
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने ठप खड़ी एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज के परिसमापन, सफल बोलीदाता जालान कलरॉक गठजोड़ द्वारा डाले गए 200 करोड़ रुपये जब्त करने तथा एसबीआई की अगुवाई वाले ऋणदाताओं को 150 करोड़ रुपये की प्रदर्शन बैंक गारंटी भुनाने की अनुमति देने का बृहस्पतिवार को आदेश दिया.
संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश को खारिज करते हुए जेट एयरवेज की दिवाली कार्यवाही पर रोक लगा दी.
पीठ ने मामले को ” आंखें खोलने वाला ” करार दिया और जालान कलरॉक गठजोड़ (जेकेसी) द्वारा पहली किस्त के भुगतान के मद्देनजर प्रदर्शन बैंक गारंटी (पीबीजी) के समायोजन की अनुमति देने के लिए एनसीएलएटी की खिंचाई की. राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने जेकेसी को अपने भुगतान दायित्वों का पूर्णत? पालन किए बिना ही जेट एयरवेज का अधिग्रहण करने की अनुमति दे दी थी.
न्यायालय ने कहा, ” एनसीएलएटी का वह आदेश जिसमें एसआरए (सफल समाधान आवेदक) को 350 करोड़ रुपये के भुगतान की पहली किस्त के विरुद्ध 150 करोड़ रुपये के पीबीजी को समायोजित करने का निर्देश दिया गया था, इस अदालत के आदेश की घोर अवहेलना है…” पीठ की ओर से फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति पारदीवाला ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ एसबीआई तथा अन्य ऋणदाताओं की याचिका को स्वीकार कर लिया. याचिका में जेकेसी के पक्ष में जेट एयरवेज की समाधान योजना को बरकरार रखने के फैसले का विरोध किया गया है. शीर्ष न्यायालय ने ऋणदाताओं की अपील स्वीकार कर ली तथा एनसीएलएटी के आदेश को रद्द कर दिया.
पीठ ने कहा, ” इस फैसले में चर्चा की गई विचित्र तथा चिंताजनक परिस्थितियों में और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि एनसीएलटी द्वारा समाधान योजना को विधिवत अनुमोदित किए जाने के बाद से करीब पांच साल बीत चुके हैं और कोई प्रगति नहीं हुई है…हमारे पास संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करने तथा कॉरपोरेट देनदार को परिसमापन के लिए निर्देश देने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है.” संविधान का अनुच्छेद 142 उच्चतम न्यायालय को अपने समक्ष लंबित किसी भी मामले या मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आदेश तथा डिक्री जारी करने का अधिकार देता है.
पीठ ने आदेश दिया कि बंद हो चुकी एयरलाइन कंपनी की परिसमापन प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं और ”एसआरए द्वारा पहले से डाली गई 200 करोड़ रुपये की राशि जब्त की जाए.” परिसमापन की प्रक्रिया में कंपनी की संपत्तियों को बेचकर प्राप्त धन से ऋणों का भुगतान किया जाता है.
न्यायालय ने कहा, ” ऋणदाता लेनदारों को एसआरए द्वारा प्रस्तुत 150 करोड़ रुपये की निष्पादन बैंक गारंटी को भुनाने की अनुमति दी जाती है. ” उसने कहा कि आंशिक भुगतान के रूप में प्रदर्शन बैंक गारंटी को समायोजित करने की एनसीएलएटी की मंजूरी शीर्ष अदालत के पहले के निर्देश की ”घोर अवहेलना” थी, साथ ही समाधान योजना की शर्तों और दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता के तहत स्थापित सिद्धांतों की भी अवहेलना थी.
न्यायालय ने कहा कि प्रारंभिक किस्त का भुगतान न करने के अलावा जेकेसी, ने कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया लागत और कर्मचारी बकाया सहित अन्य महत्वपूर्ण बकाया राशि का भुगतान नहीं किया है. मामले में जेकेसी का प्रतिनिधित्व करंजवाला एंड कंपनी के अधिवक्ता देबमाल्या बनर्जी और कार्तिक भटनागर ने किया.
न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा, ” यह मुकदमा एनसीएलएटी की कार्यप्रणाली सहित कई मुद्दों पर आंखें खोलने वाला रहा है.” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाधान योजना को लागू करने में जेकेसी की विफलता के कारण दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के ऐसे प्रावधान लागू हुए, जिनके कारण परिसमापन आवश्यक हो गया.
पीठ ने कहा, ” हमारे मन में इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि एनसीएलएटी ने स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत काम किया और मामले पर निर्णय देते समय सही तथ्यों से गलत निष्कर्ष निकालने की हद तक चला गया.” एनसीएलएटी ने बंद हो चुकी एयरलाइन कंपनी की समाधान योजना को 12 मार्च को बरकरार रखा था और इसके स्वामित्व को जेकेसी को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी थी. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और जेसी फ्लावर्स एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ अदालत का रुख किया था.
जेट एयरवेज अब कभी नहीं भर पाएगी उड़ान, पांच साल से ठप एयरलाइन का होगा परिसमापन
जेट एयरवेज ने 25 साल तक पूर्ण सेवा एयरलाइन के रूप में उड़ान भरने के बाद पांच साल पहले अप्रैल के महीने में अस्थायी रूप से अपना परिचालन बंद करने की घोषणा की थी. नकदी संकट की वजह से एयरलाइन ने यह कदम उठाया था. अब उच्चतम न्यायालय के एयरलाइन के परिसमापन के आदेश के बाद इसके फिर से उड़ान भरने की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है.
एयरलाइन का परिचालन ठप होने के बाद से करीब 20,000 से अधिक नौकरियां जा चुकी हैं और ऋणदाताओं, विक्रेताओं और यात्रियों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया दिवाला समाधान की प्रतीक्षा में ‘डूब’ गया है. आज सर्वोच्च न्यायालय ने एयरलाइन के परिसमापन का आदेश दे दिया, जिससे एयरलाइन के अस्तव्यस्त सफर का औपचारिक समापन हो गया तथा पुनरुद्धार की उम्मीदें भी चकनाचूर हो गईं.
एयरलाइन की आखिरी उड़ान एस2-3502 अमृतसर से 17 अप्रैल, 2019 को रात करीब 10.30 बजे रवाना हुई और 18 अप्रैल को तड़के 12.22 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी. जेट एयरवेज की किफायती इकाई जेटलाइट ने बोइंग 737-800 विमान के साथ उड़ानों का संचालन किया, जिसे बाद में किफायती एयरलाइन स्पाइसजेट ने पट्टे पर ले लिया.
अपने परिचालन के चरम के दौरान जेट एयरवेज के पास 120 से ज़्यादा विमान थे. बढ़ते कर्ज और कर्मचारियों का वेतन भुगतान नहीं होने के चलते जब एयरलाइन ने परिचालन बंद किया था तो उसके पास अपने खुद के 16 विमान थे. नरेश गोयल द्वारा स्थापित इस एयरलाइन ने ढाई दशक से अधिक समय तक करोड़ों यात्रियों को सेवा प्रदान की है. गोयल ने यात्रा एजेंसी जेटएयर के साथ कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के लिए एक सामान्य बिक्री एजेंट के रूप में शुरुआत की थी.
जेट एयरवेज भी भारतीय विमानन क्षेत्र में प्रमुख निजी एयरलाइन में से एक थी, लेकिन वित्तीय संकट के कारण इसका पतन शुरू हो गया. एयरलाइन ने अपनी यात्रा एक एयर टैक्सी परिचालक के रूप में मुंबई से अहमदाबाद तक सेवा के साथ शुरू की थी. अपने चरम पर इसमें लगभग 1,300 पायलट समेत लगभग 20,000 कर्मचारी थे. साल 2019 में परिचालन को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा के समय जेट एयरवेज के पास 20,000 से अधिक कर्मचारी थे. उस समय कंपनी पर बैंकों का 8,500 करोड़ रुपये से अधिक बकाया था. इसके अलावा एजेंट और यात्री रिफंड के हजारों करोड़ रुपये बकाया थे.
जेट एयरवेज द्वारा 17 अप्रैल, 2019 को परिचालन बंद करने के कुछ सप्ताह बाद ऋणदाताओं ने अपना बकाया वसूलने के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया की मांग की. राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने 20 जून, 2019 को एयरलाइन के खिलाफ दायर दिवाला याचिका को स्वीकार कर लिया.
जालान कलरॉक गठजोड़ (जेकेसी) 2021 में दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत जेट एयरवेज के सफल बोलीदाता के रूप में उभरा, लेकिन ऋणदाताओं के साथ लगातार मतभेदों के परिणामस्वरूप समाधान योजना धरी की धरी रह गई. बृहस्पतिवार को सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश को रद्द करते हुए एयरलाइन की दिवाला कार्यवाही पर रोक लगा दी.
एनसीएलएटी ने कहा कि उसने भुगतान दायित्वों का पूर्णत: पालन किए बिना ही जेकेसी को जेट एयरवेज का अधिग्रहण करने की अनुमति दे दी थी. परिसमापन के अलावा, सर्वोच्च न्यायालय ने सफल बोलीदाता जेकेसी द्वारा डाले गए 200 करोड़ रुपये जब्त करने का निर्देश दिया है. न्यायालय ने एसबीआई के नेतृत्व वाले ऋणदाताओं को 150 करोड़ रुपये की निष्पादन बैंक गारंटी भुनाने की भी अनुमति दी है.
अदालत ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ एसबीआई और अन्य ऋणदाताओं की याचिका को स्वीकार कर लिया. एनसीएलएटी ने जेकेसी के पक्ष में जेट एयरवेज की समाधान योजना को बरकरार रखा था. एयरलाइन के ठप होने के इतने वर्षों के बाद जो कुछ बचा है वह है… बाधित आजीविका, बकाया राशि का भुगतान न होना और धूल खाते हुए जेट एयरवेज की छवि वाले कुछ विमान….



