राजनाथ ने शेष एस-400 मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति में तेजी लाने के लिए रूस पर दबाव बनाया

नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को मास्को में अपने रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव के साथ व्यापक वार्ता के दौरान, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ‘एस-400 ट्रायम्फ’ की दो शेष इकाइयों की आपूर्ति में तेजी लाने का रूस पर दबाव बनाया. वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को मास्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने कहा कि भारत-रूस साझेदारी में अपार संभावनाएं हैं और संयुक्त प्रयास “उल्लेखनीय परिणामों” का मार्ग प्रशस्त करेंगे.

रूस के रक्षामंत्री के साथ बैठक में सिंह ने विभिन्न सैन्य ‘हार्डवेयर’ (टैंक, विमान, मिसाइल आदि) के संयुक्त उत्पादन में रूसी रक्षा उद्योगों के लिए भारत में नये अवसरों का उल्लेख किया और कहा कि भारत-रूस संबंध बहुत मजबूत हैं तथा इसने एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की जिम्मेदारियों को पूरा किया है.

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सिंह ने देश के घरेलू रक्षा उद्योग की क्षमताओं को सभी क्षेत्रों और औद्योगिक सहयोग में विस्तारित करने के लिए भारत के दृढ. संकल्प को व्यक्त किया. सैन्य और सैन्य तकनीकी सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के ढांचे के तहत बैठक की सह-अध्यक्षता सिंह और बेलौसोव ने की. सिंह, रूस की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सिंह ने सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल प्रणाली की दो शेष इकाइयों की शीघ्र आपूर्ति किये जाने की जोरदार हिमायत की.

रूस ने मिसाइल प्रणालियों की पहली तीन रेजिमेंट की आपूर्ति पूरी कर ली है. यूक्रेन संघर्ष के मद्देनजर शेष इकाइयों की आपूर्ति में देरी हुई है. सिंह ने भारत में मिसाइल प्रणालियों के रखरखाव और संबंधित सेवाओं को पूरा करने का भी आह्वान किया. वहीं, रूसी रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास पर आधारित संबंधों को और प्रगाढ. करने पर जोर दिया. उन्होंने आईएनएस तुशील के जलावतरण पर भी सिंह को बधाई दी.

रूस निर्मित युद्धपोत को सोमवार को सिंह की मौजूदगी में तटीय शहर कालिनिनग्राद में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया.
मंत्रालय ने कहा, ”उन्होंने कहा कि 2021-31 के लिए सैन्य तकनीकी सहयोग समझौते के संचालन से ‘मेक इन इंडिया’ को आवश्यक प्रोत्साहन मिलेगा.” सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए सोवियत संघ के सैनिकों की याद में मास्को में स्थित ‘अज्ञात सैनिक की समाधि’ पर पुष्पांजलि भी अर्पित की.

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