने की प्रक्रिया या तंत्र के बारे में लोगों को जागरूक किया जाना जरूरी है ताकि किसी और से साझा करने से पहले वे उन्हें जांच सकें.’’ इस शिविर में राज्यों के गृह मंत्रियों के अलावा वहां के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय सुरक्षा बलों के महानिदेशक भी शामिल हुए.

यह दो दिवसीय ंिचतन शिविर प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता दिवस भाषण में घोषित ‘पंच प्राण’ के अनुसार आंतरिक सुरक्षा से संबंधित मामलों पर नीति निर्माण को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान करने का एक प्रयास है. इसका उद्देश्य सहकारी संघवाद की भावना से केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न हितधारकों के बीच योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक तालमेल बिठाना है. शिविर में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण, साइबर अपराध प्रबंधन, आपराधिक न्याय प्रणाली में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के बढ़ते उपयोग, भूमि सीमा प्रबंधन, तटीय सुरक्षा, महिला सुरक्षा, मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है.

फर्जी खबरें राष्ट्रीय चिंता का विषय भी बन सकती हैं: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि कोई एक फर्जी खबर भी बढ़कर राष्ट्रीय चिंता का विषय बनने की क्षमता रखती है, लिहाजा उन पर लगाम कसने के लिए देश को उन्नत तकनीक पर जोर देना होगा. प्रधानमंत्री ने यहां आयोजित राज्यों के गृह मंत्रियों के दो दिवसीय ‘‘चिंतन शिविर’’ को संबोधित करते हुए ऐसी किसी भी जानकारी को दूसरों के पास आगे भेजने से पहले विश्लेषण और सत्यापित करने के बारे में लोगों को शिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया.

उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी जानकारी को आगे भेजने से पहले 10 बार सोचना चाहिए और इस पर विश्वास करने से पहले इसे सत्यापित करना अत्यंत आवश्यक है. हर मंच पर ऐसी सूचनाओं को सत्यापित करने के तरीके हैं. यदि आप विभिन्न स्रोतों के माध्यम से इसकी जांच परख करेंगे तो आपको इसका एक नया संस्करण मिलेगा.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया को सिर्फ जानकारी के स्रोत के रूप ही सीमित नहीं किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि एक फर्जी खबर भी बढ़कर राष्ट्रीय चिंता का विषय बनने की क्षमता रखती है. उन्होंने कहा कि नौकरियों में आरक्षण के बारे में पूर्व में चली फर्जी खबरों के कारण भारत को नुकसान भी हुआ है. उन्होंने कहा, ‘‘इनके प्रवाह को रोकने के लिए हमें उन्नत प्रौद्योगिकी पर जोर देना होगा.’’

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