
रांची. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की पश्चिम बंगाल से लगी सीमा पर आलू से लदे वाहनों को ”रोके जाने” का रविवार को संज्ञान लिया. एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई. वाहनों को रोके जाने से राज्य में आलू की आपूर्ति प्रभावित हुई है. मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव अलका तिवारी को तत्काल प्रभाव से मामले से निपटने का निर्देश दिया.
पश्चिम बंगाल के आलू व्यापारियों के एक संगठन के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने आलू का भंडार बनाए रखने और राज्य में आलू की कीमत को नियंत्रण में रखने के लिए बृहस्पतिवार से आलू की अंतरराज्यीय आपूर्ति पर कथित रूप से प्रतिबंध लगा दिया है.
बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर तिवारी ने मामले के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत से फोन पर बात की. बयान में कहा गया, ”पंत ने आश्वासन दिया है कि आलू आपूर्ति के मुद्दे को सुलझाने के लिए जल्द ही एक समिति गठित की जाएगी.” एक अधिकारी के अनुसार, पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल द्वारा आलू की आपूर्ति सीमित कर दिए जाने के कारण झारखंड के खुदरा बाजार में पिछले दो दिनों में आलू की कीमत में पांच रुपये प्रति किलोग्राम की बढ.ोतरी हुई है.
पश्चिम बंगाल पूरे साल झारखंड की आलू की 60 प्रतिशत मांग को पूरा करता है, जबकि बाकी मांग उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ., मध्य प्रदेश और स्थानीय रूप से पूरी होती है. पश्चिम बंगाल प्रगतिशील आलू व्यापारी संघ (डब्ल्यूबीपीपीटीए) के पूर्व अध्यक्ष और सलाहकार बिभास कुमार डे ने शनिवार को फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”दूसरे राज्यों में आलू के निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ.ा दी है. पिछले तीन दिनों में जांच के दौरान आलू से लदे सैकड़ों ट्रकों को वापस भेज दिया गया. इस कदम से व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है.” डे ने कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार से सोमवार तक प्रतिबंध हटाने की मांग की है. उन्होंने रविवार को कहा, ”शनिवार को डब्ल्यूबीपीपीटीए और पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन की संयुक्त बैठक में हमने फैसला किया है कि अगर प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो सोमवार रात से कोल्ड स्टोरेज से आलू नहीं निकाला जाएगा.”



