डेटा की बढ़ती लागत चिंता का विषय, मंत्रालय आकलन के लिए ट्राई से करेगा संपर्क: चंद्रशेखर

नयी दिल्ली. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बुधवार को कहा कि डेटा और उपकरणों की बढ़ती कीमतें डिजिटलीकरण के तेजी से प्रसार के लिए चिंता का विषय हैं.

केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी देश की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के हाल ही में न्यूनतम मासिक रिचार्ज योजना को लगभग 57 प्रतिशत बढ़ाने की पृष्ठभूमि में आई है. चंद्रशेखर ने ‘इंडिया स्टैक डेवलपर’ सम्मेलन के मौके पर कहा, ‘‘डेटा या उपकरणों की लागत में वृद्धि चिंता का विषय है, क्योंकि इससे डिजिटलीकरण में बाधा पहुंचती है. हमारा 2025 तक 120 करोड़ भारतीयों को आॅनलाइन लाने का लक्ष्य है.

हमारे पास अभी 83 करोड़ भारतीय आॅनलाइन हैं. हम निश्चित रूप से डेटा खपत की बढ़ती लागत या उपकरणों की लागत में किसी भी वृद्धि के मुद्दों को देखते हैं.’’ मंत्री ने कहा कि उन्हें एयरटेल द्वारा मोबाइल सेवाओं की दरों में बढ़ोतरी के बारे में जानकारी नहीं थी. मंत्रालय ने बढ़ोतरी के अल्पकालिक या दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में पता लगाने के लिए दूरसंचार नियामक ट्राई से संपर्क किया है.

उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से दुनियाभर में कीमतों पर असर पड़ा है और डेटा मूल्य के प्रभाव की जांच करने की जरूरत है.
भारती एयरटेल ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश पश्चिम समेत आठ र्सिकल में 28 दिनों की मोबाइल फोन सेवा योजना के लिए अपने न्यूनतम रिचार्ज की कीमत लगभग 57 प्रतिशत बढ़ाकर 155 रुपये कर दी है. कंपनी ने अपने 99 रुपये के न्यूनतम रिचार्ज प्लान को बंद कर दिया है, जिसके तहत उसने 200 मेगाबाइट डेटा और 2.5 पैसे प्रति सेकंड की दर से कॉल की पेशकश की थी.

कंपनी के नए 155 रुपये वाले प्लान में असीमित कॉंिलग के साथ एक जीबी डेटा और 300 एसएमएस की पेशकश की जा रही है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव अलकेश कुमार शर्मा ने कहा, ‘‘हमें देश के हर हिस्से में डिजिटल सुविधा सुनिश्चित करनी चाहिए. हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डेटा की लागत सस्ती रहे और उपकरणों की लागत को कम करके डिजिटल को पाटने के लिए एक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाए.’’

मंत्री ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटलीकरण में तेजी लाने के लिए मार्च तक यूपीआई और आधार जैसे भारत-विकसित प्रौद्योगिकी मंचों को अपनाने के लिए पांच से सात देशों के हस्ताक्षर करने की उम्मीद है. चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि फरवरी-मार्च तक एशिया, अफ्रीका, यूरोप और दक्षिण अमेरिका के पांच-सात देश इस मंच अपनाने के लिए हस्ताक्षर करेंगे.”

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