प्रौद्योगिकी उपवास, ‘टेक-फ्री’ जोन: बच्चों को गैजेट का गुलाम न बनने के लिए प्रधानमंत्री के सुझाव

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 27 Jan 2023 08:23 PM
ऑडियो सुनें

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि आॅनलाइन गेम और सोशल मीडिया के परिणामस्वरूप छात्रों का ध्यान भंग होता है. उन्होंने छात्रों को इस लत से बचने के लिए गैजेट के मुकाबले खुद की बुद्धिमत्ता पर भरोसा करने की सलाह दी. उन्होंने सुझाव दिया कि नियमित अंतराल पर ‘‘प्रौद्योगिकी उपवास’’ और हर घर में ‘‘प्रौद्योगिकी मुक्त क्षेत्र’’ के रूप में एक सीमांकित क्षेत्र से जीवन का आनंद बढ़ेगा और बच्चों को गैजेट की गुलामी के चंगुल से बाहर आने में मदद मिलेगी.

प्रधानमंत्री ने ‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ के छठे संस्करण में छात्रों से संवाद के दौरान ये सुझाव दिए. प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद करते हैं और तनाव तथा परीक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करते हैं. मोबाइल फोन के साथ कम ही दिखने का अपना उदाहरण देते हुए मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी को भी प्रौद्योगिकी से परहेज नहीं करना चाहिए बल्कि अपनी जरूरत के अनुसार खुद को उपयोगिता की चीजों तक सीमित रखना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि पहला फैसला यह तय करना है कि आप स्मार्ट हैं या आपका गैजेट स्मार्ट है.

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘समस्या तब शुरू होती है जब आप गैजेट को अपने से ज्यादा स्मार्ट मानने लगते हैं. किसी की स्मार्टनेस उसे स्मार्ट गैजेट का स्मार्ट तरीके से उपयोग करने और अपने लिए लाभकारी उपकरणों के रूप में व्यवहार करने में सक्षम बनाती है.’’ दीपेश अहिरवार, अदिताभ, कामाक्षी और मनन मित्तल ने आॅनलाइन गेम और सोशल मीडिया की लत और परिणामस्वरूप ध्यान भंग होने के बारे में प्रधानमंत्री से सवाल पूछे थे.

एक अध्ययन का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भारतीय औसतन छह घंटे स्क्रीन पर टाइम व्यतीत करता है. उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में गैजेट हमें गुलाम बनाता है. भगवान ने हमें स्वतंत्र इच्छा और एक स्वतंत्र व्यक्तित्व दिया है और हमें हमेशा अपने गैजेट का गुलाम बनने के बारे में सचेत रहना चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘बहुत सक्रिय होने के बावजूद मुझे मोबाइल फोन के साथ शायद ही कभी देखा जाता है. मैं ऐसी गतिविधियों के लिए एक निश्चित समय रखता हूं. किसी को प्रौद्योगिकी से परहेज नहीं करना चाहिए बल्कि अपनी जरूरत के अनुसार खुद को उपयोगिता की चीजों तक ही उसे सीमित रखना चाहिए.’’

प्रधानमंत्री ने नियमित अंतराल पर ‘‘प्रौद्योगिकी उपवास’’ का सुझाव दिया. उन्होंने हर घर में ‘‘प्रौद्योगिकी मुक्त क्षेत्र’’ के रूप में एक सीमांकित क्षेत्र का भी सुझाव दिया. उन्होंने कहा, ‘‘इससे जीवन का आनंद बढ़ेगा और आप गैजेट की गुलामी के चंगुल से बाहर आ जाएंगे.’’ परीक्षा पे चर्चा में भाग लेने के लिए इस वर्ष रिकॉर्ड 38 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, यह संख्या पिछले साल की तुलना में कम से कम 15 लाख अधिक है. छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ प्रधानमंत्री के इस संवाद कार्यक्रम का पहला संस्करण 16 फरवरी, 2018 को आयोजित किया गया था.

कभी ‘शॉटकर्ट’ ना अपनाएं, नकल से अल्पकालिक फायदा लेकिन दीर्घकालिक नुकसान : मोदी ने छात्रों से कहा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को छात्रों को दिए अपने संदेश में कहा कि वे जीवन में कभी भी ‘‘शॉर्टकट’’ का रास्ता ना अपनाएं. उन्होंने नकल के प्रति भी छात्रों को आगाह किया और कहा कि इससे उन्हें अल्पकालिक लाभ तो हो सकता है लेकिन दीर्घकालिक नुकसान ही होगा.

राजधानी स्थित तालकटोरा स्टेडियम में ‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ वार्षिक संवाद के छठे संस्करण के दौरान छात्रों से संवाद में मोदी ने कहा कि छात्रों को अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करनी चाहिए. प्रधानमंत्री इस संवाद के दौरान छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद करते हैं और तनाव तथा परीक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करते हैं.

उन्­होंने छात्रों द्वारा गैजेट्स के अत्यधिक इस्­तेमाल पर ंिचता व्­यक्­त करते हुए कहा कि छात्रों को अपनी बुद्धिमत्ता पर भरोसा करना चाहिए ना कि अपने मोबाइल फोन पर. उन्­होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी से विचलित न हों. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बातचीत के लिए जब आप मोबाइल फोन का उपयोग करें तो इसके लिए एक अलग समय तय करें.’’ प्रधानमंत्री ने परीक्षाओं में अनुचित प्रथाओं के उपयोग के खिलाफ भी दृढ़ता से बात की और छात्रों को सलाह दी कि वे इस बात पर गर्व न करें कि तनाव से बचने के लिए उनकी परीक्षा कितनी अच्छी रही.

उन्होंने कहा, ‘‘नकल से किसी को एक या दो परीक्षा में तो मदद मिल सकती है लेकिन लंबे समय में जीवन में नहीं. शॉर्टकट कभी न लें. छात्रों की कड़ी मेहनत उन्हें जीवन में आगे बढ़ने में हमेशा मदद करेगी. छात्रों को कई बार उन पर पड़ रहे दबाव का विश्लेषण करना चाहिए ताकि यह देखा जा सके कि कहीं वे अपनी ताकत को कम तो नहीं आंक रहे हैं.’’ मोदी ने कहा कि परिवार के सदस्यों की अपेक्षाएं होना स्वाभाविक है लेकिन अगर वह समाज में दिखावे के लिए ऐसा करते हैं तो गलत है.

उन्होंने कहा कि तनाव के कारणों में से एक यह है कि हमने अपनी परीक्षा में कितना अच्छा प्रदर्शन किया, इस बारे में शेखी बघारने लगते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में माता-पिता बच्चों की बातों पर विश्वास करने लगते हैं और यह बात अपने आसपास के लोगों को बताने लगते हैं. परीक्षा में अपने प्रदर्शन के बारे में गलत धारणा बनाने से बचें.’’ छात्रों द्वारा अपने दायरे का विस्तार करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए, मोदी ने माता-पिता को सलाह दी कि वे अपने बच्चों को कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा के बाद कुछ स्थानों की यात्रा करने के लिए कुछ पैसे दें और उन्हें इसके बारे में लिखने के लिए कहें.

उन्होंने कहा, ‘‘बच्­चों को घर के भीतर बंद नहीं रखना चाहिए और उन्­हें उन गतिव­ििधयों को करने की अनुमति दी जानी चाहिए जो वे समाज में करना चाहते हैं. उन्हें समाज के विभिन्न लोगों से मिलने देना चाहिए. छात्रों को बंधनों में नहीं बांधना चाहिए. उन्हें उनका दायरा बढ़ाने की अनुमति दी जानी चाहिए.’’ प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को सलाह दी कि जो छात्र उनसे सवाल करते हैं, वे उनका स्वागत करें. उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई छात्र प्रश्­न करता है तो इसका अर्थ है वह उत्­सुक है. यह अच्छा संकेत है और शिक्षकों को उनकी उत्­सुकता को बढ़ावा देने की कोशिश करनी चाहिए.’’

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu