पटौदी परिवार से कहा कि उनकी विरासत जीवित रखने का पूरा प्रयास करूंगा : तेंदुलकर

अपने फैसलों पर फोकस रखें शुभमन, बाहरी आवाजों पर ध्यान नहीं दे : तेंदुलकर

नयी दिल्ली. भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्हें जैसे ही पता चला कि भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट श्रृंखला के लिये ट्रॉफी का नाम बदला जा रहा है, उन्होंने दिवंगत मंसूर अली खान पटौदी के परिवार से संपर्क किया और उन्हें आश्वस्त किया कि इस श्रृंखला से पूर्व कप्तान का जुड़ाव खत्म नहीं होगा .

पटौदी ट्रॉफी का नाम बदलकर तेंदुलकर और इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन के नाम पर एंडरसन – तेंदुलकर ट्रॉफी रखा गया है . यह फैसला इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड और बीसीसीआई ने मिलकर लिया है . तेंदुलकर ने पीटीआई को दिये इंटरव्यू में कहा ,” मुझे पता है कि बीसीसीआई ने कुछ महीना पहले पटौदी ट्रॉफी को रिटायर किया है . लेकिन जब मुझे पता चला कि इसका नाम मेरे और एंडरसन के नाम पर रखा जा रहा है तो मैने सबसे पहले पटौदी परिवार को फोन किया .”

उन्होंने कहा ,” टाइगर पटौदी ने कई पीढियों को प्रेरित करने में बड़ी भूमिका निभाई है जिसे भुलाया नहीं जा सकता . ” पटौदी परिवार श्रृंखला से जुड़ा रहेगा क्योंकि अब विजयी कप्तान को नया ‘पटौदी उत्कृष्टता पदक ‘ देने का फैसला किया गया है . यह तेंदुलकर और बीसीसीआई के पूर्व सचिव तथा आईसीसी के मौजूदा चेयरमैन जय शाह और ईसीबी के आला अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद हुआ .

तेंदुलकर ने कहा ,” मैने उनसे बात की . मैने सब कुछ बताया . मैने यह भी कहा कि पटौदी विरासत को जीवंत रखने के लिये हमें हरसंभव प्रयास करने होंगे . इसके बाद मैने शाह और ईसीबी अधिकारियों से बात करके कुछ सुझाव दिये .” उन्होंने कहा ,” क्योंकि पटौदी ने कई पीढियों को प्रेरित करने में बड़ी भूमिका निभाई जिसे भुलाया नहीं जा सकता . मुझे खुशी है कि उनके सम्मान में एक पदक देने का फैसला किया गया है . मुझे खुशी है कि सारे फोन कॉल और बातचीत का सकारात्मक नतीजा निकला .” उन्होंने कहा ,” मैने पहली बार 1988 में इंग्लैंड का दौरा किया था . मेरी पहली फ्लाइट मुंबई से लंदन की थी . अब मेरे नाम से वहां ट्रॉफी होने से काफी खुशी हो रही है .”

अपने फैसलों पर फोकस रखें शुभमन, बाहरी आवाजों पर ध्यान नहीं दे : तेंदुलकर
महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का मानना है कि भारतीय क्रिकेट में बदलाव के कठिन दौर में टीम की कमान संभालने जा रहे शुभमन गिल को उचित समय और सहयोग दिया जाना चाहिये और नये कप्तान को सलाह दी कि ड्रेसिंग रूम से बाहर की टिप्पणियों पर सोचे बिना वह अपनी रणनीति पर फोकस रखें . 25 वर्ष के गिल इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला में भारत के कप्तान होंगे . इस श्रृंखला के साथ ही विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के नये चक्र की शुरूआत होगी . भारतीय टीम अपने तीन सबसे अनुभवी खिलाड़ियों विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन के बिना उतरेगी जो टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं .

हेडिंग्ले में पहले टेस्ट से पूर्व पीटीआई को दिये इंटरव्यू में तेंदुलकर ने कहा,” मुझे लगता है कि उसे (गिल को) समय देना होगा . उसे सहयोग देने की भी जरूरत है .” भारत का कप्तान होना काफी दबाव वाला काम है और तेंदुलकर को पता है कि अलग अलग तरह के सुझाव सामने आयेंगे लेकिन उनका मानना है कि गिल इससे बखूबी निबट लेंगे .

उन्होंने कहा ,” मुझे लगता है कि कई तरह के सुझाव सामने आयेंगे कि उसे ऐसा करना चाहिये या वैसा करना चाहिये . इस तरह की बातें होंगी लेकिन उसे टीम की रणनीति पर फोकस करना चाहिये . ड्रेसिंग रूम में क्या बात हो रही है और क्या रणनीति उसके अनुरूप है .” तेंदुलकर ने कहा ,” और जो भी फैसले हो रहे हैं, वे टीम के हित में हैं या नहीं और उसे किस पर ध्यान देना चाहिये . उसे बाहरी आवाजों पर ध्यान नहीं देना चाहिये जिसमें लोग कहेंगे कि वह अधिक आक्रामक है या अधिक रक्षात्मक या इसी तरह की बातें . लोग राय देते रहेंगे .” उन्होंने कहा ,” आखिर में मायने यही रखता है कि ड्रेसिंग रूम में क्या हो रहा है और टीम के हित में वह क्या कर रहा है . यही अहम है, बाकी कुछ नहीं .” इंग्लैंड में 1990 से 2011 के बीच में पांच टेस्ट श्रृंखलायें खेल चुके तेंदुलकर का मानना है कि बल्लेबाजों को हालात के अनुरूप खुद को ढालना होगा .

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