सत्ता बंटवारे को लेकर शिवकुमार के साथ नहीं हुआ कोई समझौता, आलाकमान का निर्णय मानूंगा: सिद्धरमैया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 04 Dec 2024 08:25 PM
सत्ता बंटवारे को लेकर शिवकुमार के साथ नहीं हुआ कोई समझौता, आलाकमान का निर्णय मानूंगा: सिद्धरमैया

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मांड्या. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बुधवार को कहा कि राज्य में कांग्रेस के सरकार में आने से पहले उनके और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के बीच सत्ता के बंटवारे को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ था और वह पार्टी आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे.
सिद्धरमैया की टिप्पणी पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो कुछ कहा है, वही अंतिम है. सिद्धरमैया ने मीडिया से कहा, ”कोई समझौता नहीं हुआ. मैं आलाकमान के फैसले का पालन करूंगा.” उनसे शिवकुमार के इस कथित बयान के बारे में पूछा गया था कि (राज्य में कांग्रेस के) सत्ता में आने से पहले उन दोनों के बीच समझौता हुआ था.

पिछले साल मई में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली थी. कांग्रेस पार्टी शिवकुमार को मनाने में कामयाब रही थी और उसने उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया था.
तब ऐसी कुछ खबरें सामने आयी थीं कि ‘बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनाने के ‘फार्मूले’ पर सहमति बनी थी जिसके अनुसार शिवकुमार ढाई साल बाद मुख्यमंत्री बनेंगे. लेकिन इन खबरों की पार्टी ने आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की है. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को किसी से नहीं छुपाया.

मुख्यमंत्री के बयान पर शिवकुमार ने बेंगलुरु में कहा, ”एक बार मुख्यमंत्री ने कह दिया तो उस पर कोई आपत्ति नहीं है… मुख्यमंत्री जो कहते हैं वही अंतिम होता है. कोई आपत्ति नहीं है, मैं हमेशा कुर्सी (पद) के प्रति वफादार हूं, मैं पार्टी के प्रति वफादार हूं. मुख्यमंत्री ने कहा है — कोई (आगे) सवाल नहीं, कोई चर्चा नहीं, कोई बहस नहीं.” जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें इन चीजों से पीड़ा नहीं होती है तो उन्होंने कहा, ”मैंने इन सभी बातों का जवाब दे दिया है.”

जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या मंत्रिमंडल में फेरबदल होने वाला है तो उन्होंने कहा, ”अभी नहीं….” जब उनसे पूछा गया कि कुछ विधायक मंत्री पद पाने की चेष्टा में लगे हैं तो उन्होंने कहा, ”आखिरकार आलाकमान को मुझे निर्देश देना है और मुझे निर्णय लेना है. आलाकमान ने मुझसे कुछ नहीं कहा है और मैंने कुछ नहीं तय किया है.” लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और मंत्रियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन को लेकर अटकलें तेज हैं. मंत्री पद पाने के इच्छुक विधायकों के एक वर्ग की ओर से भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की मांग की गई है. कुछ विधायकों ने तो खुले तौर पर मंत्री बनने की इच्छा भी जताई है.

एमयूडीए मामला: लोकायुक्त पुलिस को भेजा गया ईडी का पत्र राजनीति से प्रेरित है: सिद्धरमैया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बुधवार को मैसुरु शहर विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूखंड आवंटन मामले के संबंध में राज्य लोकायुक्त पुलिस को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा हाल में भेजे गए पत्र को ”राजनीति से प्रेरित” बताया और कहा कि यह पत्र उन्हें और अदालत को प्रभावित करने के इरादे से भेजा गया है. उन्होंने कहा कि ईडी के पास मामले की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है.

ईडी को एमयूडीए द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी बीएम पार्वती को 14 भूखंडों को आवंटित करने के मामले में कई अनियमितताओं के सबूत मिले हैं. केंद्रीय एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी थी. उन्होंने लोकायुक्त को ईडी के पत्र पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, ”यह राजनीति से प्रेरित है. कल एकल पीठ के आदेश के खिलाफ हमारी रिट अपील (उच्च न्यायालय में खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए) आने वाली है, यदि उन्होंने इसके ठीक पहले ऐसा किया है, तो इसका क्या मतलब है? सबसे पहले तो उसके पास (ईडी) जांच करने का कोई अधिकार नहीं है, वे कानूनी तौर पर ऐसा नहीं कर सकते. दूसरे, उसने अदालत को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया है.”

मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”लोकायुक्त जांच कर रहे हैं और उन्हें रिपोर्ट सौंपनी होगी. यह उन्हें प्रभावित करने और उनके प्रति पूर्वाग्रह रखने के लिए किया गया है. यह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है.” संघीय एजेंसी ने हाल में कर्नाटक लोकायुक्त विभाग को भेजे गए एक पत्र में यह भी दावा किया था कि उसकी जांच में यह भी पता चला है कि एमयूडीए ने बेनामी और अन्य ऐसे लेनदेन में कुल 1,095 भूखंडों को “अवैध रूप से” आवंटित किया है.

‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा देखी गई जांच रिपोर्ट और आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पार्वती मामले के साथ ही एमयूडीए में कथित अवैध गतिविधियां समाप्त नहीं हुईं, बल्कि कुल 1,095 भूखंड अवैध रूप से आवंटित किए गए हैं जिनका बाजार मूल्य 700 करोड़ रुपये है. मुख्यमंत्री ने दोहराया कि ईडी के पास मामले की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन फिर भी वे जांच कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ”राज्यपाल ने जांच करने को कहा था, जिला न्यायालय (विशेष न्यायालय) ने लोकायुक्त पुलिस को जांच कर 24 दिसंबर तक रिपोर्ट पेश करने को कहा था. वे (लोकायुक्त पुलिस) जांच कर रहे हैं, लेकिन वे (ईडी) पत्र क्यों लिख रहे हैं? उनका इरादा क्या है? क्या यह जानबूझकर नहीं किया गया है?”

उन्होंने कहा, ”इसमें (मामले में) कोई सच्चाई नहीं है. वे (ईडी) मामले की जांच कर रहे हैं, उन्हें स्वतंत्र रूप से रिपोर्ट देनी चाहिए? उन्होंने (लोकायुक्त को) पत्र क्यों लिखा है? वे जानकारी साझा कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे पत्र लिखें और इसे मीडिया को जारी कर दें.” उन्होंने कहा कि इरादा ”पूरी तरह से, सौ फीसदी राजनीतिक है”.

इस मामले में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उनकी पत्नी पार्वती बी. एम., उनके रिश्तेदार मल्लिकार्जुन स्वामी और अन्य आरोपी हैं.
एमयूडीए मामले में आरोप है कि सिद्धरमैया की पत्नी से अधिगृहित जमीन के बदले उन्हें मैसुरु के एक रिहायशी इलाके में भूखंड आवंटित किया गया था, जिसका संपत्ति मूल्य उनकी भूमि के स्थान की तुलना में अधिक था.

एमयूडीए ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50 : 50 योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे, जहां आवासीय ‘लेआउट’ विकसित किया गया था. इस विवादास्पद योजना के तहत, एमयूडीए ने आवासीय ‘लेआउट’ बनाने के लिए भूमि खोने वालों को उनसे अधिगृहित अविकसित भूमि के बदले में 50 प्रतिशत विकसित भूमि आवंटित की.

By Yogesh Kumar Sahu