तेलंगाना: 17 सीट पर कांग्रेस की जीत, 47 पर बढ़त

तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेजा: बीआरएस नेता रामा राव

हैदराबाद. तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए रविवार को जारी मतगणना में कांग्रेस ने अब तक 17 सीट पर जीत हासिल कर ली है और वह 47 सीट पर बढ़त के साथ राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने के लिए बहुमत प्राप्त करने की ओर बढ़ती प्रतीत हो रही है.

तेलंगाना की शाम पौने सात बजे तक की अद्यतन दलगत स्थिति

हैदराबाद, तीन दिसंबर (भाषा) निर्वाचन आयोग के नवीनतम अपडेट के अनुसार, रविवार शाम पौने सात बजे तक तेलंगाना विधानसभा चुनाव में दलीय स्थिति इस प्रकार है:
पार्टी बढ़त जीत कुल
कांग्रेस 17 47 64
बीआरएस 15 24 39
भाजपा 01 07 08
एआईएमआईएम 05 02 07
भाकपा 00 01 01

तेलंगाना के लोगों की अकांक्षाएं पूरी करेंगे: रेवंत रेड्डी

तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तय नजर आ रही जीत के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने अपने दल की प्रमुख नेता सोनिया गांधी और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का आभार जताते हुए रविवार को कहा कि सरकार गठित करने के बाद उनकी पार्टी तेलंगाना के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस की जीत ‘तेलंगाना के शहीदों’ को सर्मिपत है.

रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ ने राज्य में पार्टी को मजबूती प्रदान की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा दी गई ‘छह गारंटी’ और राहुल गांधी तथा पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा किए गए अन्य वादों को भी पार्टी पूरा करेगी. रेड्डी ने कांग्रेस पार्टी की जीत पर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव की शुभकामनाओं का स्वागत किया और कहा कि वह लोगों को सुशासन देने में बीआरएस के सहयोग की उम्मीद करते हैं.

उन्होंने कहा, ”यह लोगों का जनादेश है. हमें पोस्टमॉर्टम करने की जरूरत नहीं है. सब कुछ ठीक रहता है, तभी आपको वह जादुई नंबर मिलेगा. सीधी बात यह है कि वे (लोग) बदलाव चाहते थे. वे केसीआर (के. चंद्रशेखर राव) को हराना चाहते थ. उन्होंने केसीआर को हरा दिया है. बस इतना ही.” रेड्डी ने कहा कि लोगों ने विपक्ष की भूमिका तय कर दी है और कांग्रेस जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बीआरएस के सहयोग की उम्मीद करती है.

उन्होंने कहा, ”हम उम्मीद करते हैं कि लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने के लिए बीआरएस आगे आएगी.” मुख्यमंत्री पद के प्रबल उम्मीदवार माने जा रहे रेड्डी ने चुनाव में कांग्रेस के सहयोगियों, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और तेलंगाना जन समिति को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास प्रगति भवन का नाम बदलकर ‘प्रजा भवन’ कर दिया जाएगा. निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना में कांग्रेस 49 सीट जीत चुकी है, जबकि 15 सीट पर आगे है. वहीं, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) 26 सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है, जबकि 13 सीट पर उसे बढ़त हासिल है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सात सीट जीत चुकी है और एक सीट पर आगे है.

सत्ताविरोधी लहर और मतदाताओं का मन बदल जाने के कारण बीआरएस को मुंह की खानी पड़ी

तेलंगाना में सत्ताविरोधी लहर, केसीआर परिवार से मतदाताओं का मोहभंग, युवाओं में उपजे असंतोष जैसे कारकों की वजह से प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को मुंह की खानी पड़ी. मतगणना में प्राप्त रुझानों और परिणामों में बीआरएस बुरी तरह पिछड़ गयी है.

बीआरएस प्रमुख एवं मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की छवि, पार्टी के विस्तृत जमीनी नेटवर्क तथा कल्याणकारी कार्यक्रमों के बावजूद उसके नेताओं के आसानी से नहीं मिल पाने की धारणा ने सत्ताविरोधी भावनाओं को बढ़ाया. उसपर भी तुर्रा यह रहा कि विपक्ष ने लोगों के सामने पेश किया कि राज्य में बीआरएस परिवार का शासन है. इस बात ने भी सत्ताविरोधी भावना को काफी बढ़ाया. इस चुनाव में अधिकतर मौजूदा विधायकों को फिर से उतारने का पार्टी भी फैसला भी उसे वांछित परिणाम नहीं दे पाया.

सन् 2014 में तेलंगाना के गठन के समय से बीआरएस का राज्य की राजनीति पर दबदबा रहा. उससे पहले भी 2001 से अविभाजित आंध्र प्रदेश में उसकी अच्छी खासी उपस्थिति थी. वैसे तो बीआरएस सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं लेकर आयी लेकिन गरीबों के लिए मकान, नौकरी के पर्याप्त अवसर सृजित करने, बेरोजगारी राहत देने, किसान ऋण माफी के क्रियान्वयन में देरी समेत अहम चुनाव वादों को पूरा करने में उसकी कथित विफलता तथा भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने जैसी घटनाएं उसके खिलाफ चली गयीं.

प्रारंभ में भाजपा को बीआरएस के लिए बड़ी चुनौती समझा गया लेकिन मई में कर्नाटक चुनाव के बाद कांग्रेस आगे बढ़ गयी और परिदृश्य बदल गया. खासकर दिल्ली की आबकारी नीति मामले में बीआरएस और भाजपा के बीच गुचचुप समझौते के आरोपों ने भाजपा को कमजोर किया तथा सत्ताविरोधी वोट कांग्रेस के पक्ष में एकजुट हो गये. इस आबकारी नीति मामले में मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी कविता कथित रूप से शामिल हैं. पिछले चुनावों के विपरीत इस बार भावनात्मक मुद्दों का चुनाव में खास असर नजर नहीं आया. पिछले चुनावों में पृथक राज्य गठन की भावना ने अहम भूमिका निभायी थी.

सन् 2018 के चुनाव में कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने गठजोड़ किया था तथा बीआरएस ने तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू पर तेलंगाना विरोधी होने का आरोप लगाया था. लेकिन इस बार, आंध्र प्रदेश में चल रहे कानूनी मामलों और नायडू के जेल में रहने के कारण तेदेपा ने तेलंगाना में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया.

इसी तरह, अविभाजित आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वाई एस राजशेखर रेड्डी की बेटी वाई एस र्शिमला की अगुवाई वाली वाईएसआर तेलंगाना पार्टी भी तेलंगाना के चुनावी मुकाबले से हट गयी और उसने कांग्रेस के प्रति समर्थन की घोषणा की. कांग्रेस ने भी एक जबर्दस्त अभियान चलाया जो बदलाव पर केंद्रित था. इस अभियान में ‘मारपू कवली – कांग्रेस रवली (बदलाव होना चाहिए, कांग्रेस को आना चाहिए) मुख्य नारा था और मतदाताओं को यह बड़ा रास आया.

तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेजा: बीआरएस नेता रामा राव

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के मद्देनजर राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन को अपना इस्तीफा भेज दिया है. भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नतीजे वैसे नहीं रहे, जैसे उनकी पार्टी चाहती थी, लेकिन बीआरएस लगातार दो बार सेवा करने का मौका देने के लिए लोगों की आभारी है.

रामा राव ने यहां पत्रकारों से कहा, ”लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत, हमारे मुख्यमंत्री ने पहले ही राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेज दिया है. मुझे लगता है कि तय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा.” उन्होंने कहा कि बीआरएस केसीआर के नेतृत्व में तेलंगाना के लोगों की बेहतरी के लिए प्रयास करना जारी रखेगी. जीत के लिए कांग्रेस को बधाई देते हुए बीआरएस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी नई सरकार को पूरा सहयोग देगी. उन्होंने कहा कि बीआरएस रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी.

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