
नयी दिल्ली. अदाणी समूह की 10 में से सात कंपनियों के शेयर मंगलवार को मामूली गिरावट के साथ बंद हुए. तीन कंपनियां… अदाणी टोटल गैस, अदाणी ग्रीन और अदाणी एनर्जी… बढ़त में रहीं. कारोबार समाप्ति पर अदाणी विल्मर का शेयर 2.37 प्रतिशत नीचे रहा. वहीं अदाणी एंटरप्राइजेज में 1.92 प्रतिशत, अंबुजा सीमेंट्स में 1.86 प्रतिशत, अदाणी पोर्ट्स में 1.24 प्रतिशत की गिरावट रही. एसीसी (0.54 प्रतिशत), अदाणी पावर (0.20) प्रतिशत) और एनडीटीवी (0.20 प्रतिशत) भी नुकसान में रहे.
हालांकि, अदाणी टोटल गैस का शेयर 1.94 प्रतिशत मजबूत हुआ. इसके अलावा, अदाणी ग्रीन एनर्जी 1.38 प्रतिशत और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस 0.70 प्रतिशत चढ़ गए. कारोबार के दौरान अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर में 6.28 प्रतिशत का उछाल आया. वहीं अदाणी टोटल गैस चार प्रतिशत चढ़ा जबकि एनडीटीवी में 2.56 प्रतिशत की मजबूती रही. अदाणी ग्रीन एनर्जी में 2.55 प्रतिशत की तेजी रही.
अदाणी विल्मर का शेयर कारोबार के दौरान 2.15 प्रतिशत, एसीसी 1.93 प्रतिशत, अदाणी पावर 1.74 प्रतिशत, अदाणी पोर्ट्स एक प्रतिशत, अंबुजा सीमेंट्स 0.43 प्रतिशत मजबूत हुए. तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 692.89 अंक यानी 0.87 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,956.03 अंक पर बंद हुआ. एनएसई निफ्टी 208 अंक यानी 0.85 प्रतिशत टूटकर 24,139 अंक पर बंद हुआ.
अदाणी समूह के दो लंबित मामलों की जांच पूरा करने का निर्देश देने की याचिका दाखिल
शेयर कीमतों में हेराफेरी के अदाणी समूह पर लगे आरोपों से संबंधित दो लंबित मामलों में बाजार नियामक सेबी को अपनी जांच जल्द पूरी करने का निर्देश देने का उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया गया है. उच्चतम न्यायालय में यह नई याचिका विशाल तिवारी ने दाखिल की है. उन्होंने वर्ष 2023 में भी हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद अदाणी समूह के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की मांग की थी. याचिकाकर्ता ने कहा है कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च की नई रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों से आम जनता और निवेशकों के मन में संदेह का माहौल पैदा हुआ है.
अमेरिकी निवेश एवं शोध फर्म हिंडनबर्ग ने शनिवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि अदाणी समूह के शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट विदेशी कोष में सेबी प्रमुख और उनके पति धवल बुच की भी हिस्सेदारी थी.
इसके पहले हिंडनबर्ग ने जनवरी, 2023 में भी अदाणी समूह पर वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी और शेयर कीमतों में हेराफेरी के आरोप लगाए थे. उसके बाद तिवारी समेत कई याचिकाकर्ताओं ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर जांच की अपील की थी. बाद में सेबी ने शीर्ष अदालत को बताया कि अदाणी समूह पर लगे 24 आरोपों में से 22 की जांच पूरी कर ली गई है जबकि दो मामले अभी लंबित हैं.
उच्चतम न्यायालय ने जनवरी में सेबी को दो लंबित जांचों को तेजी से, बेहतर रूप में तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था. तिवारी ने आवेदन में कहा, ”इस न्यायालय ने सेबी की जांच पूरी करने के लिए स्पष्ट रूप से तीन महीने की समयसीमा तय की है. जब आदेश में तीन महीने का उल्लेख किया गया है, तो यह विवेकपूर्ण समझ बनती है कि लंबित जांच पूरी करने के लिए एक निश्चित समय अवधि तय की गई है.” उच्चतम न्यायालय की पीठ ने तीन जनवरी, 2024 को यह मामला विशेष जांच दल (एसआईटी) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सुपुर्द करने से इनकार कर दिया था. उसने कहा था कि सेबी इस मामले की एक व्यापक जांच कर रहा है.
हालांकि, हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट में सेबी प्रमुख पर आरोप लगाए जाने के बाद याचिकाकर्ता तिवारी ने नया आवेदन दिया है. तिवारी ने कहा, ”सेबी प्रमुख ने इन आरोपों को निराधार बताया है और इस अदालत ने भी माना है कि तीसरे पक्ष की रिपोर्ट पर विचार नहीं किया जा सकता है. लेकिन इस मामले ने जनता और निवेशकों के मन में संदेह का माहौल पैदा कर दिया है. ऐसी स्थिति में सेबी के लिए लंबित जांच को पूरा करना और जांच के नतीजे की घोषणा करना अनिवार्य हो जाता है.” अदाणी समूह ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को नकारते हुए कहा था कि वह सभी नियामकीय प्रावधानों का पालन करता है. इसके बीच फरवरी-मार्च, 2023 में उसकी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में बड़ी गिरावट आई थी.



