बल्लेबाजों के स्वर्ग” से “बल्लेबाजों की कब्रगाह” बने पिच पर फूटा दर्शकों का गुस्सा

आईसीसी ने इंदौर पिच को ‘खराब’ करार दिया, तीन डिमैरिट अंक मिले

इंदौर. बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी स्पर्धा के तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन शुक्रवार को मेजबान भारत की ऑस्ट्रेलिया से नौ विकेट से करारी हार से नाखुश भारतीय दर्शकों ने इंदौर के होलकर स्टेडियम के पिच पर जमकर भड़ास निकाली. गौरतलब है कि होलकर स्टेडियम के मैदान को “बल्लेबाजों का स्वर्ग” कहा जाता है, लेकिन इस टेस्ट मैच में इसके पिच पर फिरकी गेंदबाजों ने इस तरह धड़ाधड़ विकेट गिराए कि यह “बल्लेबाजों की कब्रगाह” साबित हुआ.

गहरी निराशा के साथ स्टेडियम से बाहर निकले दर्शक केके राय ने “पीटीआई-भाषा” से कहा,”मैच का नतीजा टेस्ट क्रिकेट के लिए कतई अच्छा नहीं है जो खेल का शास्त्रीय प्रारूप है. अगर ऐसे ही नतीजे आते रहे, तो एक दिन दर्शकों के बीच टेस्ट क्रिकेट की अहमियत खत्म हो जाएगी.” उन्होंने कहा,”भारत में इन दिनों टेस्ट मैच में केवल फिरकी गेंदबाजों को मदद करने वाले पिच बनाए जा रहे हैं. यह सही नहीं है.”

भारत की करारी हार के बाद स्टेडियम से बाहर निकले दर्शक हरिओम आंजना ने मैच का टिकट फाड़कर विरोध जताया. उन्होंने कहा,”मैं एक विद्यार्थी हूं और मैंने 350 रुपये खर्च कर यह टिकट लिया था. मैंने सोचा था कि भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी, लेकिन मेरी यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी.” बुजुर्ग दर्शक सतीश बब्बर ने कहा,”भारत में खेले जा रहे टेस्ट मैचों में केवल फिरकी गेंदबाजों को मदद करने वाली पिच बनाई जा रही है, जबकि टी20 क्रिकेट शुरू होने के बाद ज्यादातर दर्शक टेस्ट मैचों में भी चौके-छक्कों वाली बल्लेबाजी देखने की हसरत लिए स्टेडियम पहुंचते हैं. आयोजकों को यह बात समझनी चाहिए.”

लकर स्टेडियम से बाहर निकलीं शिवानी जैन ने कहा,”टेस्ट मैच के लिए ऐसा पिच नहीं बनाया जाना चाहिए जिससे केवल फिरकी गेंदबाजों को फायदा मिले. बीसीसीआई को इस मामले में उचित कदम उठाने चाहिए.” कई दर्शकों ने टेस्ट मैच के पूरे पांच दिन नहीं चल पाने पर यह कहते हुए निराशा का इजहार किया कि इससे उनके टिकट की रकम वसूल नहीं हो सकी. दर्शकों में शामिल सौरभ ने टेस्ट मैच के तीसरे ही दिन खत्म होने के लिए पिच को जिम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा,”होलकर स्टेडियम के पुराने इतिहास को देखते हुए हमें उम्मीद थी कि इसका पिच बल्लेबाजों के लिए वरदान साबित होगा, लेकिन इसने केवल फिरकी गेंदबाजों की मदद की जिससे मैच तीसरे ही दिन खत्म हो गया.”

आईसीसी ने इंदौर पिच को ‘खराब’ करार दिया, तीन डिमैरिट अंक मिले

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बॉर्डर गावस्कर ट्राफी टेस्ट मैच के लिये इस्तेमाल की गयी होलकर स्टेडियम की पिच को ‘खराब’ करार दिया जिसमें आस्ट्रेलिया ने भारत को तीसरे दिन नौ विकेट से शिकस्त दी. इस खराब रेंिटग से इंदौर को तीन डिमैरिट अंक भी मिले और ये अंक पांच साल के लिये सक्रिय रहेंगे.

भारतीय टीम दोनों पारियों में 109 और 163 रन के स्कोर पर सिमट गयी थी जबकि आस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 197 रन बनाये और फिर तीसरे दिन सुबह उसने 76 रन के लक्ष्य का पीछा कर जीत हासिल की. आईसीसी द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘आईसीसी मैच रैफरी क्रिस ब्रॉड ने अपनी रिपोर्ट आईसीसी को सौंप दी जिसमें उन्होंने मैच अधिकारियों और दोनों टीमों के कप्तानों से बात करने के बाद उनकी ंिचतायें व्यक्त कीं. इस आकलन के बाद स्थल को तीन डिमैरिट अंक दिये गये. ’’ इस रिपोर्ट को बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) को भेज दिया गया है जिसके पास इसके खिलाफ अपील करने के लिये 14 दिन का समय है.

ब्रॉड ने कहा, ‘‘पिच बहुत सूखी थी, इसने बल्ले और गेंद के बीच कोई संतुलन नहीं मुहैया कराया और इस पर शुरू से ही स्पिनरों को मदद मिल रही थी. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैच की पांचवीं गेंद पिच की सतह से टूट गयी और इसने कभी कभार पिच की सतह को भी तोड़ना जारी रखा जिस पर जरा भी या कोई भी ‘सीम मूवमेंट’ नहीं मिल रहा था और पूरे मैच के दौरान अत्यधिक और असमान उछाल रहा. ’’ भारत ने पहले ही सत्र में सात विकेट गंवा दिये थे क्योंकि गेंद शुरूआती आधे घंटे के दौरान ‘स्क्वायर टर्न’ ले रही थी.

हम भारत में पिचों को लेकर काफी बात करते है, जब नतीजे मिल रहे है तो इसमें बदलाव क्यों करें: रोहित
रोहित शर्मा ने भारत में स्पिनरों की मददगार पिचों की वकालत करते हुए कहा कि ऐसी पिच टीम की ताकत है और संघर्ष कर रहे बल्लेबाजों को इस पर रन बनाने का तरीका ढूंढना होगा. होल्कर स्टेडियम में तीसरे दिन के पहले सत्र में ऑस्ट्रेलिया से नौ विकेट की करारी शिकस्त झेलने के बाद रोहित ने कहा कि नौ मार्च से अहमदाबाद में अंतिम टेस्ट में टीम स्पिनरों की मददगार पिच पर खेलना चाहेगी. रोहित ने तर्क दिया कि उनकी टीम ने ऐसी पिचों पर लगातार 15 श्रृंखला में जीत दर्ज की है.

उन्होंने कहा, ‘‘ हम आमतौर पर श्रृंखला से पहले तय करते हैं कि किस तरह की पिचों पर खेलना चाहेंगे. ऐसी पिचों पर खेलना हमारा फैसला था. मुझे नहीं लगता कि हम बल्लेबाजों पर दबाव बना रहे हैं. जब हम जीतते हैं तो सब अच्छा लगता है. हमसे हमारी बल्लेबाजी के बारे में नहीं पूछा जाता.’’ भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘जब हम हारते हैं तो इस बारे में बात की जाती है. हमने इस तरह की पिचों पर खेलने का फैसला किया है, और हम जानते हैं कि हमें चुनौती दी जा सकती है, लेकिन हम इसके लिए तैयार हैं.’’

रोहित ने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो पिच को लेकर बहुत ज्यादा बात हो रही है. जब हम भारत में खेलते हैं तो ध्यान केवल पिच पर होता है. मुझे नहीं लगता कि यह आवश्यक है.’’ इससे पहले नागपुर और दिल्ली की पिच ने भी काफी ध्यान आर्किषत किया था. लेकिन इंदौर की पिच पर गेंद खेल की शुरूआत से ही काफी अधिक टर्न कर रही थी. दिलीप वेंगसरकर, मैथ्यू हेडन और मार्क वॉ उन पूर्व क्रिकेटरों में से है जिन्होंने कहा था कि पिच टेस्ट क्रिकेट के लिए यह अच्छा नहीं है. लगातार तीसरी बार मैच तीन दिन के अंदर खत्म हुआ.

भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘ मुझे नहीं लगता कि पूर्व क्रिकेटरों ने इस तरह की पिचों पर खेला हैं. इस तरह की पिचों पर हम खेलना चाहते हैं. यह हमारी ताकत है. इसलिए जब आप घर में खेल रहे हों तो आप हमेशा अपनी ताकत से खेलते हैं और इस बात की ंिचता नहीं करते कि लोग किस बारे में बात कर रहे हैं.’’ रोहित ने कहा, ‘‘हमारी ताकत स्पिन गेंदबाजी और बल्लेबाजी की गहराई है. जब हम विदेश यात्रा करते हैं तो अन्य टीमें अपनी घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाती है.’’ पूर्व खिलाड़ियों ने यह भी तर्क दिया है कि टेस्ट मैचों का पांच दिनों तक नहीं चलना इस खेल के लिए अच्छा नहीं है.

मैच जल्दी खत्म होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसके बारे में क्या कह सकता हूं. मैच को पंच दिनों तक चलने के लिए खिलाड़ियों को अच्छा खेलना होगा. भारत के बाहर भी मैच पांच दिनों तक नहीं चलता हैं. कल दक्षिण अफ्रीका में तीन दिनों में खेल समाप्त हो गया. यह कौशल के बारे में है. लोगों को कौशल के अनुकूल होना होगा. अगर पिच गेंदबाजों की मदद कर रही हैं, तो बल्लेबाजों को अपना कोशल दिखाना होगा.’’

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