गहलोत समर्थक नेताओं के जवाब मिले, जल्द हो सकती है अनुशासनात्मक समिति की बैठक

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 12 Oct 2022 08:48 PM
गहलोत समर्थक नेताओं के जवाब मिले, जल्द हो सकती है अनुशासनात्मक समिति की बैठक
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नयी दिल्ली. कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति को राजस्थान के राजनीतिक संकट से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक उन तीनों नेताओं के जवाब मिल गए हैं जिन्हें गत 27 सितंबर को नोटिस जारी किए गए थे. सूत्रों का कहना है कि जल्द ही अनुशासनात्मक समिति की बैठक बुलाई जा सकती है जिसमें आगे के कदम पर चर्चा होगी.

राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल की बैठक के समानांतर दूसरी बैठक बुलाने के मामले में गहलोत के वफादारों–संसदीय मामलों के मंत्री शांति धारीवाल, मुख्य सचेतक महेश जोशी और राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने अपने जवाब अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति को दे दिए हैं.

कांग्रेस के एक विश्वस्त सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘तीनों नेताओं के जवाब मिल गए हैं. जल्द ही समिति की ऑफलाइन या ऑनलाइन बैठक होगी जिसमें आगे की कार्रवाई के बारे में विचार किया जाएगा.’’ कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति द्वारा धारीवाल, जोशी और राठौड़ को 27 सितंबर की रात को उनकी “गंभीर अनुशासनहीनता” के लिए नोटिस जारी किए गए थे और उन्हें 10 दिनों के भीतर यह बताने को कहा गया था कि उनके खिलाफ क्यों ना कार्रवाई की जाये? गौरतलब है कि ये तीनों नेता बुधवार को नयी दिल्ली में थे, हालांकि इनके कांग्रेस के वरिष्ठ नेता से मुलाकात की सूचना नहीं है.

उल्लेखनीय है कि गहलोत के तीनों वफादार नेताओं को 25 सितंबर को जयपुर में धारीवाल के आवास पर कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के विधायकों की समानांतर बैठक करने के बाद नोटिस जारी किए गए थे. यह नोटिस, पर्यवेक्षकों अजय माकन और मल्लिकार्जुन खरगे की रिपोर्ट के आधार पर जारी किए गए थे.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव में खडे होने की घोषणा के बाद उनका उत्तराधिकारी चुनने के लिये कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से एक प्रस्ताव को पारित करने के लिए कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई गई थी.

गहलोत के वफादार विधायक चाहते थे कि अगर गहलोत को बदलना पड़ा तो जिन 102 विधायकों ने जुलाई 2020 में संकट के दौरान अशोक गहलोत सरकार का समर्थन किया था उनमें से किसी भी विधायक को मुख्यमंत्री चुना जाये. उल्लेखनीय है कि जुलाई 2020 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपने 18 समर्थक विधायकों के साथ अशोक गहलोत के नेतृत्व को लेकर बगावत की थी. गहलोत ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से सीएलपी की बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित नहीं हो पाने के लिए माफी मांगी थी.

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