
नयी दिल्ली. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या को उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से हस्तक्षेप की रविवार को अपील की. प्रियंका ने कहा कि केरल के वायनाड और फिर बिहार के बछवाड़ा से दिल्ली लौटकर सांस लेना वास्तव में चौंकाने वाला अनुभव है.
प्रियंका गांधी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “अब समय आ गया है कि हम सभी अपने राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर एकजुट हों और इसके खिलाफ कुछ ठोस कदम उठाएं. केंद्र और राज्य सरकारों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. हम सब किसी भी ऐसे कदम का समर्थन और सहयोग करेंगे जो इस भयावह स्थिति से निपटने में मददगार साबित हो.” प्रियंका गांधी ने कहा कि दिल्लीवासी हर साल इस जहरीली हवा को झेलने पर मजबूर होते हैं और उनके पास कोई विकल्प नहीं होता.
उन्होंने कहा, “सांस से जुड़ी बीमारियों से ग्रस्त लोगों, स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों, सभी को तत्काल राहत की आवश्यकता है. हमें इस प्रदूषण से निपटने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, पर्यावरण मंत्री यादव तथा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, रविवार को हवा की धीमी गति के कारण प्रदूषक तत्व कम तितर-बितर हुए और दिल्ली की वायु गुणवत्ता “बहुत खराब” श्रेणी में बनी रही.
राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शनिवार के 303 से बढ.कर रविवार सुबह 386 दर्ज किया गया.
दिल्ली के वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (एक्यूईडब्ल्यूएस) ने बताया कि उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली हवाओं की गति शाम और रात के दौरान आठ किलोमीटर प्रति घंटा से कम हो गई, जिससे प्रदूषकों का तितर-बितर होना रुक गया. सीपीसीबी के समीर ऐप के अनुसार 17 निगरानी केंद्रों में ‘गंभीर’ श्रेणी की वायु गुणवत्ता दर्ज की गई, जिनमें से वजीरपुर का एक्यूआई सबसे अधिक 439 रहा. इसके अलावा, 20 अन्य केंद्रों ने ‘बहुत खराब’ श्रेणी (300 से ऊपर) की वायु गुणवत्ता दर्ज की.
कांग्रेस ने ‘क्लाउड सीडिंग’ को लेकर दिल्ली सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस ने वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए ‘क्लाउड सीडिंग’ (कृत्रिम बारिश के) प्रयोग को लेकर रविवार को दिल्ली सरकार पर कटाक्ष किया और कहा कि सीमित क्षेत्र में एक-दो दिन के लिए हुए थोड़े सुधार को “भद्दा मजाक” कहना उचित होगा. कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि दिल्ली सरकार ने वायु गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से ‘क्लाउड सीडिंग’ प्रयोग पर 34 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
उन्होंने बताया कि पांच दिसंबर 2024 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तीन विशिष्ट एजेंसियां वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सर्दी में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कृत्रिम बारिश के प्रयोग की स्पष्ट रूप से सलाह नहीं दी.
रमेश ने कहा कि इसके बाद 31 अक्टूबर 2025 को आईआईटी, दिल्ली के ‘सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज’ ने इस विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसमें स्पष्ट किया गया कि सर्दी में कृत्रिम बारिश से दिल्ली की बेहद खराब वायु गुणवत्ता में किसी भी महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती.
उन्होंने कहा, “सर्दी में ‘क्लाउड सीडिंग’ निश्चित रूप से नाटकीय लगती है और यह दिखाती है कि सरकार कुछ कर रही है, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय इसकी प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाता है. ऐसे में क्या केवल सुर्खियां बटोरने के लिए इस पर इतना भरोसा करना बुद्धिमानी है?” रमेश ने कहा, “सीमित क्षेत्र में एक-दो दिन के लिए ‘थोड़ा सुधार’ होना, जैसा अब दावा किया जा रहा है, वास्तव में एक भद्दा मजाक है.” उन्होंने राज्यसभा में दिए गए पर्यावरण मंत्री के उत्तर और आईआईटी दिल्ली की रिपोर्ट भी ‘एक्स’ पर साझा की.



