न्यायालय ने मोरबी हादसे में गुजरात उच्च न्यायालय से समय-समय पर जांच पर निगरानी को कहा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 21 Nov 2022 10:20 PM
न्यायालय ने मोरबी हादसे में गुजरात उच्च न्यायालय से समय-समय पर जांच पर निगरानी को कहा
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने गुजरात में घटे मोरबी पुल हादसे को ‘बड़ी त्रासदी’ करार देते हुए सोमवार को गुजरात उच्च न्यायालय से इस मामले में जांच और पुनर्वास तथा पीड़ितों को ‘सम्मानजनक’ मुआवजा दिलाने समेत अन्य पहलुओं की समय-समय पर निगरानी करने को कहा. इस हादसे में 141 लोगों की जान चली गई थी.

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने इन दलीलों को भी खारिज कर दिया कि मोरबी जैसे हादसे फिर नहीं हों, इसके लिए एक जांच आयोग गठित किया जाना चाहिए. उसने कहा, ‘‘कई बार, आयोग मामले को केवल ठंडे बस्ते में डाल देता है. कई बार, न्यायाधीशों के लिए कार्यवाही को संभालना सही होता है. हमने इसे खुद किया होता, लेकिन अब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इसे देख रहे हैं.’’

पीठ ने एक सुनवाई में मौखिक रूप से कहा, ‘‘यह बड़ी त्रासदी है और ठेका दिये जाने, जिस कंपनी को अनुबंध दिया गया है उसके बारे में जानकारी, दोषियों की जिम्मेदारी तय करने आदि को देखने के लिए साप्ताहिक निगरानी जरूरी होगी. उच्च न्यायालय ने जिम्मेदारी संभाल ली है, अन्यथा हम नोटिस जारी करते.’’ पीठ ने यह भी कहा कि वह उच्च न्यायालय से समय-समय पर सुनवाई करने का आग्रह करेगी.

शीर्ष अदालत ने घटना की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका समेत कुछ अर्जियों पर विचार करने से मना करते हुए कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पहले ही हादसे का स्वत: संज्ञान लिया है और उन्होंने अनेक आदेश पारित किये हैं.

हालांकि, उसने याचिकाकर्ता विशाल तिवारी और अन्य वादी चवागदा दिलीपभाई को अपनी अर्जी के साथ उच्च न्यायालय में जाने और स्वतंत्र जांच तथा अपने परिजनों को खोने वाले लोगों को सम्माजनक मुआवजा दिलाने का अनुरोध करने की अनुमति दी. दिलीप के भाई और भाभी की पुल हादसे में मृत्यु हो गयी थी. शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता उसके पास बाद में आ सकते हैं.

न्यायालय ने कहा, ‘‘मोरबी पुल हादसे में 47 बच्चों समेत 141 लोगों की मौत हो गई. मामले के कई पहलुओं पर राज्य तथा नगरपालिका के अधिकारियों के समय-समय पर जवाब की जरूरत होगी, ताकि अदालत को पुल हादसे और उसके बाद राहत, पुनर्वास तथा मुआवजे से संबंधित घटनाक्रम पर जानकारी मिल सके.’’ मोरबी में मच्छु नदी पर बना ब्रिटिश काल का पुल 30 अक्टूबर को ढह गया था, जिसमें 47 बच्चों सहित 141 लोगों की मौत हो गई थी.

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