
ढाका. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने रविवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना पर आरोप लगाया कि उन्होंने सत्ता बरकरार रखने की कोशिश के तहत हर संस्था को तबाह कर दिया. यूनुस ने वादा किया कि जैसे ही उनकी सरकार “अहम सुधार” करने की जरूरी प्रक्रिया पूरा कर लेगी, वह स्वतंत्र, निष्पक्ष और भागीदारीपूर्ण चुनाव कराएंगे. सरकारी नौकरियों में विवादास्पद आरक्षण प्रणाली के खिलाफ छात्रों के बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद 76 वर्षीय हसीना ने पांच अगस्त को इस्तीफा दे दिया और भारत चली गईं.
हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद 84 साल के यूनुस ने आठ अगस्त को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली.
यूनुस ने कहा, ” सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में शेख हसीना की तानाशाही ने देश की हर संस्था को नष्ट कर दिया. न्यायपालिका चरमरा गई. डेढ़ दशक तक चली क्रूर कार्रवाई के जरिये लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला गया.” ‘यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश’ ने यूनुस के प्रेस सचिव शफीक-उल-आलम के हवाले से खबर दी है.
उनकी यह टिप्पणी उस समय आई जब वह अंतरिम सरकार के गठन के बाद पहली बार ढाका में तैनात राजनयिकों से बात कर रहे थे.
यूनुस ने कहा कि उन्होंने एक ऐसे देश की कमान संभाली है जो कई मायनों में पूरी तरह से अव्यवस्थित है. उन्होंने चुनाव आयोग, न्यायपालिका, नागरिक प्रशासन, सुरक्षा बलों और मीडिया में जरूरी सुधारों पर जोर दिया.
मुख्य सलाहकार ने कहा कि चुनावों में खुलेआम धांधली की गई और युवा पीढ़ी अपने मताधिकार का प्रयोग किए बिना ही बड़ी हो गई.
यूनुस ने कहा, “बैंकों को पूर्ण राजनीतिक संरक्षण के तहत लूटा गया. सत्ता का दुरुपयोग करके सरकारी खजाने को लूटा गया.” उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय मेलमिलाप को बढ़ावा देने के लिए भी ईमानदारी से प्रयास करेंगे. यूनुस ने कहा कि वह व्यापक आर्थिक स्थिरता और सतत विकास को बहाल करने के लिए मजबूत और दूरगामी आर्थिक सुधार करेंगे, जिसमें सुशासन और भ्रष्टाचार एवं कुप्रबंधन से निपटने को प्राथमिकता दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में लाना होगी.
यूनुस ने कहा, “हम अपने लोगों के अटूट समर्थन और सशस्त्र बलों की देशभक्ति के साथ बहुत कम वक्त में सामान्य हालात के करीब होंगे.” पुलिस बल ने भी अपना काम फिर से शुरू कर दिया है. जब तक जरूरी होगा सशस्त्र बल नागरिक शासन की सहायता के लिए काम करना जारी रखेंगे. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार सभी धार्मिक और जातीय समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.” हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के सदस्यों के विरुद्ध हिंसा में वृद्धि देखी गई.
यूनुस ने कहा कि अंतरिम सरकार “अहम सुधार” करने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरा करते ही स्वतंत्र, निष्पक्ष और सहभागिता आधारित चुनाव कराएगी. मुख्य सलाहकार ने कहा कि उन्होंने हाल के जन-विद्रोह के दौरान हुई हत्याओं और हिंसा के लिए इंसाफ और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी अपनी प्राथमिकता बना ली है. उन्होंने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून सहित अपने सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों को कायम रखेंगे और बढ़ावा देंगे.
यूनुस ने कहा, “हमारी सरकार उन सभी अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय समझौतों का पालन करेगी, जिनका वह हिस्सा है. बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए बहुपक्षवाद का सक्रिय समर्थक बना रहेगा.” उन्होंने कहा, “हमारी सरकार आपसी सम्मान, समझ और साझा हितों की भावना से सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करेगी.” उन्होंने अपने व्यापार और निवेश साझेदारों से आर्थिक समृद्धि के लिए बांग्लादेश में अपना विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया. यूनुस ने बांग्लादेश के पुर्निनर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग मांगा.
बांग्लादेश में सत्ता हतांतरण प्रक्रिया में सहयोग करे भारत : बांग्लादेशी राजनीतिक विश्लेषकों का आग्रह
कई राजनीतिक विश्लेषकों और विदेशी संबंध एवं सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों ने रविवार को कहा कि अगर भारत बांग्लादेश में हो रही सत्ता हस्तांतरण प्रक्रिया का समर्थन करता है और ”किसी एक व्यक्ति और पार्टी पर ध्यान केंद्रित करने” के बजाय अन्य राजनीतिक दलों के साथ भी संबंध बनाने की दिशा में आगे बढ.ता है, तो इससे उसे फायदा होगा. विश्लेषकों का यह भी मानना है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ व्यवहार दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कारक होगा.
अग्रणी थिंकटैंक ‘बांग्लादेश एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट’ (बीईआई) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने ‘पीटीआई’ से कहा, ”मुझे लगता है कि हमारे संबंधों को फिर से तय करने के लिए आपसी समझ शुरुआती बिंदु होनी चाहिए, क्योंकि हम एक-दूसरे पर निर्भर हैं, इसलिए हमें अपने संबंधों को पुर्निनर्धारित करने के लिए एक-दूसरे की जरूरत है.” उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का पड़ोसी होने के नाते भारत ”मुश्किल समय में हमेशा हमारे साथ रहा है और बदलाव की मौजूदा प्रक्रिया के दौरान भी यदि वह हमारा समर्थन करता है तो मुझे लगता है कि बांग्लादेश के लोग भारत को एक मित्र के रूप में देखेंगे.”
कबीर ने कहा कि भारत यदि बांग्लादेश में जारी सत्ता हस्तांतरण प्रक्रिया का ”सकारात्मक तरीके से समर्थन” करता है और इस बदलाव की ”विशिष्टता” को ध्यान में रखते हुए ”किसी एक व्यक्ति और पार्टी पर ध्यान केंद्रित करने” के बजाय अन्य राजनीतिक दलों के साथ संबंध बनाने की दिशा में आगे बढ.ता है तो इससे उसे लाभ होगा.
बांग्लादेश शांति एवं सुरक्षा अध्ययन संस्थान (बीआईपीएसएस) के अध्यक्ष सेवानिवृत्त मेजर जनरल मुनीरुज्जमां ने कहा कि भारत को ”बांग्लादेश की वास्तविकता देखनी चाहिए, जहां जन क्रांति हुई है.” उन्होंने कहा, ”उन्हें (भारत को) इतिहास के सही पक्ष की तरफ होना चाहिए और बांग्लादेश के लोगों के साथ सहयोग करने की इच्छा व्यक्त करनी चाहिए. बहुत लंबे समय से उन्हें एक विशेष पार्टी और नेता का पक्ष लेते देखा गया है.” मुनीरुज्जमां ने ‘पीटीआई’ से कहा कि द्विपक्षीय संबंध लोगों के आपसी संबंधों पर आधारित होने चाहिए. उन्होंने कहा, ”हम भारत से ऐसी मित्रता की उम्मीद करते हैं, जो हमारे राष्ट्रीय हित पर आधारित हो.” बांग्लादेश के ‘सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग’ (सीपीडी) के अर्थशास्त्री देबप्रिय भट्टाचार्य ने कहा कि शांति, सुरक्षा और विकास के दृष्टिकोण से बांग्लादेश और भारत के संबंध दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं.
भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई’ से कहा, ”बांग्लादेश ने भारतीय जनता के फैसले का सम्मान करते हुए कांग्रेस के सत्ता से हटने के बाद भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) की सरकार को सहयोग दिया और इससे उसे लाभ हुआ. भारत को भी अब ऐसा ही करना चाहिए, क्योंकि छात्र-नागरिक विद्रोह के माध्यम से अवामी लीग सरकार को सत्ता से हटा दिया गया है.” उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में भारत को ”विश्वास और आपसी हित के आधार पर संबंधों का पुर्निनर्माण करना होगा”और ”उसे संबंधित देश के किसी विशेष राजनीतिक दल का बंधक नहीं रहना चाहिए”, क्योंकि यह संबंध द्विदलीय सहमति पर आधारित होना चाहिए और दोनों देशों को इस दिशा में काम करने की जरूरत है.
भट्टाचार्य ने कहा, ”हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि एक देश में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय दूसरे देश में बहुसंख्यक है (और) इसलिए हमारे देशों में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ व्यवहार हमारे संबंधों में एक महत्वपूर्ण कारक होगा.” सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना (76) के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने आठ अगस्त को ऐसे समय में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली, जब देश हिंसा और अराजकता से जूझ रहा है. हसीना को सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रणाली के खिलाफ छात्रों के बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद इस्तीफा देना पड़ा था और इसके बाद वह पांच अगस्त को देश छोड़कर भारत चली गई थीं.
बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ सामूहिक हत्या के आरोप में वाद दायर
बांग्लादेश की एक अदालत में रविवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और 33 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए एक अर्जी दायर की गई, जिसमें उन पर 2013 में ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ द्वारा आयोजित एक रैली पर अंधाधुंध गोलीबारी करके सामूहिक हत्या करने का आरोप लगाया गया है. ‘ढाका ट्रिब्यून’ अखबार की खबर के अनुसार, बांग्लादेश पीपुल्स पार्टी (बीपीपी) के अध्यक्ष बाबुल सरदार चखारी ने ढाका मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की है.



