रुबैय्या सईद अपहरण मामला: शांगलू का नाम ‘अनजाने में’ 2019 के गिरफ्तारी वारंट सूची में दर्ज हुआ

जम्मू. जम्मू-कश्मीर की एक विशेष अदालत ने कहा कि 2019 में जारी गिरफ्तारी वारंट में व्यवसायी शफत अहमद शांगलू का नाम ‘अनजाने में या गलती से’ सूचीबद्ध हो गया था जो रुबैय्या सईद अपहरण मामले में उनकी गिरफ्तारी का आधार बना. अदालत ने मंगलवार को शांगलू को रिहा करने के अपने आदेश में पाया कि उनका नाम 10 अगस्त 2019 को जारी वारंट में ‘अनजाने में या गलती से’ सूचीबद्ध हो गया था.

विशेष अदालत द्वारा 17 सितम्बर 1991 के आदेश के अनुपालन में 10 अगस्त 2019 को वारंट जारी किए गए. साल 1991 के आदेश में पांच लोगों हलीमा, जावेद इकबाल मीर, मोहम्मद याकूब पंडित, जावेद ए. मीर और मोहम्मद टपलू -के खिलाफ वारंट जारी करने का निर्देश दिया गया था. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस सनसनीखेज मामले में कथित साजिशकर्ता के रूप में शांगलू की भूमिका की तहकीकात की लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें रिहा कर दिया गया.

सबूतों के अभाव में रिहा किए गए लोगों की सूची में उनका नाम आरोपपत्र के कॉलम दो में 10वें नंबर पर दर्ज था. सीबीआई ने 18 सितंबर 1990 को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फोर्स (जेकेएलएफ) प्रमुख यासीन मलिक और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था. अधिकारियों ने बताया कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग छह दिसंबर से शुरू होने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए नए सिरे से गतिविधि शुरू हो गई है.

तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबैय्या सईद का आठ दिसंबर 1989 को श्रीनगर के लाल देद अस्पताल के पास से अपहरण कर लिया गया था. उन्हें पांच दिन बाद तब रिहा किया गया जब तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार ने बदले में प्रतिबंधित जेकेएलएफ के पांच खूंखार आतंकवादियों को रिहा किया था. सिंह की सरकार को भाजपा का समर्थन प्राप्त था.

बहरहाल शांगलू को रिहा करते हुए अदालत ने कहा कि उनका नाम उन आरोपियों की सूची में नहीं है, जिनके खिलाफ अदालत के 1991 के आदेश के अनुसार वारंट जारी किया जाना था. विशेष न्यायाधीश मदन लाल ने न केवल शांगलू को रिहा कर दिया, बल्कि 2019 में सात अन्य लोगों के खिलाफ जारी वारंट भी रद्द कर दिए, जिनका नाम 1991 के आदेश में नहीं था.

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