
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के शिक्षा मॉडल को खोखला बताया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों का 10 वीं व 12 वीं का परीक्षा परिणाम काफी नीचे चला गया है।
धर्मेंद्र प्रधान बिजनेस टुडे इंडिया@100 शिखर सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि क्या देश के राष्ट्रपति की पोती व गरीब परिवार की बच्ची की फीस एक हो सकती है। अलग-अलग होनी चाहिए। जो सक्षम है, उसे अदा करना चाहिए और जो नहीं दे सकता उसकी चिंता सरकार को करनी चाहिए। बता दें कि अमर उजाला, बिजनेस टुडे इंडिया@100 कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर है। वहीं उन्होंने आगे एक सवाल के जवाब में कहा कि यदि आबकारी नीति की चोरी से बचने के लिए न्यूयार्क टाइम्स दिखाकर बचना चाहते हैं तो भविष्य जनता तय करेगी।
सीयूईटी की समस्याओं का होगा समाधान, विशेषज्ञ समूह बनेगा
सीयूईटी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को स्वीकार करते हुए शिक्षामंत्री ने कहा कि इस साल परीक्षा आयोजित करने में कुछ समस्याएं हुई हैं और मैं इसकी जिम्मेदारी ले रहा हूं। उन्होंने कहा, आगे इस व्यव्स्था को दुरुस्त किया जाएगा। सरकार इस परीक्षा को लागू करने में आ रही चुनौतियों पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।
उन्होंने कहा, सीयूईटी के कार्यान्वयन में बहुत सारे मुद्दों का सामना करना पड़ा। सितंबर तक सभी प्रकार की प्रवेश परीक्षाएं समाप्त हो जाएंगी। फिर इस पर गौर करने के लिए एक विशेषज्ञ समूह बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, नई शिक्षा नीति का प्रयास है, छात्र आत्मविश्वासी हों, पाठ्यक्रम कम बोझ वाले हों और परीक्षा खुशनुमा हो।



