
रांची. झारखंड के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कथित संलिप्तता वाले खनन पट्टा मामले का जिक्र करते हुए रविवार को कहा कि हर किसी को अपनी गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ता है. राधाकृष्णन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से साक्षात्कार के दौरान राज्य में संगठित अपराध और नक्सलवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया और जिस तरह से आपराधिक गिरोह ”जेल से काम” कर रहे हैं तथा नक्सलियों द्वारा सुरक्षा र्किमयों की हत्या की जा रही है, उसे लेकर नाखुशी जाहिर की.
उन्होंने ”जेल से जारी आपराधिक गतिविधियों” और नक्सलियों द्वारा सुरक्षार्किमयों की हत्या को ”चिंताजनक” और ”दुखद” बताया.
राज्यपाल ने सोरेन की कथित संलिप्तता वाले अवैध खनन मामले का जिक्र करते हुए कहा कि ”हर किसी को अपने कर्मों का परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए” और ”सनसनीखेज मामलों से जल्दबाजी में नहीं निपटा जा सकता.” सोरेन द्वारा कथित तौर पर अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर स्वयं को पत्थर खनन पट्टा आवंटित किए जाने को लेकर विवाद छिड़ गया है.
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता रघुबर दास ने सोरेन पर पिछले साल इस संबंध में आरोप लगाए थे और उन्हें संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत हटाए जाने की मांग की थी. भाजपा की राज्य इकाई ने इसे लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी और इस मामले को निर्वाचन आयोग ने तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस के पास भेज दिया था. अदालतें आरोपों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही हैं. इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने भी मुख्यमंत्री के खिलाफ धनशोधन संबंधी जांच शुरू की गई.
राज्यपाल ने कहा, ”हम ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहते, जिससे राज्य में अनावश्यक रूप से राजनीतिक अशांति पैदा हो और इसके विकास को नुकसान पहुंचे. यदि किसी से कोई गलती होती है, तो उसे उसका परिणाम भुगतना पड़ता है. अगर मैं भी कोई गलती करता हूं, तो मुझे उसका परिणाम भुगतना होगा.” भाजपा ने सोरेन को विधानसभा से अयोग्य ठहराने का अनुरोध करने वाली याचिका दायर की थी. ऐसा माना जाता है कि निर्वाचन आयोग ने 25 अगस्त 2022 को राज्य के तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस को अपना फैसला भेज दिया था.
राज्यपाल ने कहा, ”यह (आयोग का फैसला) मेरे पूर्ववर्ती (बैस) को एक सीलबंद लिफाफे में प्राप्त हुआ था. मैंने इसे पढ.ा नहीं है…मैं उचित समय पर इस पर गौर करूंगा….बहुत सनसनीखेज मामलों से जल्दबाजी में नहीं निपटा जा सकता. आपको इसे ठीक से और पूरी तरह से समझना होगा और संविधान विशेषज्ञों की सलाह लेनी होगी. मैं ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता, जिस पर सवाल खड़े किए जाएं. मैं कोई खराब मिसाल कायम नहीं करना चाहता.”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ”विशेषज्ञों के साथ अनौपचारिक विचार-विमर्श जारी है और इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता…मैं केवल प्रचार के लिए कभी कुछ नहीं करता.” राधाकृष्णन ने राज्यपाल द्वारा पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन संविधान का संरक्षक होने के नाते, वह झारखंड में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को नौकरियों में 77 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव वाले विधेयक को मंजूरी देने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा आरक्षण को लेकर तय की गई 50 प्रतिशत की सीमा संबंधी दिशा-निर्देश का उल्लंघन नहीं कर सकते.
राज्यपाल ने कहा, ”हमें संगठित अपराध और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी. कोई जेल से गतिविधियों को अंजाम दे रहा है और कोई विदेश से काम कर रहा है. या तो लोगों (सरकार) को इससे निपटना होगा या हम उनसे इससे निपटने का अनुरोध करेंगे.” उन्होंने माओवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता को रेखांकित किया.
राधाकृष्णन ने कहा, ”आप तलाश अभियान चलाते हैं और आप अपनी सारी खुफिया जानकारी का उपयोग करते हैं. आप चाहें तो मैं केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से सारी जानकारी ले सकता हूं, ताकि हम झारखंड में नक्सलवाद को कुचल सकें. मेरे कार्यभार संभालने के बाद हम पहले ही तीन र्किमयों को खो चुके हैं…यह बहुत दर्दनाक और चिंताजनक है.” राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने नक्सलियों द्वारा सुरक्षार्किमयों की हत्या के बारे में मुख्यमंत्री से बात की थी.
उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्होंने पुलिस बल को कोई भी कार्रवाई करने की पूरी आजादी दी है.” उन्होंने कहा कि राज्य के 24 जिलों में से लगभग 22 जिले नक्सल मुक्त हैं, लेकिन उन्होंने नक्सलियों के अपने ”ठिकानों से बाहर निकलने और फिरौती मांगने” की घटनाओं पर चिंता जताई.



