केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दिल्ली में बिहू उत्सव का आयोजन किया

नयी दिल्ली: केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने यहां अपने आधिकारिक आवास पर रोंगाली बिहू और असमिया नव वर्ष के उपलक्ष्य में ‘रोंगालीर एनजोरी’ उत्सव का आयोजन किया। बृहस्पतिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मुख्य अतिथि और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले असमिया और पूर्वोत्तर समुदायों के कई गणमान्य व्यक्ति, कलाकार और सदस्य भी शामिल हुए।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा, ‘‘रोंगाली बिहू हम सभी के लिए राष्ट्र की प्रगति की खातिर आगे बढ़ने की नयी ऊर्जा और प्रेरणा लेकर आता है। यह त्योहार सिर्फ उत्सव मनाने के बारे में ही नहीं है, यह एकता, परंपरा और हमारी साझा सांस्कृतिक पहचान के बारे में है।’’

सोनोवाल ने कहा कि घर से दूर होने के बावजूद, दिल्ली में मनाया जाने वाला यह त्योहार अपनी जड़ों से हर असमिया के गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘‘जब प्रकृति रंगों में रंग जाती है, तो ढोल की लयबद्ध थाप के साथ बिहू गीतों की ध्वनि हवा को प्रसन्­नता और गर्व से भर देती है। यह बिहू हमें हमारी विरासत से जोड़ता है और हमें नयी उम्मीद और उत्साह से भर देता है।’’

सोनोवाल ने कहा कि बिहू जैसे त्­योहार भारत की सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं से इस समृद्ध विरासत को संरक्षित करने और आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। सोनोवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण पर भी बल देते हुए कहा, ‘‘हमें इस उत्साहपूर्ण मौसम में विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लेना चाहिए।’’

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस आयोजन के लिए सोनोवाल की सराहना करते हुए कहा, ‘‘रोंगाली बिहू सद्भाव और सद्भावना का संदेश देता है। यह एकता की शक्ति को मजबूत करते हुए भारत की सांस्कृतिक विविधता की सुंदरता को प्रर्दिशत करता है। मैं इस त्योहार के मौसम में दिल्ली के साथ-साथ असम के लोगों को भी अपनी शुभकामनाएं देती हूं क्योंकि हम सभी के लिए शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।’’

केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने भी सभा को संबोधित किया। उन्­होंने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सांस्कृतिक तालमेल की प्रशंसा की। रीजीजू ने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर भारत के समुदायों के बीच मजबूत संबंध राष्ट्रीय विकास के इंजन को सशक्त बना रहे हैं। इस क्षेत्र की समृद्ध कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत भारत की सामूहिक पहचान में जीवंत रंग जोड़ती है।’’

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