न्यायालय ने अमृतपाल सिंह की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कट्टरपंथी उपदेशक और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सिंह से कहा कि वह अपनी याचिका पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर करें. शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से छह सप्ताह के भीतर उनकी याचिका पर निर्णय लेने को कहा.

‘वारिस पंजाब दे’ संगठन का प्रमुख सिंह वर्तमान में रासुका के तहत नौ सहयोगियों के साथ असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है.
सुनवाई के दौरान, सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील दी कि उनके मुवक्किल दो साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और यह पूरी हिरासत एक प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है.
उच्चतम न्यायालय ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू से कहा कि वह सिंह की याचिका पर विचार नहीं कर रहा है, बल्कि उन्हें उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दे रहा है.

राजू ने कहा कि उच्च न्यायालय को आठ सप्ताह का समय दिया जा सकता है लेकिन शीर्ष अदालत ने कहा कि वह सिंह की याचिका पर निर्णय लेने के लिए केवल छह सप्ताह का समय देगी. एनएसए केंद्र और राज्यों को व्यक्तियों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है जिनके “भारत की रक्षा के प्रतिकूल” गतिविधियों में शामिल होने का अंदेशा होता है.

सिंह ने 2024 का लोकसभा चुनाव पंजाब के तरनतारन जिले के खडूर साहिब से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को 1,97,120 मतों से हराया था. खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले की छवि का अनुसरण करने वाले सिंह को एक महीने से अधिक समय तक चली तलाशी के बाद 23 अप्रैल, 2023 को पंजाब के मोगा के रोडे गांव से गिरफ्तार किया गया था.

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