नयी दिल्ली. गुजरात में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस की आलोचना किये जाने को लेकर विपक्षी दल के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बृहस्पतिवार को उन पर पलटवार करते हुए कहा कि उसे (कांग्रेस को) कोसने के बजाय प्रधानमंत्री को राज्य में भाजपा के ‘‘कुशासन’’ के बारे में बोलना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी समुदाय की महिला द्रौपदी मुर्मू का समर्थन नहीं करने को लेकर बुधवार को कांग्रेस को घेरने की कोशिश की थी. उन्होंने विपक्षी दल पर गुजरात में उसके शासन के दौरान वोट बैंक की राजनीति, भाई-भतीजावाद, संप्रदायवाद और ‘‘असामाजिक तत्वों’’ का समर्थन करने का आरोप लगाया था.
खरगे ने प्रधानमंत्री पर पलटवार करते हुए एक ट्वीट में कहा,‘‘नरेंद्र मोदी जी, कांग्रेस को कोसने के बजाय भाजपा के कुशासन पर बोलिये!’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘गुजरात के बच्चों का भविष्य क्यों बिगाड़ा? क्यों कुपोषित, कम वजन वाले बच्चों के मामले में गुजरात 30 राज्यों में 29वें स्थान पर है? क्यों शिशु मृत्यु दर में राज्य 19वें स्थान पर है?’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘27 वर्षों का हिसाब दीजिए, गुजरात जवाब मांगता है.’’ राज्य की 182 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं, जिसके तहत एक और पांच दिसंबर को मतदान होगा. मतगणना आठ दिसंबर को होगी. कुल 1,621 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.
प्रधानमंत्री के सभी फैसलों में संविधान व परिपाटी की धज्जियां उड़ाई जाती हैं : कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके द्वारा की गई लगभग सभी नियुक्तियां और उनके फैसलों में संविधान व परिपाटी की धज्जियां उड़ाई जाती हैं. इसके साथ ही पार्टी ने दावा किया कि उनके फैसले विचार-विमर्श के बिना होते हैं. पार्टी ने यह टिप्पणी ऐसे दिन की है जब उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयुक्त (ईसी) के तौर पर अरुण गोयल की नियुक्ति में ‘‘जल्दबाजी’’ को लेकर सवाल उठाया.
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने ट्वीट कर कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि नए निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति में ‘‘बहुत तेजी’’ दिखायी गयी. इसमें कोई नयी बात नहीं है. श्री मोदी के लगभग सभी फैसलों और उनके द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों में परिपाटी और संविधान का उल्लंघन होता है.” उच्चतम न्यायालय द्वारा सवाल किए जाने के बीच केंद्र ने न्यायालय की टिप्पणियों का विरोध किया और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा कि गोयल की नियुक्ति से जुड़े पूरे मामले पर विस्तारपूर्वक गौर किया जाना चाहिए.
न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने निर्वाचन आयुक्त के तौर पर गोयल की नियुक्ति से जुड़ी मूल फाइल पर गौर किया और कहा, ‘‘यह किस तरह का मूल्यांकन है? हम अरुण गोयल की योग्यता पर नहीं बल्कि प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं.’’