
कीव/दोनेत्स्क. रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे पर अपने-अपने देशों के नागरिक क्षेत्रों में घातक ड्रोन हमले किये जाने के आरोप लगाए. वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान कूटनीतिक गतिविधियों के लिहाज से ‘काफी व्यस्त सप्ताह’ रहने की आशा जताई, जहां सुरक्षा परिषद के तीन साल से अधिक समय से जारी युद्ध पर चर्चा करने की उम्मीद है.
जेलेंस्की ने अमेरिका के नेतृत्व में किए जा रहे शांति प्रयास को गति देने के उद्देश्य से संघर्षविराम और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक शिखर बैठक करने की पेशकश की है.
वहीं, रूस ने कुछ प्रस्तावों पर आपत्ति जताई है, जिससे फिलहाल इस युद्ध का अंत नजर नहीं आ रहा है. जेलेंस्की संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेने वाले थे, जहां उनका उद्देश्य रूस के हमले को रोकने के प्रयासों के लिए समर्थन जुटाना था. उन्होंने रविवार देर रात ‘टेलीग्राम’ पर कहा, ”बैठक के कार्यक्रम में पहले से ही दुनिया के सभी हिस्सों के विभिन्न देशों के नेताओं के साथ कई बैठकें शामिल हैं.” जेलेंस्की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मिल सकते हैं.
जेलेंस्की ने बताया कि पिछले हफ्ते रूस ने यूक्रेन पर 1,500 से ज़्यादा ड्रोन, 1,280 ग्लाइड बम और विभिन्न प्रकार की 50 मिसाइलें दागीं. उन्होंने बताया कि इन हथियारों में दर्जनों देशों के 1,32,000 से ज़्यादा घटक पाए गए. यूक्रेन ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए अभियान चलाया है. इस बीच, कम से कम सात रूसी विमानों ने रात भर दक्षिणी यूक्रेनी शहर ज.ापोरिज्जिया पर बमबारी की, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए. क्षेत्रीय प्रशासन के प्रमुख इवान फेदोरोव ने यह जानकारी दी. उधर, रूस ने भी इसी तरह के दावे किय. यूक्रेन के रूस के कब्जे वाले क्रीमिया प्रायद्वीप के मास्को द्वारा नियुक्त प्रमुख सर्गेई अक्स्योनोव ने बताया कि रविवार देर रात लोकप्रिय पर्यटन स्थल फोरोस में यूक्रेनी ड्रोन हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई और 16 घायल हो गए.
सैनिकों को बचाने के लिए खतरनाक मिशनों में रिमोट से चलने वाले वाहनों का इस्तेमाल कर रहा यूक्रेन
रूसी ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेनी सैनिक तेजी से काम करने और रिमोट से चलने वाले बख्तरबंद वाहनों का रुख कर रहे हैं, जो अनेक कार्य कर सकते हैं और जानलेवा मिशनों के दौरान सैनिकों की जान बचा सकते हैं. यूक्रेनी सेना खास तौर पर रोबोट का इस्तेमाल करने के लिए उत्सुक है, क्योंकि साढ़े तीन साल से भी अधिक समय से जारी युद्ध में वह सैनिकों की कमी का सामना कर रही है. ये वाहन छोटे टैंकों जैसे दिखते हैं और रसद पहुंचा सकते हैं, बारूदी सुरंग हटा सकते हैं और घायलों या मृतकों को निकाल सकते हैं. इन रोबोट को “रोबोट ऑन व्हील्स” कहा जाता है.
बीसवीं ल्यूब्रट ब्रिगेड की पलटन के कमांडर ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कहा, “यह (रोबोट) पूरी तरह से सैनिकों की जगह नहीं ले सकता.” रोबोटिक वाहन ज्यादातर यूक्रेनी कंपनियां बनाती हैं और उनकी लागत उनके आकार व क्षमताओं के आधार पर लगभग 1,000 डॉलर से लेकर 64,000 डॉलर तक होती है. हालांकि, ये वाहन 1,000 किलोमीटर की अग्रिम पंक्ति में यूक्रेनी सैनिकों के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं, लेकिन युद्ध के लिए ऐसे वाहन नए नहीं हैं.
द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मन सेना ने एक रिमोट से चलने वाले लघु टैंक का इस्तेमाल किया था, जिसे गोलियथ कहा जाता था. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के फेलो बेन बैरी के अनुसार, हाल के दशकों में, अमेरिका, इजराइल, ब्रिटेन और चीन ने युद्ध इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों में इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक संस्करण विकसित किए हैं.



