श्रीनगर की डल झील अब ‘डल’ नहीं रही: उपराष्ट्रपति धनखड़

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 26 Sep 2024 07:06 PM
श्रीनगर की डल झील अब ‘डल’ नहीं रही: उपराष्ट्रपति धनखड़
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नयी दिल्ली. जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के बीच उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को कहा कि जब वह 1990 में वहां गए थे तो श्रीनगर की डल झील ‘डल’ (नीरस) थी, लेकिन अब यह पर्यटकों से गुलजार है. उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि अब इस क्षेत्र में अनुच्छेद 370 लागू नहीं है.

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के 83वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए धनखड़ ने केंद्रीय मंत्री के रूप में 1990 में श्रीनगर की अपनी यात्रा को याद किया, जब वह डल झील के पास एक होटल में ठहरे थे. उपराष्ट्रपति ने कहा, ”सबकुछ नीरस था. डी-यू-एल-एल (डल). सड़क पर 20 व्यक्ति भी नहीं देखे जा सकते थे. उदासी और निराशा की स्थिति थी. उन्होंने कहा कि राज्यसभा, जिसके वह सभापति हैं, को पिछले साल सूचित किया गया था कि दो करोड़ पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया.

धनखड़ ने बताया कि अनुच्छेद 370, जिसकी परिकल्पना संविधान के अस्थायी प्रावधान के रूप में की गई थी, अब नहीं है. उन्होंने कहा, ”अनुच्छेद 370, एकमात्र ऐसा अनुच्छेद है जिसे अस्थायी करार दिया गया था और जिसे कुछ लोगों ने स्थायी तौर पर माना था (जिनमें वे लोग भी शामिल थे जिन्होंने संविधान के तहत शपथ ली थी), अब नहीं है.” धनखड़ ने वर्तमान स्थिति की तुलना 1990 के दशक से करते हुए कहा, ”आज देश की स्थिति मेरे सपनों से परे है. मैंने कभी कल्पना नहीं की थी. मैंने उस भारत की कल्पना भी नहीं की थी जो आज है.”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1990 का दशक एक ऐसा समय था जब भारत को अपनी वित्तीय विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अपना सोना स्विस बैंकों के पास गिरवी रखना पड़ा था क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार एक अरब अमेरिकी डॉलर तक गिर गया था और विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे वित्तीय संस्थानों ने सलाह की आड़ में भारत को दिशानिर्देश जारी किए थे.

धनखड़ ने कहा कि 1990 का दशक भी सत्ता के गलियारों के बिचौलियों का युग था, भ्रष्टाचार व्याप्त था और केवल वंश-परिवार वाले व्यक्तियों को ही अवसर सुलभ हो सकते थे. उन्होंने कहा कि आईएमएफ अब भारत को निवेश और अवसर के लिए सबसे पसंदीदा वैश्विक गंतव्य बताता है और विश्व बैंक डिजिटलीकरण के लिहाज से भारत को एक ‘रोल मॉडल’ करार देता है.

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