भारत की अध्यक्षता में जी-20 शेरपा की तीसरी बैठक विकास लक्ष्यों पर केंद्रित रही

हम्पी. भारत की जी-20 अध्यक्षता का इरादा समूह की पहचान को विकास के लिए संरक्षित करना है जो विकसित एवं उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को एक साझा मंच पर लाता है. भारत के जी-20 शेरपा अमिताभ कांत की अध्यक्षता में यहां आयोजित समूह के सदस्य देशों के शेरपा की तीन दिवसीय बैठक के समापन पर रविवार को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई.

बैठक के दौरान हुए विचार विमर्श के केंद्र में मसौदा विज्ञप्ति थी, जो नौ और 10 सितंबर को नयी दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में की जाने वाली नेताओं की संयुक्त घोषणा को आकार देने में मददगार साबित होगा. मसौदा दस्तावेज में सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी), हरित विकास, बहुपक्षीय विकास बैंकों (एमडीबी) में सुधार, डिजिटल जन बुनियादी ढांचे और लैंगिक समानता सहित छह प्राथमिकताओं को शामिल किया गया है, जो विभिन्न कार्य समूहों के विचार विमर्श के नतीजे के रूप में सामन आए हैं.

बयान में कहा गया है कि जी20 सदस्य परिवर्तनकारी, कार्य-उन्मुख पहल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गहप मंथप कर रहे हैं, जो एक विश्व, एक परिवार की भावना को आत्मसात करती है. बयान में कहा गया, ”इन तीन दिनों के दौरान, शेरपाओं और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने नेताओं की घोषणा के मसौदे पर सहयोगात्मक रूप से काम किया, जो महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर प्रगति के लिए जी-20 देशों के सामूहिक संकल्प और सतत विकास को प्राथमिकता देने और गंभीर चुनौतियों से निपटने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.”

इसमें कहा गया, ”भारत की जी-20 अध्यक्षता का इरादा समूह की पहचान को विकास के लिए संरक्षित करना है, जो विकसित एवं उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को एक साझा मंच पर लाता है.” बयान के मुताबिक, यूक्रेन संकट से संबंधित मुद्दे पर कोई आम सहमति नहीं बनी क्योंकि भारतीय वार्ताकारों का कहना था कि जी-20 को भू-राजनीतिक संकट पर अलग-अलग विचारों के कारण विकास संबंधी मुद्दों से अपना ध्यान नहीं हटाना चाहिए.

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