पद्मश्री कमला पुजारी को अस्पताल में नाचने पर मजबूर करने वाली कार्यकर्ता बयान दर्ज कराने नहीं पहुंची

कोरापुट. पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित आदिवासी बुजुर्ग कमला पुजारी को बीमारी की हालत में अस्पताल के भीतर कथित तौर पर नाचने के लिए मजबूर करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता कोरापुट जिले में जेयपुर के उप जिलाधिकारी के सामने बयान दर्ज कराने नहीं पहुंची.

एक अधिकारी ने बताया कि आरोपी ममता बेहेरा ने इसकी बजाय नोटिस के जवाब में एक लिखित प्रतिक्रिया सौंपी है. बेहेरा ने अस्पताल से पुजारी की छुट्टी से पहले उन्हें कथित तौर पर नाचने के लिए मजबूर किया था और इस मामले में उप जिलाधिकारी ने कार्यकर्ता को नोटिस जारी किया था.

अपने जवाब में बेहेरा ने क्या लिखा, यह ज्ञात नहीं है. इसी प्रकार का एक नोटिस पुजारी के परिचारक राजीव हिलाल को भी भेजा गया था. अधिकारी के सामने पेश होकर हिलाल ने कहा कि पूरे प्रकरण में उनकी कोई भूमिका नहीं है. घटना 29 अगस्त को हुई थी और उसका एक कथित वीडियो सामने आने के बाद मामले का खुलासा हुआ. सोशल मीडिया पर आए इस वीडियो में एक सरकारी अस्पताल के आईसीयू में 70 वर्षीय महिला डांस करते हुए दिख रही है.

बेहेरा भी उनके साथ नाचती हुई दिख रही हैं. गौरतलब है कि पुजारी को किडनी की समस्या होने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था. पीटीआई-भाषा स्वतंत्र रूप से वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता. पुजारी ने बाद में कोरापुट जिले में टीवी चैनलों से कहा था कि वह थकी हुई थीं और डांस नहीं करना चाहती थीं लेकिन बेहेरा ने उन्हें मजबूर किया. कोरापुट की रहने वाली पुजारी को आॅर्गेनिक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.

इस बीच अस्पताल ने भी इस मामले की जांच की और पाया कि उसके कर्मचारी डॉक्टर या नर्स इस घटना में शामिल नहीं थे. वीडियो वायरल होने से पहले तक उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी. चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर जयंत पांडा की अध्यक्षता वाली अस्पताल की जांच समिति ने पाया कि पुजारी को एक विशेष केबिन में रखा गया था. रिपोर्ट में कहा गया कि बेहेरा ने खुद को पुजारी की दोस्त बताया था इसलिए उसे प्रवेश की अनुमति दी गई थी. वहीं, पुजारी का कहना है कि वह बेहेरा को नहीं जानतीं.

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