डाक मतपत्र का मामला : उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिका हुई खारिज

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें बिस्तर पर पड़ी 78 वर्षीय महिला की याचिका खारिज कर दी गई थी. बुजुर्ग महिला ने लोकसभा चुनाव में वोट डालने के लिए उच्च न्यायालय से उन्हें डाक मतपत्र जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.

महिला ने शुरू में उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की थी, जिसमें बिलासपुर निर्वाचन क्षेत्र में अपना वोट डालने के लिए उनकी उम्र और बीमारियों को ध्यान में रखते हुए डाक मतपत्र जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. इस सीट पर सात मई को मतदान हुआ था. उच्च न्यायालय ने 29 अप्रैल को उन्हें संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आवेदन करने की अनुमति दी और प्राधिकारी को उनके दावे पर कानून के अनुसार विचार करने का निर्देश दिया.

सोमवार को महिला के वकील ने न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की अवकाश पीठ को बताया कि उच्च न्यायालय के 29 अप्रैल के आदेश के अनुसार, उन्होंने डाक मतपत्र जारी करने के लिए निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आवेदन किया था.
महिला की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने एक मई को उनका आवेदन खारिज कर दिया.

उन्होंने कहा, ”निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि आपकी (याचिकाकर्ता) शारीरिक विकलांगता 40 प्रतिशत से अधिक नहीं है इसलिए मैं आपको (डाक मतपत्र के माध्यम से) वोट डालने की अनुमति नहीं दूंगा. यह आदेश का सार है.” अग्रवाल ने कहा कि महिला ने फिर से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसने छह मई को उनके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मतदान की तारीख सात मई है और डाक मतपत्र जारी करने और उसके संग्रह के संबंध में निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देश 24 घंटे में पूरा नहीं किया जा सकता है. महिला ने छह मई के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यह याचिका निरर्थक हो गयी है क्योंकि मतदान की तारीख सात मई थी.

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