
इंफाल/चुराचांदपुर. मणिपुर के भाजपा विधायक एल रामेश्वर मेइती ने बृहस्पतिवार को कहा कि यदि केंद्र सरकार राज्य में सरकार गठन में विफल रहती है तो नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार का गठन नहीं हुआ तो राज्य में पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है.
केइराओ विधायक ने एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “हमारे बीच कुछ समान विचारधारा वाले भाजपा विधायक हैं जिन्होंने सरकार गठन में नेतृत्व के लिए स्पीकर थोकचोम सत्यब्रत को चुना है. सरकार गठन के दावे को हम राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए भी तैयार है, लेकिन फिलहाल अनुकूल समय का इंतजार कर रहे हैं.” उन्होंने यह भी दावा किया कि पहाड़ और घाटी, दोनों क्षेत्रों के विधायक सरकार बनाने के लिए तैयार हैं. मेइती ने कहा, “मुझे लगता है कि अगर नवंबर में सरकार नहीं बनती है, तो पार्टी की स्थिति अनुकूल नहीं होगी. अगर सरकार का गठन नहीं हो पाता है तो नए सिरे से चुनाव होने चाहिए.”
अगर समन किया गया तो ‘पक्षपाती’ एनआईए का बहिष्कार करेंगे : मणिपुर के आदिवासी छात्र संगठन
मणिपुर के कई आदिवासी छात्र संगठनों ने बृहस्पतिवार को कहा कि यदि भविष्य में किसी कुकी जो समुदाय के सदस्य को समन भेजा गया, तो उन्हें “पक्षपाती” राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण(एनआईए) का बहिष्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. जोमी छात्र संघ, कुकी छात्र संगठन और हमार छात्र संघ ने एक संयुक्त बयान में आरोप लगाया कि हाल के महीनों में कई घटनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है.
बयान में कहा गया कि इसके अलावा, राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा समाज के निर्दोष नेताओं को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाए जाने की घटना भी देखी गई. बयान में दावा किया गया कि एनआईए द्वारा मामले दर्ज करने और उन्हें निपटाने में कुकी जो लोगों के खिलाफ ”उच्च स्तर” का पूर्वाग्रह सामने आया है. छात्र संगठनों ने दावा किया कि सेना के अभियान में मारे गए यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी के चार सदस्य अपनी भूमि की रक्षा के लिए सर्मिपत युवा थे.
यह बयान प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी (यूकेएनए) के चार हथियारबंद सदस्यों को जिले के हेंगलेप उप-मंडल के अंतर्गत खानपी गांव में सुरक्षाबलों द्वारा मार गिराए जाने के दो दिन बाद आया है. मारे गए चारों उग्रवादियों का पोस्टमार्टम के कुछ घंटों बाद बृहस्पतिवार शाम को अंतिम संस्कार किया गया. जनजातीय संगठन आईटीएलएफ ने बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे से चारों मृतकों के अंतिम संस्कार तक सम्मान और शोक के प्रतीक के रूप में चुराचांदपुर शहर को पूरी तरह बंद रखने का आ”ान किया था. शाम करीब 5.30 बजे बंद समाप्त किया गया और इसका (बंद का) मिलाजुला असर देखने को मिला.



