
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने मशहूर ‘शेफ’ कुणाल कपूर को उनसे अलग रह रही पत्नी को क्रूरता के आधार के आधार पर तलाक देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी है. कपूर को उनकी पत्नी द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी करते हुए न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी ने समझौते की गुंजाइश तलाशने के लिए मामले को उच्चतम न्यायालय के मध्यस्थता केंद्र के पास भेज दिया. उच्च न्यायालय ने कपूर को तलाक की अनुमति देते हुए कहा था कि उनके प्रति महिला का आचरण गरिमा और सहानुभूति से रहित था.
उच्च न्यायालय ने तलाक से इनकार करने के कुटुंब अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली कपूर की अपील को स्वीकार कर लिया था और कहा था कि यह कानून की भलीभांति स्थापित स्थिति है कि सार्वजनिक रूप से जीवनसाथी के खिलाफ लापरवाहीपूर्ण, अपमानजनक और निराधार आरोप लगाना क्रूरता के समान है.
उच्च न्यायालय ने कहा था, ”वर्तमान मामले के उपरोक्त तथ्यों के प्रकाश में, हम पाते हैं कि प्रतिवादी (पत्नी) का अपीलकर्ता (पति) के प्रति आचरण ऐसा रहा है कि वह उसके प्रति गरिमा और सहानुभूति वाला नहीं है.” उन्होंने कहा, ”यदि एक जीवनसाथी का दूसरे के प्रति इस तरह का स्वभाव है तो यह विवाह की मूल भावना का ही निरादर करता है और इस बात का कोई संभावित कारण नहीं है कि उन्हें एक साथ रहते हुए लंबे समय तक यातना सहने के लिए बाध्य क्यों होना चाहिए.” कुणाल की शादी अप्रैल 2008 में हुई थी और उनकी पत्नी ने 2012 में एक बेटे को जन्म दिया था.
टेलीविजन शो ‘मास्टर शेफ’ में जज रहे कपूर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उनकी पत्नी ने कभी उनके माता-पिता का सम्मान नहीं किया और उन्हें भी अपमानित किया. दूसरी तरफ महिला ने उन पर अदालत को गुमराह करने के लिए झूठे आरोप लगाने का दावा किया और कहा कि उन्होंने हमेशा अपने पति से जीवनसाथी की तरह बात की और उनके प्रति वफादार थी. उन्होंने आरोप लगाया कि कुणाल ने उन्हें अंधेरे में रखा और तलाक लेने के लिए फर्जी कहानियां गढ़ीं.



