देश पर लंबे समय तक शासन करने वालों ने आदिवासी इलाकों के विकास को कभी प्राथमिकता नहीं दी: मोदी

अहमदाबाद. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विपक्षी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि जो लोग लंबे समय तक देश की सत्ता में रहे, उन्होंने कभी आदिवासी इलाकों के विकास को प्राथमिकता नहीं दी, क्योंकि इसके लिए कठिन परिश्रम की जरूरत होती है. नवसारी जिले के अदिवासी बहुल इलाके के खुदवेल गांव में ‘गुजरात गौरव अभियान रैली’ को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने विकास कार्यों की शुरुआत वोट हासिल करने या चुनाव जीतने के लिए नहीं की है, बल्कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने की मंशा से की है.

गौरतलब है कि गुजरात मोदी का गृह राज्य है जहां इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. भारतीय जनता पार्टी यहां अपनी सत्ता को कायम रखने का प्रयास कर रही है. मोदी ने किसी का नाम लिए बिना कहा, ‘‘जिन्होंने लंबे समय तक देश पर शासन किया, उन्होंने कभी आदिवासी इलाकों के विकास को प्राथमिकता नहीं दी क्योंकि इसके लिए कठिन परिश्रम की जरूरत होती है. पहले आदिवासी इलाकों में अच्छी सड़क तक नहीं होती थी.’’ इस मौके पर मोदी ने आदिवासी इलाके के लिए 3,050 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास अथवा उद्घाटन किया.

उन्होंने कहा, ‘‘पहले दूरदराज के गांवों और आदिवासी इलाकों तक टीकाकरण कार्यक्रम को पहुंचाने में प्रशासन को सालों लग जाते थे. जबकि शहरों तक यह आसानी से पहुंच जाता था, पहले जंगलों में रहने वाले लोगों को छोड़ दिया जाता था. लेकिन हमने इन इलाकों में रहने वाले लोगों का (कोविड-19 टीकाकरण अभियान के दौरान) ख्याल रखा.’’ प्रधानमंत्री मोदी ने रैली में मौजूद लोगों से पूछा कि क्या उन्हें कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीके की खुराक मुफ्त में मिली है या नहीं? इस पर लोगों ने ‘हां’ में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि इस आदिवासी इलाके के एक मुख्यमंत्री थे जिनके अपने गांव में पानी की कोई टंकी नहीं थी और लोग हैंडपंप पर निर्भर थे.

मोदी ने कहा, ‘‘लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने पानी की टंकी बनाने का आदेश दिया. गुजरात ने उन दिनों को भी देखा है जब जामनगर में पानी की टंकी का उद्घाटन पहले पन्ने की खबर होती थी.’’ इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने 961 करोड़ रुपये की लागत से तापी, नवसारी और सूरत जिलों में जलापूर्ति की 13 परियोजनाओं के लिए भूमि पूजन किया.

मोदी ने इस अवसर पर 586 करोड़ की लागत से अस्तोल क्षेत्रीय जलापूर्ति परियोजना का उद्घाटन भी किया जिसमें मधुबन बांध से जलापूर्ति होगी. इस परियोजना के तहत पेयजल को 1800 फुट यानी 200 मंजिला इमारत जितनी ऊंचाई तक ले जाया जाएगा.
उन्होंने नवसारी में एक चिकित्सा महाविद्यालय का भी शिलान्यास किया जिसके निर्माण पर 542 करोड़ रुपये की लागत आएगी. प्रधानमंत्री ने 163 करोड़ रुपये की लागत से तैयार ‘‘नल से जल’’ परियोजना का भी उद्घाटन किया.

मोदी ने कहा, ‘‘कुछ लोग कहते हैं कि हम इस तरह के काम चुनाव को ध्यान में रखकर करते हैं. मैं करीब दो दशक से सार्वजनिक जीवन में हूं. मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे मुझे कोई एक हफ्ता दिखाएं जिस दौरान मैंने विकास कार्य शुरू नहीं किया. वर्ष 2018 में कुछ लोगों ने दावा किया कि यह हम वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कर रहे हैं.’’ उन्होंने अस्तोल जलापूर्ति परियोजना का संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘अब वे गलत साबित हुए हैं. हम पानी को उठाकर पहाड़ी की चोटी पर ले गए हैं. कौन 200-300 मतों के लिए ऐसी कड़ी मेहनत करता है? हमने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए यह किया न कि चुनाव के लिए.’’

मोदी ने कहा कि पहले राज्य के आदिवासी इलाकों के स्कूलों में 12वीं के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान विषय नहीं होता था. उन्होंने दावा किया, ‘‘लेकिन वर्ष 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने आदिवासी इलाकों के स्कूलों में विज्ञान विषय शुरू करने का बीड़ा उठाया और आज हमारे आदिवासी इलाकों में मेडिकल और इंजीनियरिग कॉलेज के साथ-साथ विश्वविद्यालय तक हैं.’’ मोदी ने कहा कि गत दो दशक में गुजरात का तेजी से हुआ विकास राज्य के लिए गर्व की बात है.

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