निर्वासित उइगर लोगों के लिए संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बहुप्रतीक्षित पुष्टि

बीजिंग. जुमरेत दावुत ने जब सुना कि संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की है कि चीन के सुदूर पश्चिमी ंिशजियांग क्षेत्र में बींिजग की कार्रवाई को मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. वह अतीत के उन दिनों में चली गईं जब शिविर में उनके साथ हिरासत में लोगों को रखा गया था और उनके पिता की ंिशजियांग पुलिस की हिरासत में मौत हो गई थी.

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अब न्याय हुआ है क्योंकि दुनिया में ऐसे लोग हैं जो दूसरों की सुध लेते हैं. मुझे लगता है कि जागरूकता फैलाने की हमारी कोशिशें आखिरकार रंग लाई. ’’ दावुत और अब चीन के बाहर रहे उइगर के अन्य पीड़ितों की सामूहिक हिरासत (उइगर में) तथा अन्य मानवाधिकार हनन पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट वर्षों के अभियान का परिणाम है. साथ ही, उनके लिए यह उन कार्रवाइयों की पुष्टि है जो चीन सरकार ने की थी.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने जिनेवा में यह बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट बुधवार देर रात जारी की. इसमें कहा गया है कि चीन ने आतंकवाद और चरमपंथ रोधी अपनी नीतियों के तहत मानवाधिकारों का गंभीर हनन किया. साथ ही, इसमें संयुक्त राष्ट्र, विश्व समुदाय और खुद चीन से इसका समाधान करने के लिए तत्काल ध्यान देने की अपील की गई है.

उल्लेखनीय है कि हिरासत शिविरों में रखे गये लोगों की आवाज बंद करने की कोशिशों के तहत उन्हें वर्षों तक चीनी पुलिस की धमकियों का सामना करना पड़ा. शिविरों के बारे में अमेरिकी संसद के समक्ष नवंबर 2018 में गवाही देने वाली मिहरीगुल तुरसुन ने कहा कि बोलने की कीमत उन्हें अपनी सुरक्षा को निरंतर खतरा पैदा किये जाने से चुकानी पड़ी. उन्होंने बताया कि उन्हें झूठा कहा गया, कार से उनका पीछा किया गया और रेस्तरां में अजनबी लोगों से उनकी तस्वीरें ंिखचवाई गईं.

उन्होंने कहा, ‘‘रिपोर्ट महज शुरूआत है. जब तक सभी हिरासत केंद्र बंद नहीं हो जाते, उन्हें चैन नहीं मिलेगा. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें नतीजे चाहिए, हम कार्रवाई चाहते हैं. मैं जानना चाहती हूं कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के बाद क्या होगा, उसके बाद हम क्या कर सकते हैं?’’

चीन ने उइगर मुसलमानों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को किया खारिज

चीन ने बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र (संरा) मानवाधिकार कार्यालय की एक रिपोर्ट जारी होने पर हैरान जतायी है, जिसमें उसपर शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के ‘‘मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन’’ का आरोप लगाया गया है. चीन ने रिपोर्ट को अवैध और अमान्य करार देते हुए कहा कि अमेरिका ने उसे रोकने के लिए यह रिपोर्ट गढ़ी है. निवर्तमान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बेचलेट की बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट, जिनेवा में नाटकीय अंदाज में जारी की गई.

बैचलेट चीन के साथ लंबे समय तक चले राजनयिक विवाद के बाद मई में शिनजियांग गई थीं, जिसके बाद यह रिपोर्ट जारी की गई है. चीन ने रिपोर्ट जारी करने पर आश्चर्य जताते हुए इसपर कड़ा विरोध दर्ज कराया. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने यहां एक मीडिया ब्रींिफग में रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘तथाकथित आकलन अमेरिका और कुछ पश्चिमी ताकतों द्वारा रचा और तैयार किया गया है. यह पूरी तरह से अवैध और अमान्य है.’’ चिली की पूर्व राष्ट्रपति बैचलेट ने अत्यधिक दबाव के बीच आखिरकार बींिजग के विरोध को दरकिनार कर दिया और बुधवार को अपने कार्यकाल के अंतिम दिन रिपोर्ट जारी की.

रिपोर्ट में कहा गया है कि शिनजियांग में उइगर और अन्य मुस्लिम जातीय समूह के लोगों को सरकार द्वारा जबरन नजरबंद रखना मानवता के खिलाफ अपराध के दायरे में आ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार चीन ने अपनी आतंकवाद और उग्रवाद रोधी नीतियों के तहत मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किया है. संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, विश्व बिरादरी और खुद चीन से इस पर ‘‘तत्काल ध्यान’’ देने का आह्वान किया है.

पश्चिमी राजनयिकों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा कि रिपोर्ट लगभग तैयार थी, लेकिन बैचलेट का चार साल का कार्यकाल पूरा होने से कुछ ही मिनटों पहले इसे जारी किया गया. कई पत्रकारों, स्वतंत्र मानवाधिकार समूहों ने शिनजियांग में वर्षों से मानवाधिकार उल्लंघन पर काफी कुछ लिखा है. बैचलेट की इस रिपोर्ट पर संयुक्त राष्ट्र तथा उसके सदस्य देशों की मुहर लगी है. इसके जारी होने के बाद विश्व संस्था में चीन के प्रभाव पर बहस छिड़ गई.

रिपोर्ट जारी होने से कुछ देर पहले संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जून ने कहा था कि बींिजग इस रिपोर्ट का ‘‘दृढ़ता से विरोध’’ करता है. मानवाधिकार समूहों और जापान की सरकार ने इस रिपोर्ट का स्वागत किया है. जापान रिपोर्ट पर टिप्पणी करने वाले शुरुआती देशों में से एक था. रिपोर्ट बृहस्पतिवार की सुबह एशिया में जारी की गयी थी.

जापान के शीर्ष सरकारी प्रवक्ता ने चीन से शिनजियांग क्षेत्र में पारर्दिशता और मानवाधिकार की स्थिति में सुधार करने का आग्रह किया. मानवाधिकार संगठनों ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ और ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने संयुक्त राष्ट्र और सरकारों से मानवाधिकारों के हनन की एक स्वतंत्र जांच करने का आह्वान किया.

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