नयी दिल्ली/बेंगलुरू. कांग्रेस ने शनिवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई पर दिवाली के मौके पर कई पत्रकारों को ‘घूस देने के प्रयास’ का आरोप लगाया और कहा कि बोम्मई के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होना चाहिए. पार्टी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को बर्खास्त किया जाना चाहिए.
उधर, मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि बोम्मई ने कहा है कि वह इससे अनभिज्ञ हैं कि पत्रकारों को ‘नकदी’ दी गई. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर ट्वीट किया, ‘‘ चुनाव के पहले – न खाऊंगा, न खाने दूंगा. चुनाव के बाद – ‘40 प्रतिशत कमीशन’ खाऊंगा, फिर दिवाली पर मिठाई के डब्बों में कर्नाटक मीडिया को रिश्वत भिजवाऊंगा.’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ ‘पे-सीएम’ और ‘पे-पीएम’ की भाजपा सरकार, पूरे देश में ‘डबल इंजन’ का भ्रष्टाचार.’’ कांग्रेस ने कुछ महीनों से कर्नाटक में बोम्मई सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर ‘पे-सीएम’ अभियान चला रखा है.
पार्टी के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘कर्नाटक में ‘घूस घोटाला’ सामने आया है. इसमें खुद मुख्यमंत्री बोम्मई शामिल हैं. दीपावली के अवसर पर राज्य के पत्रकारों को एक-एक लाख रुपये की नकदी राशि भेजी गई. कुछ पत्रकारों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई.’’ उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री रिश्वतखोरी में शामिल हैं तो राज्य की रक्षा कौन करेगा.
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कर्नाटक की सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकार है. उसने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. हर ठेके में 40 फीसदी का कमीशन देना पड़ता है. सरकारी नियुक्तियां पैसे लेकर की जाती हैं.’’ सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से सवाल किया, ‘‘ क्या श्रीमान बोम्मई जवाब देंगे- 1. क्या यह मुख्यमंत्री द्वारा “रिश्वत” नहीं है? 2. एक लाख रुपये का स्रोत क्या है? क्या यह सरकारी खजाने का पैसा है या मुख्यमंत्री ने खुद दिया है? 3. क्या ईडी या आयकर विभाग इसका संज्ञान लेगा?’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी मांग है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया जाए और उन्हें जेल भेजा जाए. उन्हें पद से बर्खास्त किया जाए.’’ कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की और इसे मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से पत्रकारों को ‘स्वीट बॉक्स ब्राइब’ यानी ‘‘मिठाई के डिब्बे में रिश्वत करार दिया.’’ पार्टी ने कहा, ‘‘राज्य के लोगों को पता होना चाहिए कि कितना पैसा रिश्वत के तौर पर दिया गया है और कितना पैसा प्राप्त किया गया है और कितना लौटाया गया.’’