भावी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान जरूरी: राजनाथ

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 05 May 2022 10:14 PM
भावी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान जरूरी: राजनाथ
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नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में प्रौद्योगिकी के उपयोग और रक्षा क्षेत्र में आत्म-निर्भरता पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत बताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि भविष्य के युद्धों की प्रकृति का आकलन सीरिया, अफगानिस्तान और हालिया यूक्रेन जंग के हालात को करीब से देखकर किया जा सकता है.

ंिसह ने 37वां पी सी लाल स्मृति व्याख्यान देते हुए कहा कि यूक्रेन के हालात ने दिखाया है कि इससे न केवल रक्षा आपूर्तियां प्रभावित हुई हैं, बल्कि राष्ट्रीय हित की बात करें तो व्यावसायिक अनुबंध भी प्रभावित हो सकते हैं. तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के लिए उठाये जा रहे कदमों का उल्लेख करते हुए ंिसह ने कहा कि सशस्त्र बलों के एकीकरण की जारी प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल संयुक्त क्षमता बल्कि सामर्थ्य भी बढ़ाना है.

रक्षा मंत्री ने भारतीय वायु सेना का आ’’ान किया कि ‘अंतरिक्ष क्षेत्र की शक्ति’ बने और उभरते खतरों से देश को बचाने के लिए तैयार रहे. उन्होंने सशस्त्र बलों से उनकी क्षमताएं बढ़ाने का आ’’ान करते हुए कहा, ‘‘आपको अपनी क्षमता बढ़ानी होगी.’’ रक्षा क्षेत्र में आत्म-निर्भरता की जरूरत पर अपना रुख साझा करते हुए ंिसह ने कहा कि न केवल घरेलू क्षमता का निर्माण करना, बल्कि देश की संप्रभुता की रक्षा करना भी जरूरी है.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे अतीत के अनुभवों ने हमें सिखाया है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए आयात पर निर्भर नहीं रह सकता. हालिया संघर्षों, खासतौर पर यूक्रेन के हालात ने हमें दिखाया है कि जब राष्ट्र हित की बात होती है तो केवल रक्षा आपूर्ति नहीं बल्कि व्यावसायिक अनुबंध भी प्रभावित हो सकते हैं.’’ ंिसह के बयान सैन्य अधिकारियों के बीच इस आशंका की पृष्ठभूमि में आये हैं कि यूक्रेन में युद्ध के हालात के मद्देनजर रूस से भारत को सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में देरी हो सकती है.

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम हाल के कुछ संघर्षों पर नजर डालते हैं तो हमें कई महत्वपूर्ण दृष्टिकोण मिलेंगे. अगर हम सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और यूक्रेन के वर्तमान संघर्ष पर नजर डालते हैं तो हमें ऐसे कई दृष्टिकोण मिल जाएंगे जिनसे हम भावी युद्धों की प्रकृति का आकलन कर सकते हैं.’’ ंिसह ने कहा, ‘‘ये प्रवृत्तियां सुझावात्मक हैं, लेकिन हम अपने स्थानीय खतरों के साथ उन्हें जोड़कर गहन समझ विकसित कर सकते हैं.’’ उभरते भूराजनीतिक हालात का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘‘भविष्य के युद्धों की प्रकृति का पूर्वानुमान लगाना हमारा कर्तव्य है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे दुश्मन अंतरिक्ष के सैन्य उपयोग के लिए कदम उठा रहे हैं. निश्चित रूप से इसका हमारे हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इसलिए, आपको अपनी क्षमता बढ़ानी होगी.’’ ंिसह ने कहा, ‘‘ऐसे हालात में इस बारे में विचार करना महत्वपूर्ण है कि क्या भारतीय वायु सेना को अंतरिक्ष शक्ति बनने की ओर बढ़ना चाहिए.’’ भविष्य की जंगों में प्रौद्योगिकी के महत्व को रेखांकित करते हुए ंिसह ने कहा कि हाल के समय में इसके उपयोग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखी गयी है. हालांकि उन्होंने कहा कि केवल महंगे प्लेटफॉर्म और आयुध प्रणाली से ही जीत नहीं मिलती, बल्कि उनकी तैनाती युद्ध में बढ़त दिलाती है.

रक्षा मंत्री ने एयर चीफ मार्शल पी सी लाल को श्रद्धांजलि भी अर्पित की जो 1965 के युद्ध के दौरान वायु सेना के उप प्रमुख थे और उन्होंने 1971 के युद्ध के समय देश के सातवें वायु सेना प्रमुख के रूप में सेवाएं दी थीं. ंिसह ने उन्हें दूरदृष्टा रक्षा अधिकारी बताते हुए कहा कि एयर चीफ मार्शल लाल का उत्कृष्ट नेतृत्व भारत की जीत तथा 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति के लिए निर्णायक साबित हुआ. ंिसह ने इस मौके पर पुस्तक ‘इंडो-पाक वॉर 1971- रेमिनसेंसिज आॅफ एयर वॉरियर्स’ का विमोचन भी किया. इस पुस्तक में पूर्व सैनिकों के लिखे 50 आलेख हैं.

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