फिल्म ‘दिल्ली डार्क’ समाज में बाहरी लोगों की स्वीकार्यता की कहानी है : निर्माता दिबाकर दास

मुंबई. फिल्म निर्माता दिबाकर दास रॉय ने कहा है कि उनके निर्देशन वाली पहली फिल्म ‘दिल्ली डार्क’ को बनाने का उद्देश्य उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करना है जो आज समाज में बाहरी व्यक्ति की तरह महसूस करते हैं. इस फिल्म की कहानी माइकल ओकेके नाम के एक नाइजीरियाई छात्र के ईद-गिर्द घूमती है, जो राष्ट्रीय राजधानी में अफ्रीकी समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह से लड़ता है. छात्र का किरदार नाइजीरियाई अभिनेता सैमुअल अबियोला रॉबिन्सन ने निभाया है.

फिल्म निर्देशक ने कहा कि वह इस फिल्म के माध्यम से स्वीकार्यता का संदेश देना चाहते हैं. रॉय ने पीटीआई-भाषा से कहा कि फिल्म के पीछे का उद्देश्य सिर्फ दिल्ली में अफ्रीकियों के बारे में बात करना नहीं है. इसका उद्देश्य उन लोगों के बारे में बात करना है जो आज समाज में खुद को बाहरी व्यक्ति की तरह महसूस करता है. ऐसा भारत, अमेरिका या किसी अन्य जगह पर हो सकता है.

‘दिल्ली डार्क’ का हाल ही में जियो मामी मुंबई फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर किया गया था. नस्लवाद पर व्यंग्यात्मक रूप से बनाई गई यह फिल्म 14 नवंबर को 27वें टालिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल में भी प्रर्दिशत की जाएगी. फिल्म में गीतिका विद्या ओहल्याण, शांतनु अनम और स्तुति घोष भी नजर आएंगी. फिल्म का निर्माण ‘रिलिजन फिल्म्स’ के बैनर तले दिबाकर दास रॉय और उदयन दास रॉय ने किया है.

 

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