साधु-संत ध्यान करने के लिए गंगोत्री लौटे

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 08 Dec 2022 08:13 PM
साधु-संत ध्यान करने के लिए गंगोत्री लौटे
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उत्तरकाशी. कोविड-19 के कारण दो साल के व्यवधान के बाद साधु-संत हिमालय में ध्यान करने के लिए उत्तरकाशी जिले की गंगोत्री घाटी में लौट आए हैं. उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी ने बताया कि महामारी के चलते वर्ष 2020 और 2021 में गंगोत्री घाटी में कोई साधु-संत नहीं आया.

उन्होंने बताया कि पुराने जमाने से घाटी साधुओं की पसंदीदा जगह रही है और दो साल के बाद इतनी बडी संख्या में वे लौटे हैं.
ज्ञान की खोज में हिमालय के पहाड़ों में हाड़ कंपाने वाली ठंड के बीच सालों तक ध्यान लगाने वाले साधु-संतों की बहुत सी कहानियां हैं.
यदुवंशी ने कहा कि महामारी के प्रसार के कारण इस सदियों पुरानी परंपरा में व्यवधान आया, लेकिन 52 साधु गंगा के उदगम गंगोत्री घाटी में शून्य से नीचे तापमान में ध्यान करने के लिए आ चुके हैं.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि 47 साधु बर्फ से ढंकी गंगोत्री में, तीन तपोवन में और एक-एक भोजवास और कांखू में ध्यान कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा इनकी संख्या का सत्यापन कर लिया गया है. पिछले 20 साल से कांखू के निकट 3350 मीटर की उंचाई पर राम मंदिर में ध्यान करने वाले रामकृष्ण दास भी घाटी में लौटने वाले साधुओं में से एक हैं.

वर्ष 2008 से 2017 तक तपोवन में आध्यात्मिकता का अभ्यास करने वाले पूर्णिया चैतन्य भी इस साल लौट आए हैं. गंगोत्री की गुफाओं में वर्षों तक कठिन ध्यान करने वाले आध्यात्मिक साधुओं से संबधित कहानियां स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटकों के लिए भी रोमांचकारी हैं. अब रामकृष्ण दास और पूर्णिया चैतन्य अपनी भक्ति से स्थानीय लोककथाओं में अपना नाम दर्ज करवा रहे हैं .

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