
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने यहां लाल किले के निकट हुए कार विस्फोट के पीड़ितों को मंगलवार को श्रद्धांजलि देते हुए कानून का शासन कायम रखने तथा न्याय सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक ट्रैफिक सिग्नल पर धीमी गति से चल रही एक कार में सोमवार शाम जोरदार विस्फोट होने से 12 लोगों की मौत हो गई और कई वाहन जलकर खाक हो गए।
भारत के प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई ने वरिष्ठ अधिवक्ता शरत एस. जावली और जगदीश चंद्र गुप्ता को श्रद्धांजलि देने के लिए बुलाई गई पूर्ण न्यायालय की बैठक को संबोधित करते समय सोमवार को हुए विस्फोट का विशेष उल्लेख किया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम सभी 10 नवंबर 2025 की शाम को दिल्ली में हुए कार विस्फोट में लोगों की मौत होने से बहुत दुखी हैं। भारत के उच्चतम न्यायालय और देश की संपूर्ण न्यायिक एवं कानूनी बिरादरी की ओर से मैं उन परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस विनाशकारी त्रासदी में अपने प्रियजन को खो दिया है।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय की संवेदनाएं और प्रार्थनाएं सभी पीड़ितों, घायलों और प्रभावितों के साथ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी शब्द इस क्षति से हुई पीड़ा को कम नहीं कर सकता, फिर भी हम आशा करते हैं कि राष्ट्र की सामूहिक करुणा और एकजुटता दुख की इस घड़ी में कुछ सांत्वना प्रदान करेगी।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय शोक संतप्त लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम कानून के शासन को बनाए रखने, न्याय सुनिश्चित करने और प्रत्येक नागरिक की गरिमा की रक्षा करने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुन? पुष्टि करते हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे तथा शोक संतप्त परिवारों और इस अपूरणीय क्षति से शोकाकुल सभी लोगों को साहस और धीरज प्रदान करे।’’



