
नयी दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री के मध्यप्रदेश से होने के बावजूद राज्य के बासमती चावल को अब तक ‘जीआई टैग’ नहीं मिल पाने पर अफसोस जाहिर करते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय ंिसह ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि दूसरे प्रदेशों के किसान मप्र से बासमती चावल ले कर उस पर अपना ‘जीआई टैग’ लगा लेते हैं और उसका निर्यात कर लाभ कमा रहे हैं।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए ंिसह ने कहा कि मध्यप्रदेश में हर साल चार लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का उत्पादन होता है लेकिन उसे अब तक ‘जीआई टैग’ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के किसान मध्यप्रदेश से बासमती चावल ले कर उस पर अपना ‘जीआई टैग’ लगा कर निर्यात करते हैं और स्वयं लाभ कमा रहे हैं जिससे मप्र के किसानों को नुकसान होता है।
उन्होंने कहा कि 2013 में मध्यप्रदेश के बासमती चावल के लिए ‘जीआई टैग’ की मंजूरी मिल गई थी लेकिन 2016 में मोदी सरकार ने उसे रद्द कर दिया। ”मप्र के बासमती चावल के लिए जीआई टैग मिलने पर राज्य के 40 फीसदी बासमती चावल का निर्यात हो सकता था।” ंिसह ने दावा किया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के आसपास विभिन्न उत्पादों के लिए 77 ‘जीआई टैग’ मिल चुके हैं और उनमें से 21 ‘जीआई टैग’ प्रधानमंत्री के निर्देश पर एक ही दिन में दिए गए। ”लेकिन मध्यप्रदेश वंचित रहा। इस मामले में सरकार और एपीडा निष्क्रिय है।” ंिसह ने कहा कि इस बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री को एक दिसंबर 2025 को पत्र लिखा था लेकिन आज तक कोई फैसला नहीं हुआ।
ंिसह ने कहा ”यह हमारा दुर्भाग्य है कि देश के कृषि मंत्री (शिवराज ंिसह चौहान) मध्यप्रदेश से आते हैं और बारह साल तक वह राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे। लेकिन राज्य का बासमती चावल जीआई टैग से वंचित है। यह स्थिति तब है जब ज्यादातर बासमती चावल का उत्पादन उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में होता है।” मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ंिसह ने कहा ”यह भी दुर्भाग्य है कि अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के बाद अमेरिका के कृषि मंत्री तो अपनी बात रख रहे हैं लेकिन हमारे कृषि मंत्री इस बारे में मौन हैं कि इस समझौते से भारत के किसानों को कहीं नुकसान तो नहीं होगा।”



