न्यायालय ने मंडोली जेल से स्थानांतरण की सुकेश की याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 21 Nov 2022 10:00 PM
न्यायालय ने मंडोली जेल से स्थानांतरण की सुकेश की याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर द्वारा बार-बार याचिका दायर करने पर नाखुशी जताते हुए कहा कि वादी खर्च उठा सकता है तो इसका ये मतलब नहीं है कि वह अदालत में कई याचिकाएं दायर कर सकता है. चंद्रशेखर और उसकी पत्नी लीना पॉलोज की दो याचिकाएं सोमवार को शीर्ष अदालत के समक्ष सूचीबद्ध की गईं, जिनमें से एक में उन्होंने अपनी जान को खतरा होने का दावा करते हुए यहां मंडोली जेल से स्थानांतरण करने का अनुरोध किया. उनके वकील ने कहा कि चंद्रशेखर पर जेल में हमला किया गया था और वे अंडमान और निकोबार सहित देश की किसी भी अन्य जेल में जाने को तैयार हैं.

न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने याचिका पर एक सप्ताह के भीतर केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है. हालांकि, पीठ ने चंद्रशेखर और उसकी पत्नी की दूसरी याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने हर दिन अपने वकीलों के साथ 60 मिनट मुलाकात और जेल अधिकारियों को एक आवेदन करने की छूट की मांग की थी.

शीर्ष अदालत ने 23 अगस्त को आदेश दिया था कि चंद्रशेखर और उसकी पत्नी को तिहाड़ जेल से दिल्ली की मंडोली जेल में स्थानांतरित किया जाए. शीर्ष अदालत ने यह आदेश दंपति द्वारा दायर एक याचिका पर पारित किया था जिसमें उनके जीवन को खतरे का आरोप लगाया गया था और दिल्ली के बाहर एक जेल में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था.

नयी याचिका में चंद्रशेखर और उसकी पत्नी ने अपने वकील अशोक के ंिसह के जरिए दावा किया कि मंडोली जेल में उसके (चंद्रशेखर) साथ मारपीट की गई. उन्होंने दावा किया कि यह उसके मेडिकल रिकॉर्ड से स्पष्ट है, और वे यहां जेल में अपने जीवन के लिए खतरे का सामना कर रहे हैं.

पीठ ने ंिसह से कहा, ‘‘यह क्या है? आपका मुवक्किल हर महीने याचिका दायर कर रहा है. पिछले महीने, हमने उसकी याचिका खारिज कर दी थी और अब उसने फिर से दायर की है. हम इस पर विचार नहीं कर सकते.’’ पीठ ने कहा, ‘‘वादी खर्च उठा सकता है तो इसका ये मतलब नहीं है कि वह अदालत में कई याचिकाएं दायर कर सकता है. सिर्फ इसलिए कि वह वरिष्ठ वकीलों की सेवाएं ले सकता है, वह कई याचिकाएं दायर कर रहा है.’’ वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को अदालत का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि 23 अगस्त को शीर्ष अदालत के आदेश के बाद उसे मंडोली जेल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उसके साथ मारपीट की गई.

वकील ने मीडिया की खबरों का जिक्र करते हुए कहा कि चंद्रशेखर के खुलासे वाले बयान के कारण दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना के आदेश पर 82 जेल अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अपनी जान का खतरा है. वकील ने कहा, ‘‘कृपया उन्हें अंडमान और निकोबार सहित देश की किसी भी जेल में स्थानांतरित करने का निर्देश दें, वे अदालत के निर्देश पर जाने को तैयार हैं.’’ पीठ ने कहा कि अगर वह चंद्रशेखर को पंजाब या देश की किसी अन्य जेल में स्थानांतरित करने का निर्देश देती है तो भी स्थिति समान रहेगी.

दूसरी याचिका में, ंिसह ने दिल्ली कारागार नियमों का हवाला देते हुए कहा कि उनका मुवक्किल सप्ताह में दो बार एक वकील के साथ 30 मिनट की मुलाकात का हकदार है, लेकिन चूंकि उसके खिलाफ छह शहरों में 28 मामले हैं, इसलिए उसके वकील उन पर चर्चा करने में सक्षम नहीं हैं.

पीठ ने पूछा कि क्या इस संबंध में जेल अधिकारियों को कोई आवेदन दिया गया है, जिस पर ंिसह ने कहा कि उन्होंने पटियाला हाउस अदालत में एक आवेदन दिया है, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया और इसलिए वे शीर्ष अदालत के समक्ष आए हैं. वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को विभिन्न शहरों में कई मामलों के कारण हर दिन एक घंटे मुलाकात की जरूरत है. पीठ ने कहा, ‘‘आप जेल में वीआईपी सुविधा नहीं ले सकते. आप किसी अन्य कैदी की तरह हैं. नियमों और जेल नियमावली का पालन करना होगा. यदि आप कोई छूट चाहते हैं, तो आप पहले अधिकारियों को आवेदन दें.’’ चंद्रशेखर और उसकी पत्नी कथित धन शोधन और कई लोगों को ठगने के आरोप में जेल में बंद हैं.

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