भारत के साथ फिर संघर्ष शुरू होने की आशंका बहुत कम : पाक विदेश मंत्री

पाकिस्तान समस्या का समाधान सेना नहीं, समग्र दृष्टिकोण है: पूर्व उच्चायुक्त राघवन

इस्लामाबाद/नयी दिल्ली. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बुधवार को कहा कि नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच फिर से सैन्य संघर्ष शुरू होने की आशंका बहुत कम है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ऐसी किसी भी स्थिति (सैन्य संघर्ष) में मुंहतोड़ जवाब देगा.

डार ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की. इस संवाददाता सम्मेलन का आयोजन मीडिया को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तुर्किये, ईरान, अजरबैजान और ताजिकिस्तान की हालिया यात्रा का विवरण देने तथा पहलगाम हमले के बाद भारत के साथ संघर्ष में सहयोग देने के लिए संबंधित देशों के नेतृत्व का आभार जताने के वास्ते किया गया था. भारत के साथ नये सिरे से संघर्ष छिड़ने की आशंकाओं के बारे में पूछे जाने पर डार ने कहा कि वह भविष्य का अंदाजा तो नहीं लगा सकते, लेकिन ऐसी किसी भी स्थिति की संभावना बहुत कम है.

मंत्री ने कहा, “संघर्ष-विराम बरकरार है और दोनों पक्षों ने सैनिकों की वापसी से जुड़े सभी कदमों पर अक्षरश? अमल किया है. लिहाजा, मेरी राय में (नये सिरे से संघर्ष होने की) कोई आशंका नहीं है.” उन्होंने हालांकि कहा, “अगर भारत सैन्य संघर्ष का सहारा लेता है, तो हम उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे.” डार ने कहा कि पाकिस्तान, भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए बेताब नहीं है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक समग्र वार्ता चाहता है, जिसमें आतंकवाद के साथ-साथ सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) सहित अन्य मुद्दे भी शामिल हों.

डार ने दावा किया कि आईडब्ल्यूटी को स्थगित नहीं किया जा सकता. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने सहित अन्य कदमों की घोषणा की थी. भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद को सुलझाने तथा सिंधु बेसिन की छह मुख्य नदियों के पानी को साझा करने के लिए 1960 में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे.

डार ने पहलगाम हमले की निष्पक्ष जांच की पेशकश दोहराई, जिसके कारण पाकिस्तान और भारत के बीच हाल ही में सैन्य संघर्ष हुआ था. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को सराहा गया और उसके कूटनीतिक प्रयासों की भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तारीफ की गई. मंत्री ने संघर्ष के दौरान और शांति बहाल करने में अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, ईरान तथा अन्य देशों की ओर से निभाई गई भूमिका की भी सराहना की.

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री शरीफ भारत के साथ तनाव के दौरान सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए सऊदी नेतृत्व का आभार जताने के वास्ते अगले 24 घंटे में सऊदी अरब की यात्रा करेंगे. शरीफ की चार देशों की हालिया यात्रा का जिक्र करते हुए डार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत के साथ संघर्ष के दौरान तुर्किये, ईरान, अजरबैजान और ताजिकिस्तान की ओर से जताई गई एकजुटता के लिए आभार व्यक्त करने के वास्ते इन देशों की यात्रा की. डार ने पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व में किए गए कूटनीतिक प्रयासों की भी तारीफ की. उन्होंने कहा, “इन प्रयासों को उनकी स्पष्टता के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा हासिल हुई.”

पाकिस्तान समस्या का समाधान सेना नहीं, समग्र दृष्टिकोण है: पूर्व उच्चायुक्त राघवन

पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रह चुके टी सी ए राघवन ने दोनों देशों के बीच तनाव के मद्देनजर कहा कि इस समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं है तथा इसके लिए एक अधिक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें कूटनीतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक साधनों सहित भारत की पूरी ताकत का लाभ उठाया जा सके. राघवन ने मंगलवार को ‘इंडिया हैबिटेट सेंटर’ में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मद्देनजर भारत-पाकिस्तान संबंध’ विषय पर अपने विचार रखते समय इस बात पर जोर दिया कि भारत का वास्तविक प्रभाव उसकी आर्थिक जीवंतता, सामाजिक बहुलवाद, संस्थागत लचीलेपन और सांस्कृतिक पहुंच में निहित है, न कि केवल उसकी सैन्य शक्ति में.

पाकिस्तान में सात साल तक सेवा देने वाले पूर्व राजनयिक ने कहा कि दरअसल पाकिस्तानी सेना भारत की सैन्य शक्ति से खतरा महसूस नहीं करती, बल्कि वह ”उसके सामने खड़ा होना चाहती है”. उन्होंने कहा, ”पाकिस्तानियों को आपकी सेना की चिंता नहीं है, बल्कि एक राष्ट्र के रूप में आपकी समग्र प्रगति – आपकी आर्थिक वृद्धि, आपकी सामाजिक प्रगति, आपके समाज की बहुलता और आपकी संस्थाओं की ताकत उसकी चिंता है. यही वह चीज है जिससे वे वास्तव में डरते हैं… कोई सैन्य समाधान नहीं है, आपको अपनी पूरी ताकत लगानी होगी.”

राघवन ने कहा, ”वास्तविक अर्थों में आपकी ताकत बहुत बड़ी है…. वास्तव में आपका सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से आधिपत्य पाकिस्तान की चिंता है. इसलिए अगर हम पूरी तरह से सुरक्षा आधारित संबंध की ओर बढ़ते हैं तो यह सब एक तरफ रह जाएगा. आपको पाकिस्तान से केवल दो, तीन या पांच साल के लिए ही नहीं, बल्कि बहुत लंबे समय के लिए निपटना है तथा यह देखते हुए आपको अधिक व्यापक दृष्टिकोण की जरूरत है.” पूर्व राजनयिक ने इस बात को रेखांकित किया कि पाकिस्तान के साथ स्थिति महज एक ”सामरिक या सैन्य मुद्दा” नहीं है.

राघवन (69) ने जोर देकर कहा कि आज मुख्य चुनौती यह है कि ”एक कार्यशील द्विपक्षीय संबंध की अनुपस्थिति में उस पड़ोसी के साथ अस्थिर एवं टकराव वाली स्थिति का प्रबंधन कैसे किया जाए जिससे निपटना मुश्किल है.” उन्होंने कहा कि ये संबंध 2017-18 से ”उत्तरोत्तर खोखले” हो रहे हैं. राघवन ने कहा कि सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को स्थगित करने का हालिया निर्णय दर्शाता है कि मेज पर कितने कम राजनयिक विकल्प बचे हैं.

उन्होंने कहा, ”इस बार, एक तरह से आपके पास आईडब्ल्यूटी को स्थगित करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था. बाकी जो कुछ भी किया जा सकता था, वह पहले ही किया जा चुका है. रिश्ते का कोई और ऐसा आधार नहीं था जिसे आप पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिबंध के तौर पर इस्तेमाल कर सकते थे. अलमारी खाली है.” भारत के ”बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते” के रुख का जिक्र करते हुए राघवन ने कहा कि हालांकि यह सिद्धांत वैध है, लेकिन इसका कठोर इस्तेमाल कूटनीतिक लचीलेपन को सीमित कर सकता है.

उन्होंने कहा, ” ‘बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते’ का वास्तव में यही मतलब है लेकिन इस प्रक्रिया में आप व्यवहार के विभिन्न पहलुओं के बीच अंतर करने की क्षमता खो रहे हैं.” राघवन ने ऐसी अधिक संतुलित नीति की वकालत की, जिसके तहत ”आपको पड़ोसियों के साथ वैसे ही व्यवहार करना होगा जैसे वे हैं, न कि जैसा आप चाहते हैं कि वे हों.”

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